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रिशु श्री का भागलपुर कनेक्शन: टेंडर घोटाले की जांच में नया खुलासा, 3.40 करोड़ के ई-टॉयलेट बने कबाड़

Rishu Shree Tender Scam ईओयू की जांच में रिशु श्री की कंपनी को मिले 3.40 करोड़ रुपये के ई-टॉयलेट ठेके में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। निर्माण के कुछ ही समय बाद ई-टॉयलेट जर्जर हो गए, बावजूद इसके अधिकांश के भुगतान हो चुके हैं ।

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Bihar IAS corruption case

ठेकेदार रिशु श्री की फ़ाइल फोटो

Rishu Shree Tender Scam: मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर घोटाले के मामले में जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को मंगलवार को बड़ी जानकारी हाथ लगी है। सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री की रिलायबल कंपनी द्वारा भागलपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बनाए गए 3.40 करोड़ रुपये की लागत वाले 25 ई-टॉयलेट के निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। ईओयू सूत्रों का दावा है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्थापित अधिकांश ई-टॉयलेट शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद अनुपयोगी और जर्जर हो गए। इसके बावजूद परियोजना की अधिकांश राशि का भुगतान कंपनी को कर दिया गया। फिलहाल करीब 50 लाख रुपये का भुगतान लंबित है, जिसे रोक दिया गया है।


इसके साथ ही रिलायबल कंपनी के साथ किया गया एकरारनामा भी रद्द कर दिया गया है। बकाया राशि जब्त किए जाने के बाद इसी वर्ष 9 फरवरी को इशाकचक थाने में रिलायबल इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर रिशु श्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मामले की जांच जारी है।

रिशु श्री के ठेके में करोड़ों की गड़बड़ी के संकेत

सूत्रों के अनुसार, ईओयू की जांच में सामने आया है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 25 यूनिट ई-टॉयलेट के निर्माण का ठेका रिशु श्री की कंपनी रिलायबल इंटरप्राइजेज-रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। इस परियोजना के लिए सरकार की ओर से करीब 3.40 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इस हिसाब से एक ई-टॉयलेट की लागत 13 लाख रुपये से अधिक बैठती है।


जांच में यह भी सामने आया है कि निर्माण के कुछ ही समय बाद अधिकांश ई-टॉयलेट जर्जर और अनुपयोगी हो गए। इसके बावजूद परियोजना की अधिकांश राशि का भुगतान कंपनी को कर दिया गया। सूत्रों का दावा है कि रिशु श्री ने स्थानीय अधिकारियों से अपने कथित प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए भुगतान प्रक्रिया को भी प्रभावित किया।

बताया जाता है कि जिस अवधि में यह परियोजना क्रियान्वित की गई, उस समय डॉ. योगेश सागर भागलपुर नगर निगम के नगर आयुक्त थे। ऐसे में अब उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, इस संबंध में किसी अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष या आरोप सार्वजनिक नहीं किया गया है।