
संतोष सुमन और विजय सिन्हा के साथ तेज प्रताप (फोटो - X@TejYadav14)
बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति पर राजनीतिक पार्टियों द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से कहीं ज्यादा महत्व रखता है। पहले भी, इन भोजों ने गठबंधन बदलने और नए गठबंधन बनने की नींव रखी जा चुकी है। अब, पहली बार RJD से अलग होकर जन शक्ति जनता दल (JJD) बनाने वाले तेज प्रताप यादव इस भोज का आयोजन कर रहे हैं।
यह भोज 14 जनवरी को तेज प्रताप के सरकारी आवास 26 एम स्ट्रैंड रोड पर आयोजित होने जा रहा है। लेकिन तेज प्रताप यादव की दही-चूड़ा राजनीति दूसरे नेताओं से अलग लग रही है। वह नेताओं को, खासकर NDA नेताओं को, व्यक्तिगत रूप से उनके घरों पर जाकर आमंत्रित कर रहे हैं, जिसे एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
तेज प्रताप यादव खुद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के घर उन्हें दही-चूड़ा भोज के लिए आमंत्रित करने गए और सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कीं। वह लघु जल संसाधन मंत्री संतोष सुमन, पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (उपेंद्र कुशवाहा के बेटे) और विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से भी मिले। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद, राजनीतिक गलियारों में इसे तेज प्रताप के NDA की ओर झुकाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा, तेज प्रताप ने यह भी कहा है कि वह राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी आमंत्रित करेंगे।
तेज प्रताप यादव लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे हैं, लेकिन वह 2025 के विधानसभा चुनाव में महुआ सीट से तीसरे स्थान पर रहे। उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई, जिससे वह न तो विधायक बन पाए और न ही सत्ता के करीब। RJD से निकाले जाने के बाद, परिवार और पार्टी से उनकी दूरी बढ़ गई है। ऐसे में उनके लिए नया राजनीतिक जमीन तलाशना एक मजबूरी है।
तेज प्रताप यादव अपने पिता लालू यादव के नक्शेकदम पर चलते हुए, जन शक्ति जनता दल के अध्यक्ष के तौर पर दही-चूड़ा का भोज दे रहे हैं। मकर संक्रांति पर हर साल राबड़ी देवी के घर पर पारंपरिक रूप से दही-चूड़ा की दावत होती रही है। हालांकि, इस साल लालू यादव के घर पर दावत होगी या नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है। इस बीच, तेज प्रताप यादव दही-चूड़ा की दावत को अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
तेज प्रताप के हाल के बयानों ने NDA की तरफ उनके झुकाव को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया है। उन्होंने नीतीश कुमार के शासन को सुशासन बताया और उम्मीद जताई कि यह बेरोजगारी और पलायन की समस्या को हल करेगा। JJD ने 2025 के चुनावों के बाद NDA सरकार को अपना नैतिक समर्थन देने की घोषणा पहले ही कर दी थी। पहले BJP की आलोचना करने वाले तेज प्रताप अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपना रुख नरम करते दिख रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लालू-राबड़ी या तेजस्वी यादव इस भोज में शामिल होंगे। सबके मन में यह सवाल है कि अगर तेजस्वी यादव इस भोज में आते हैं, तो क्या उनकी मौजूदगी दोनों भाइयों के बीच की दूरी को कम करेगी। खैर यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन लालू परिवार की चुप्पी और तेज प्रताप की NDA से नजदीकी अलग-अलग दिशाओं में इशारा कर रही है।
Updated on:
07 Jan 2026 08:26 pm
Published on:
07 Jan 2026 08:26 pm
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