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IAS रैंक की नौकरी छोड़ने के बाद बने थे मुखिया, जानिए कौन हैं रितु जायसवाल के पति अरुण कुमार

Ritu Jaiswal Husband Arun Kumar: बिहार की सियासत में मुखिया दीदी के नाम से मशहूर रितु जायसवाल के पति अरुण कुमार ने 2018 में भारत सरकार में आईएएस रैंक की नौकरी से वीआरएस ले लिया था। इसके बाद साल 2021 के अंत में हुए पंचायत चुनाव में वे खुद सीतामढ़ी की सिंहवाहिनी पंचायत के मुखिया चुने गए। जानिए अरुण कुमार के बारे में। 

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पटना

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Anand Shekhar

May 25, 2026

ritu jaiswal husband arun

अरुण कुमार और रितु जायसवाल

Ritu Jaiswal Husband Arun Kumar: बिहार की तेजतर्रार नेता और राज महिला प्रकोष्ठ की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रितु जायसवाल 26 मई को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने जा रही हैं। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद से टिकट कटने के बाद बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाली रितु जायसवाल के इस कदम की बिहार की सियासत में खूब चर्चा हो रही है। लेकिन आज हम आपको रितु जायसवाल के बारे में नहीं, बल्कि उनके पति अरुण कुमार के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्होंने अपनी पत्नी के राजनीतिक और सामाजिक संकल्पों के लिए IAS रैंक की नौकरी तक छोड़ दी थी।

आईआईटी की पढ़ाई और दिल्ली में बड़ा सरकारी पद

अरुण कुमार का शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि बेहद शानदार रहा है। उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक IIT खड़गपुर से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद, उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और भारत सरकार के अधीन केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में निदेशक (Allied Services) के पद पर तैनात हुए। दिल्ली के पॉश इलाके में सरकारी बंगला, गाड़ियां, नौकर-चाकर और समाज में एक बड़ा प्रशासनिक रुतबा, अरुण कुमार के पास वो सब कुछ था जिसे पाने की तमन्ना हर भारतीय की होती है।

2016 में पत्नी बनी मुखिया, 2018 में छोड़ दी नौकरी

अरुण कुमार की जिंदगी में मोड़ तब आया जब साल 2016 में उनकी पत्नी रितु जायसवाल सीतामढ़ी जिले की बेहद पिछड़ी सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया चुनी गईं। रितु दिल्ली की ऐश-ओ-आराम की जिंदगी छोड़ गांव में बुनियादी बदलाव लाने में जुट गईं। पत्नी गांव में रहकर संघर्ष कर रही थी और अरुण कुमार दिल्ली के दफ्तरों में थे। अपनी पत्नी के सामाजिक संकल्पों में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए अरुण कुमार ने एक फैसला लिया। उन्होंने साल 2018 में अपने करियर के करीब 12 साल बाकी रहते हुए भी IAS रैंक की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली और गांव लौट आए।

पत्नी के बाद खुद संभाली गांव की कमान, बने मुखिया

गांव आने के बाद अरुण कुमार ने रितु जायसवाल के पीछे एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम बनकर काम किया। उनके प्रशासनिक और तकनीकी अनुभवों के दम पर सिंहवाहिनी पंचायत देश की सबसे मॉडल पंचायतों में शुमार हो गई, जिसके लिए रितु जायसवाल को उपराष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया। इसके बाद जब रितु जायसवाल राज्य स्तर की राजनीति और बिहार विधानसभा चुनावों में सक्रिय हुईं, तो साल 2021 के अंत में हुए पंचायत चुनाव में अरुण कुमार खुद सिंहवाहिनी पंचायत से चुनावी मैदान में उतरे। गांव की जनता ने उनके त्याग और समर्पण का सम्मान किया और उन्हें भारी मतों से जीतकर अपना मुखिया चुना।

बच्चों को मुफ्त में कराते हैं परीक्षा की तैयारी

मुखिया की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ अरुण कुमार का असली दिल शिक्षा की अलख जगाने में धड़कता रहा है। जब रितु जायसवाल की राजनीति का केंद्र पटना बना, तब पटना के एनआईटी (NIT) घाट पर गंगा नदी के किनारे खुली सीढ़ियों पर अरुण कुमार की एक अनोखी पाठशाला की तस्वीरें और खबरें खूब वायरल हुई थीं। यहाँ घाट पर आस-पास की झुग्गी-झोपड़ियों और आर्थिक रूप से लाचार परिवारों के बच्चों को वे मुफ्त में गणित, विज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देते हैं।