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ईशा फाउंडेशन को ₹1 में जमीन देने पर भड़की RJD, पूछा- ऐतिहासिक बिहार योग विद्यालय की उपेक्षा क्यों?

RJD on Isha Foundation: बिहार के मुंगेर जिले में ईशा फाउंडेशन को मात्र ₹1 प्रति एकड़ की वार्षिक दर पर 99 साल की लीज पर 15 एकड़ सरकारी जमीन देने के सरकार के फैसले पर आरजेडी ने हमला बोला है। RJD ने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता के करोड़ों खर्च करके जिस जमीन को अधिग्रहित किया था, उसे कॉर्पोरेट और पसंदीदा संस्थाओं के लिए कौड़ियों के दाम लुटाया जा रहा है।
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पटना

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Anand Shekhar

Jun 26, 2026

tejashwi yadav RJD

राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव (फोटो-फेसबुक)

Isha Foundation Land Lease Bihar: बिहार के मुंगेर जिले के तेलडीहा में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव की संस्था 'ईशा फाउंडेशन' को 15 एकड़ सरकारी जमीन मात्र ₹1 प्रति एकड़ की वार्षिक दर पर 99 साल की लीज पर देगी। सम्राट सरकार के इस फैसले पर राजद ने रोष व्यक्त किया है। राजद ने इसे 'बिहार नोंच खरोंच खाओ योजना' और 'ज़मीन बंदरबांट योजना' बताया है। राजद का आरोप है कि जिस जमीन के अधिग्रहण पर सरकार ने हाल ही में जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये फूंक दिए, उसे एक निजी संस्था को टोकन मनी के नाम पर मुफ्त में क्यों लुटाया जा रहा है?

₹2.64 करोड़ की जमीन मात्र ₹1 में देने की क्या थी मजबूरी?

राजद के मुताबिक, मुंगेर के तेलडीहा में जिस 15 एकड़ जमीन को बिहार सरकार ने हाल ही में ₹2.64 करोड़ की राशि खर्च करके अधिग्रहित किया था, उसे 99 वर्षों के लिए मात्र ₹1 प्रति एकड़ की दर से ईशा फाउंडेशन को लीज पर देने का निर्णय लिया गया है। राजद ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर इस तिलिस्मी बंदरबांट नीति का आविष्कार किसने किया है? क्या इस योजना में बिहार के स्थानीय कुटीर, लघु, मध्यम या निर्माण क्षेत्र के उद्योगों को कोई भूमि मिल सकती है, या इसमें सिर्फ मोदी-मित्रों और संघी इकोसिस्टम से जुड़ी निजी संस्थाओं के लिए ही विशेष आरक्षण है?

बिहार योग विद्यालय के रहते बाहरी संस्था पर मेहरबानी क्यों?

राजद का कहना है कि मुंगेर को पूरी दुनिया में योग की जननी कहा जाता है और यहां पहले से ही विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय जैसी ऐतिहासिक धरोहर स्थापित है। सरकार पर स्थानीय पहचान के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए राजद ने कहा, "जब मुंगेर में पहले से ही इतनी बड़ी ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है, तो सरकार को अगर पर्यटन या योग को बढ़ावा ही देना था, तो वह बिहार योग विद्यालय के इर्द-गिर्द संरचना विकास क्यों नहीं कर रही थी? बिहार की संपत्ति किसी राजनीतिक दल की निजी बपौती नहीं है कि उसे बाहरी निजी संस्थाओं के व्यावसायिक लाभ के लिए कौड़ियों के दाम सौंप दिया जाए।"

पटना का बांसघाट भी सौंपा, अंतिम संस्कार 10 गुना महंगा होने का आरोप

जमीन विवाद से इतर, राजद ने आरोप लगाया कि पटना के बांसघाट में जनता के पैसे से ₹89 करोड़ की लागत से निर्मित आधुनिक श्मशान घाट को भी ईशा फाउंडेशन को मात्र ₹1 की लीज पर सौंप दिया गया है। राजद का दावा है कि इस निजीकरण के कारण अब आम जनता को अंतिम संस्कार के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। राजद के अनुसार, पहले जहां पास के सरकारी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार का शुल्क महज ₹300 है, वहीं अब इस निजी प्रबंधन के तहत न्यूनतम ₹3500 वसूले जा रहे हैं, जबकि लकड़ी या गैस का खर्च इसके अतिरिक्त है।