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‘ED रिपोर्ट में 9 IAS के नाम, आनंद किशोर सिंडिकेट के गैंग लीडर’; बिहार टेंडर घोटाला को लेकर राजद सांसद का दावा

Sudhakar Singh on Bihar tender scam: बिहार टेंडर घोटाले पर राष्ट्रीय जनता दल सांसद सुधाकर सिंह ने हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिशु श्री टेंडर सिंडिकेट मामले में केवल जूनियर अधिकारियों पर कार्रवाई कर छोटी मछलियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच नहीं हो रही।
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पटना

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Anand Shekhar

Jun 23, 2026

sudhakar singh on bihar tender scam

राजद सांसद सुधाकर सिंह (फोटो- sudhakar singh FB)

Bihar Tender Scam: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और सांसद सुधाकर सिंह ने मंगलवार को बिहार टेंडर घोटाले को लेकर एक बड़ा दावा किया। पटना हाई कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर 278 पन्नों के जवाबी हलफनामे का हवाला देते हुए सांसद ने आरोप लगाया कि बिहार के शहरी विकास विभाग और नमामि गंगे योजना में लगभग 30,000 करोड़ रुपये का घोटाला चल रहा है। राज्य के नौ सीनियर IAS अधिकारियों का नाम लेते हुए सुधाकर सिंह ने सीनियर IAS अधिकारी आनंद किशोर को इस पूरे भ्रष्टाचार सिंडिकेट का गैंग लीडर बताया।

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से खुला भ्रष्टाचार का सिंडिकेट

सांसद सुधाकर सिंह ने पांच पन्नों का एक दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि यह एक आधिकारिक रिकॉर्ड है जो पहले से ही पब्लिक डोमेन में है। उन्होंने बताया कि 2024 में IAS अधिकारी संजीव हंस की गिरफ्तारी के बाद जब ED ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया, तो सिंडिकेट के मुख्य बिचौलियों में से एक रिशु श्री के पास से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत और व्हाट्सप्प चैट बरामद हुए।

सांसद ने इन व्हाट्सप्प चैट के आधार पर कई गंभीर आरोप लगाए। सुधाकर सिंह ने दावा किया कि शहरी विकास विभाग में अहम पद पर तैनात सचिव संतोष कुमार मल और बिचौलिए रिशु श्री के बीच हुई एक चैट में यह संदेश था कि "मुझे जल्दी से 5 किलो पहुंचाओ, मैंने 11 बार फोन किया है और तुम फोन नहीं उठा रहे हो।" इस स्थिति पर तंज कसते हुए सांसद ने कहा कि किसी IAS अधिकारी को शायद ही पांच किलो चावल की ज़रूरत होगी। बिहार की जनता अच्छी तरह जानते हैं कि इस प्रशासनिक भाषा में 5 किलो का मतलब लाख या करोड़ होता है।

रिश्वत के पैसों से ट्रांसफर - सुधाकर सिंह

सुधाकर सिंह ने आगे आरोप लगाया कि सिंडिकेट के पैसे से एक व्यक्ति की ऑस्ट्रिया यात्रा का 21 लाख रुपये का खर्च उठाया गया, जबकि एक महिला अधिकारी ने पदभार संभालने के बाद रिश्वत के तौर पर मिले 2-3 लाख के सोने के पेन से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। गुजरात की एक कंपनी को दिए गए 1,180 करोड़ के नमामि गंगे टेंडर के बदले मिली 72 करोड़ की रिश्वत की पहली किस्त रिशु श्री के खाते में जमा की गई थी। बाद में इस पैसे का इस्तेमाल सीनियर अधिकारियों को रिश्वत देकर जूनियर अधिकारियों के लिए मनचाही पोस्टिंग हासिल करने में किया गया।

जूनियर अधिकारी सिर्फ ताश के जोकर - सुधाकर सिंह

सुधाकर सिंह ने हाल ही में दो जूनियर IAS अधिकारियों योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा के सस्पेंशन को सरकार का महज एक दिखावा बताया। उन्होंने कहा, "ये दो जूनियर अधिकारी ताश की गड्डी में महज जोकर की तरह हैं। इस पूरे ऑपरेशन का असली सरगना और गैंग लीडर आनंद किशोर है, जिसे सरकार ने दो साल तक लगातार बचाने की कोशिश की है।" सिंह ने आरोप लगाया कि इस घोटाले में कुल नौ सीनियर IAS अधिकारी सीधे तौर पर शामिल हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पास उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। उन्होंने खुले तौर पर संतोष कुमार मल्ल, आनंद किशोर, धर्मेंद्र कुमार, अमरेंद्र कुमार सिंह और सुनील कुमार यादव का नाम लिया।

आनंद किशोर को एक अहम विभाग का जिम्मा क्यों दिया गया?

आनंद किशोर पर निशाना साधते हुए सुधाकर सिंह ने कहा, "ED ने अपने दस्तावेजों में आनंद किशोर को गैंग लीडर बताया है। वह इस पूरी योजना का मास्टरमाइंड है। इसके बावजूद उन्हें बिहार के वित्त सचिव जैसे अहम पद पर नियुक्त कर दिया गया था। जब मुख्यमंत्री के सामने ED की रिपोर्ट थी, तो राज्य के खजाने की जिम्मेदारी ऐसे दागदार अधिकारी को क्यों सौंपी गई? मुख्यमंत्री भी इस भ्रष्टाचार में सीधे तौर पर शामिल और जिम्मेदार हैं।"

20,000 करोड़ लूटे गए, गंगा फिर भी मैली- सुधाकर सिंह

नमामि गंगे योजना की आलोचना करते हुए सांसद ने कहा कि गंगा की सफाई के लिए दिल्ली से जारी 20,000 करोड़ रुपये बिहार में बेशर्मी से लूटे गए। फंड गायब हो गया, फिर भी नदी पहले की तरह ही प्रदूषित रही। उन्होंने सवाल उठाया कि इस टेंडर घोटाले में शामिल सभी बड़ी कंपनियां गुजरात की क्यों थीं? क्या इसके पीछे दिल्ली से कोई खास निर्देश था? इसके अलावा, उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में चल रहे एक नए कमीशन मॉडल का खुलासा किया।

कमीशन के लिए बदले टेंडर के नियम

सुधाकर सिंह ने बताया कि बिहार कैबिनेट ने स्थानीय बेरोजगार लोगों को रोजगार देने के लिए 50 करोड़ रुपये से कम के टेंडर स्थानीय ठेकेदारों को देने का फैसला किया था। हालांकि, कमीशन के लालच में अधिकारियों ने जल्दबाजी में उन सभी छोटे टेंडरों को रद्द कर दिया और उन्हें मिलाकर 150 करोड़ रुपये के बड़े पैकेज बना दिए। इसका मकसद बिहार के युवाओं को इस दौड़ से पूरी तरह बाहर रखना और राज्य के बाहर की बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाना था।