
वायरल वीडियो स्क्रीन ग्रैब
Bihar News: बिहार के नवादा जिले के रजौली चेकपोस्ट का एक वीडियो बीते दिनों तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें चेकपोस्ट पर तैनात गृहरक्षक जवानों ने एक ट्रक चालक से खर्चा-पानी की डिमांड की थी और घूस के तौर पर आलू भी मांगे थे। मामला उजागर होने के बाद अब प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। वायरल वीडियो की जांच के बाद दोषी पाए गए 11 गृहरक्षक जवानों को निलंबित कर दिया गया है। नवादा पुलिस अधिक्षक अभिनव धीमान की अनुशंसा पर जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने यह कार्रवाई की है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना 24 नवंबर 2025 की रात करीब 10 से 11 बजे के बीच की है। रजौली चेकपोस्ट पर ड्यूटी पर तैनात गृहरक्षकों ने आलू लदे एक वाहन को रोका। आरोप है कि जवानों ने वाहन चालक से जबरन आलू देने की मांग की और उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। चालक द्वारा मना करने पर उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया और दबाव बनाया गया।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब चालक ने अपने मोबाइल फोन से इस पूरी घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो बनाते देख जवानों ने उसके साथ धक्का-मुक्की भी की। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
वीडियो वायरल होने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने तत्काल जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी पुलिस निरीक्षक, रजौली अंचल को सौंपी गई। जांच अधिकारी ने रजौली थाना अंतर्गत चितरकोली पोस्ट पर जाकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और संबंधित जवानों से पूछताछ की।
जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि वीडियो में दिख रहे सभी गृहरक्षक जवान घटना के समय ड्यूटी पर तैनात थे और उन्होंने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। जांच रिपोर्ट में इसे अनुशासनहीनता, अमर्यादित आचरण और अवैध वसूली की श्रेणी में रखा गया।
जांच में दोषी पाए गए जिन 11 गृहरक्षक जवानों को निलंबित किया गया है। जिसमें शीतल कुमार, ईश्वरी प्रसाद, जवाहर प्रसाद, कन्हैया कुमार, अतीश कुमार, रघुनन्दन प्रसाद, महेश कुमार, रणधीर कुमार, सुधीर कुमार, श्री यादव और मनोज कुमार के नाम शामिल हैं। इन सभी को अगले आदेश तक कर्तव्य से वंचित कर दिया गया है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश ने बिहार गृहरक्षक नियमावली, 1953 के नियम-16 (1) (v) के तहत सभी 11 गृहरक्षकों को निलंबित करने का आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि ड्यूटी के दौरान इस तरह का व्यवहार न सिर्फ सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे पुलिस और प्रशासन की छवि भी धूमिल होती है।
जिला प्रशासन की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया है कि कर्तव्य में लापरवाही, अवैध वसूली और आम जनता के साथ दुर्व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी, चाहे दोषी कोई भी हो।
Updated on:
22 Dec 2025 10:37 am
Published on:
22 Dec 2025 10:37 am
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