
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ( File Photo - IANS)
Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार में राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। खास तौर पर पांचवीं सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इस सीट का नतीजा अब कुछ छोटी पार्टियों की ताकत और फैसले पर टिका है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कुल छह MLA इस चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। इस बीच, AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने समर्थन के लिए महागठबंधन के सामने एक बड़ी शर्त रखी है।
AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने एक मीडिया हाउस से बात करते हुए कहा कि नॉमिनेशन से पहले उनकी तेजस्वी यादव से बातचीत हुई थी। उस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी की दावेदारी भी पेश की थी। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने उस समय कहा था कि वह दिल्ली से लौटने के बाद इस मामले पर चर्चा करेंगे। लेकिन बाद में उनसे सलाह किए बिना ही उम्मीदवार का नॉमिनेशन कर दिया गया।
अख्तरुल ईमान ने कहा, 'अगर वे (तेजस्वी यादव) जीतने को लेकर सीरियस होते, तो हमसे बात करते। अगर उन्हें हमारे वोट चाहिए, तो उन्हें हमारी डिग्निटी (मर्यादा) का सम्मान करना होगा। हम कब तक सेक्युलरिज्म के नाम पर दूसरों का कंधा बनते रहेंगे? अभी तक किसी भी गठबंधन नेता ने समर्थन के लिए हमसे कॉन्टैक्ट नहीं किया है।'
राज्यसभा चुनाव में 5 विधायकों वाली AIMIM फिलहाल किंगमेकर की स्थिति में है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव के सामने अपनी शर्त साफ कर दी है। इमान का कहना है कि उनकी पार्टी का समर्थन मुफ्त नहीं होगा। राजनीति में गिव एंड टेक होना चाहिए। ऐसे में अगर AIMIM राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन करती है तो बदले में विधान परिषद की खाली होने वाली एक सीट पर महागठबंधन को उनकी पार्टी का समर्थन करना चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान अपने करीबी नेता और पार्टी प्रवक्ता आदिल को विधान परिषद भेजना चाहती है। यदि तेजस्वी राजी होते हैं, तभी ओवैसी के विधायक राजद उम्मीदवार के लिए राज्य सभा में वोट करेंगे।
बहुजन समाज पार्टी के अकेले MLA, सतीश कुमार सिंह यादव भी इस चुनाव में अहम भूमिका में हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें अभी तक पार्टी सुप्रीमो से कोई निर्देश नहीं मिला है। इस मामले पर कोई भी फैसला 9 मार्च को नामांकन वापस लेने की डेडलाइन के बाद ही किया जाएगा।
विपक्ष ने अपनी रणनीति के तहत बिहार के सबसे अमीर सांसदों में से एक एडी सिंह (अमरेंद्र धारी सिंह) को मैदान में उतारा है। करीब 238 करोड़ की संपत्ति के मालिक एडी सिंह का कद और उनकी नेटवर्किंग एनडीए के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भूमिहार जाति से ताल्लुक रखने वाले एडी सिंह एनडीए खेमे के स्वर्ण (विशेषकर भूमिहार) विधायकों से संपर्क साध रहे हैं। विपक्ष को उम्मीद है कि कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं।
राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत होती है। NDA के पास अभी अपने पांचवें कैंडिडेट (उपेंद्र कुशवाहा) की जीत पक्की करने के लिए 38 वोट हैं। उन्हें जीतने के लिए सिर्फ तीन और वोट चाहिए। वहीं RJD की अगुआई वाली विपक्ष के पास 35 वोट हैं और जीतने के लिए उन्हें छह और वोट चाहिए।
ऐसे में AIMIM के 5 और BSP का 1 विधायक ही तय करेंगे कि 5वीं सीट किसकी झोली में जाएगी। अगर ओवैसी के MLA वोटिंग का बॉयकॉट करते हैं, तो जीतने का कोटा कम हो जाएगा, जिसका सीधा फायदा NDA को होगा।
यह चुनाव सिर्फ राज्यसभा सीटों का नहीं, बल्कि क्रेडिबिलिटी का भी है, क्योंकि एनडीए की तरफ से इस बार तीन दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष (नीतीश कुमार, नितिन नवीन और उपेन्द्र कुशवाहा) भी मैदान में हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमा के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक विदाई को गरिमापूर्ण बनाने जैसा है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की भी यह पहली बड़ी संगठनात्मक परीक्षा है। उन पर अपने कोटे के उम्मीदवार को जिताने के साथ-साथ एनडीए के पांचों प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। वहीं, उपेन्द्र कुशवाहा के लिया अपनी सीट बचाना भी एक चुनौती है।
| पार्टी/गठबंधन | कुल विधायक | राज्यसभा के लिए उपलब्ध (5वीं सीट) | जरूरत |
| NDA | 202 | 38 (अतिरिक्त) | 03 |
| महागठबंधन | 35 | 35 | 06 |
| निर्णायक | AIMIM (5) + BSP (1) | 06 | - |
Published on:
09 Mar 2026 12:08 pm
बड़ी खबरें
View Allपटना
बिहार न्यूज़
ट्रेंडिंग
