
राजद नेता तेजस्वी यादव (Photo-IANS)
बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए दस साल बीत चुके हैं। फिर भी राज्य में शराब की उपलब्धता और शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर जोरों पर है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सीधा सवाल पूछा कि शराबबंदी की नाकामी के लिए कौन जिम्मेदार है? इसके अलावा उन्होंने मांग की कि सरकार उनके द्वारा पेश किए गए तर्कों और आंकड़ों का जवाब दे।
पुलिस के आंकड़ों का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने पूछा कि अगर शराबबंदी सचमुच लागू है, तो हर महीने लाखों लीटर शराब आखिर कहां से आ रही है? उन्होंने लिखा, '2026 में बिहार में औसतन हर महीने 370,684 लीटर अवैध शराब जब्त की गई यानी, हर दिन 12,356 लीटर। ये तो सिर्फ सरकारी आंकड़े हैं। असल में, वास्तविक खपत इससे कई गुना ज्यादा है। क्या शराब पैराशूट से गिराई जा रही है?'
तेजस्वी यादव ने कहा कि शराबबंदी कानून लागू हुए 10 साल हो चुके हैं, लेकिन यह अपने तय लक्ष्यों को हासिल करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और शराब माफिया के बीच सांठगांठ ने इस कानून को असल में कमजोर कर दिया है। इसे नीतीश कुमार का सबसे बड़ा संस्थागत भ्रष्टाचार बताते हुए उन्होंने दावा किया कि शराबबंदी की वजह से बिहार में लगभग 40,000 करोड़ रुपये की एक अवैध पैरेलल इकोनॉमी खड़ी हो गई है, जिसने नौकरशाही को बेलगाम और भ्रष्ट बना दिया है।
तेजस्वी यादव ने सरकार की नीतियों को चुनौती देने के लिए कई आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि शराबबंदी लागू होने के बाद से राज्य में 11 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं और 16 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके बावजूद 5 करोड़ लीटर से ज्यादा शराब जब्त होना यह साबित करता है कि जमीनी स्तर पर शराब अभी भी आसानी से उपलब्ध है। तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि बिहार में प्रतिदिन भारी मात्रा में शराब का सेवन किया जा रहा है, जबकि सरकार सिर्फ जब्ती के आंकड़े पेश करके अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि शराबबंदी कानून के नाम पर गरीब, दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद, असली शराब तस्कर और सप्लायर अभी भी आजादी से घूम रहे हैं। बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न होना इस बात का संकेत है कि सिस्टम के अंदर कहीं न कहीं मिलीभगत है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने समय बाद भी, किसी भी जिला पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई है?
तेजस्वी ने आगे दावा किया कि शराबबंदी के बाद से राज्य में सूखा नशा, जैसे गांजा, भांग, ब्राउन शुगर और अन्य अवैध नशीली पदार्थों का व्यापार लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ गया है। उन्होंने तर्क दिया कि युवा पीढ़ी अब नशे के नए रूपों की गिरफ्त में आ रही है, जो समाज के लिए और भी ज्यादा चिंताजनक है।
तेजस्वी यादव ने सरकार से कई सीधे सवाल पूछे, जैसे कि अगर शराबबंदी सचमुच लागू है, तो इतनी भारी मात्रा में शराब बिहार में कैसे पहुंच रही है? यह तस्करी किसके संरक्षण में हो रही है? और सरकार शराब की खपत के असली आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं करती? उन्होंने आगे कहा कि शराब आसमान से नहीं टपकती, इसका साफ मतलब है कि सिस्टम के अंदर कहीं न कहीं कोई बड़ी चूक या मिलीभगत जरूर है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में शराबबंदी का कानून अब पूरी तरह से एक मज़ाक बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून की आड़ में, नौकरशाही को बिना किसी रोक-टोक के काम करने की छूट दे दी गई है, जिसके चलते भ्रष्टाचार, उगाही और मनमानी अपने चरम पर पहुंच गए हैं।
ऐतिहासिक तुलना करते हुए तेजस्वी ने बताया कि 1947 से 2005 तक यानी 58 वर्षों की अवधि में बिहार में शराब की केवल 3,000 दुकानें थीं। हालांकि, नीतीश कुमार के दस साल के कार्यकाल (2005 से 2015) के दौरान, यह आंकड़ा दोगुना हो गया और 6,000 के पार पहुंच गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने शुरुआत में हर गांव और पंचायत में शराब उपलब्ध कराई गई और अब वे शराबबंदी के नाम पर बस एक समाज सुधारक बनने का स्वांग रच रहे हैं।
Updated on:
06 Apr 2026 02:11 pm
Published on:
06 Apr 2026 02:10 pm
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