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कैमरे के सामने फूट-फूटकर रो पड़े शिवचंद्र राम, इस्तीफा देकर बोले- 4 रात से नहीं सोया, हमारे साथ नाइंसाफी हुई

Shivchandra Ram resigns: MLC टिकट न मिलने से नाराज RJD के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कैमरे के सामने फूट-फूटकर रो पड़े। पार्टी पर अपना वादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है, जिससे पूरे दलित समुदाय को ठेस पहुंची है।

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पटना

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Anand Shekhar

Jun 08, 2026

Shivchandra Ram resignation

रोते-रोते शिवचंद्र राम ने दिया था इस्तीफा

Shivchandra Ram resigns: बिहार की राजनीति में किसी पार्टी से इस्तीफा देना या पाला बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब कोई बड़ा नेता कैमरे के सामने अपने आंसू नहीं रोक पाता, तो सियासी गलियारों में हलचल मचना तय है। पटना में भी सोमवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां पूर्व मंत्री और राजद के SC/ST सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचंद्र राम ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। विधान परिषद (MLC) का टिकट न मिलने से दुखी शिवचंद्र राम कैमरों के सामने फूट-फूटकर रो पड़े। भावुक होते हुए उन्होंने लालू यादव और तेजस्वी यादव पर वादे से मुकरने का आरोप लगाया और RJD की राजनीति पर नाराजगी जाहीर की।

ऐसी जिंदगी भगवान दुश्मन को भी न दे - शिवचंद्र राम

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही शिवचंद्र राम का दर्द उनकी आंखों से छलक पड़ा। खुद को एक दलित और चमार का बेटा बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने साल 1990 से अपनी राजनीति की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी। उन्होंने हमेशा लालू प्रसाद यादव के सामाजिक न्याय और तेजस्वी यादव के आर्थिक न्याय की विचारधारा को धरातल पर मजबूत करने का काम किया। लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से उनके साथ जो कुछ भी हुआ, उसने उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया है।

उन्होंने रुआंसे गले से कहा, 'जिस कड़वाहट और घुटन में मैंने पिछले तीन-चार दिन बिताए हैं, ऐसी जिंदगी भगवान कभी किसी दुश्मन को भी न दे। मैं पिछले चार रातों से ठीक से सो तक नहीं पाया हूं।'

हम नेता के दरबारी और मजदूर बनकर रह गए

शिवचंद्र राम ने अपनी वफादारी का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा खुद को पार्टी का एक अदना सा वर्कर, दरबारी और मजदूर मानते रहे, जिसने अपने शीर्ष नेताओं के हर फरमान को सिर-माथे पर रखा। उन्होंने कहा कि उनके साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी हुई है। शिवचंद्र राम के मुताबिक, जब से उनके समर्थकों और समाज के लोगों को पता चला है कि उनके साथ धोखा हुआ है, तब से पूरे बिहार से दलित, अति पिछड़ा और पिछड़ा समाज के लोग पटना में आकर होटलों में बैठे हैं।

शिवचंद्र राम ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, संत रविदास और वीर चौहरमल जैसी विभूतियों को मानने वाले बहुजन समाज के करोड़ों लोग इस फैसले से आहत महसूस कर रहे हैं, इसलिए अपने लोगों के सम्मान की रक्षा के लिए वे आरजेडी के एससी/एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।

टिकट के पीछे 'पैसे और पैरवी' के खेल का इशारा

शिवचंद्र राम से जब पूछा गया कि क्या आरजेडी में एमएलसी की सीटें पैसों के लिए बेच दी गईं या पार्टी का उन पर से भरोसा उठ गया, तो उन्होंने कहा, 'मेरा नाम फाइनल चल रहा था, सब कुछ तय था। क्या चल रहा था और पीछे क्या हुआ, यह मैं भी देख रहा था और पूरा बिहार भी देख रहा है।' जब उनसे पूछा गया कि क्या आरजेडी में अब पुराने वफादारों के बजाय दूसरे लोगों और बाहरी तत्वों का सिक्का चल रहा है, तो उन्होंने कहा कि पार्टी में आजकल किसका चल रहा है और किसका नहीं, यह समय आने पर सबको पता चल जाएगा और जनता सब जानती है।

वादा करके मुकर गए लालू और तेजस्वी?

जब शिवचंद्र राम से पूछा गया कि वे सिर्फ़ MLC टिकट के लिए इतना बड़ा कदम क्यों उठा रहे हैं, जबकि पार्टी ने उन्हें पहले मंत्री बनाया और लोकसभा चुनाव में भी उतारा था। इस पर शिवचंद्र राम ने कहा कि उन्हें पार्टी में पहले सम्मान मिला, इसके लिए वे लालू और तेजस्वी यादव का स्वागत करते हैं, लेकिन इस बार की परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं।

उन्होंने कहा कि आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व ने उनसे बकायदा वादा किया था कि उन्हें इस बार उच्च सदन भेजा जाएगा। उन्होंने नेताओं के उसी वादे और भरोसे के आधार पर दिन-रात काम किया। लेकिन जब नेता अपने ही वादे पर खरे नहीं उतरे, तो ऐसी परिस्थिति में अपमान झेलकर और उस पद पर बने रहकर वे क्या करते।

आरजेडी छोड़ने के सवाल पर सस्पेंस बरकरार

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या शिवचंद्र राम सिर्फ पदों से इस्तीफा दे रहे हैं या वे राष्ट्रीय जनता दल की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ देंगे। इस सवाल पर उन्होंने पूरी तरह सस्पेंस बरकरार रखा। शिवचंद्र राम ने कहा कि फिलहाल उन्होंने पार्टी के भीतर के अपने तमाम पदों को त्याग दिया है। आरजेडी में बने रहने या किसी दूसरे दल में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे अभी अपने समर्थकों और समाज के लोगों के साथ बैठकर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। भविष्य में वे जो भी कदम उठाएंगे, उसके बारे में जल्द ही सबको बता दिया जाएगा।