जब ADJ-33 के सामने रोशन आनंद की जमानत अर्ज़ी पर सुनवाई शुरू हुई, तो कोर्ट ने मामले के तथ्यों और पुलिस जांच की प्रगति को समझने के लिए 'केस डायरी' तलब कर ली। कोर्ट का मानना है कि 2 जून को हुई हिंसक झड़प, पत्थरबाज़ी और गोलीबारी की घटना की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए, केस डायरी की अच्छी तरह जांच किए बिना कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता। जब तक कोर्ट पुलिस डायरी के हर पन्ने, चश्मदीदों के बयानों और सबूतों की बारीकी से जांच नहीं कर लेती, तब तक ज़मानत नहीं दी जा सकती।