
रितु जायसवाल (Photo-X @activistritu)
Ritu Jaiswal Joining BJP: बिहार की सियासत में नेताओं का पार्टी बदलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब किसी पार्टी की कोई फायरब्रांड महिला नेत्री अचानक अपनी पूरी राजनीतिक विचारधारा को उलटकर धुर विरोधी खेमे में शामिल होती है, तो चर्चा होना तो तय है। बिहार की राजनीति में ऐसा ही कुछ होने जा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की पूर्व प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व महिला सेल अध्यक्ष रह चुकी रितु जायसवाल 26 मई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने जा रही हैं। जिसे लेकर सवाल यह उठ रहा है कि कभी जिस नेत्री ने मुसलमानों (अल्पसंख्यकों) के नाम पर बीजेपी का टिकट ठुकराने का बड़ा दावा किया था, वे अब अचानक उसी कमल के साथ जाने के लिए क्यों तैयार हो गई हैं?
बीते दिनों रितु जायसवाल का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें उन्होंने दावा किया था कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें बीजेपी की तरफ से सीतामढ़ी की परिहार सीट से चुनाव लड़ने का खुला ऑफर (टिकट) मिला था। लेकिन उन्होंने बीजेपी का टिकट सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि वे अल्पसंख्यकों और मुसलमानों की विरोधी राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहती थीं। उन्होंने कहा था कि वो मुस्लिमों के भरोसे को तोड़कर भाजपा के सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ सकतीं।
रितु जायसवाल ने खुद अपने आधिकारिक फेसबुक पोस्ट के जरिए भाजपा में शामिल होने की खबर की पुष्टि कर दी है। उन्होंने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों को भावुक संदेश लिखते हुए सूचित किया कि वे 26 मई 2026 को बीजेपी कार्यालय के अटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगी। रितु ने अपने पोस्ट मरीन लिखा कि देश की वर्तमान परिस्थितियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा एवं ईंधन की बचत पर दिए जा रहे विशेष बल को देखते हुए वे अनावश्यक भीड़, लंबे काफिले और दिखावे के सख्त खिलाफ हैं।
रितु ने कहा कि उनके लिए राजनीति केवल सेवा, जिम्मेदारी और विचार का माध्यम है, न कि किसी प्रदर्शन का और वे सादगी व जनहित के भाव के साथ राष्ट्र सेवा करना चाहती हैं। रितु जायसवाल ने अपने समर्थकों से विनम्र आग्रह किया कि जो जहां है वहीं से अपना आशीर्वाद प्रदान करे और यदि कोई कार्यक्रम में आना ही चाहता है तो अनावश्यक ईंधन की बर्बादी को रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन या शेयरिंग वाहनों का उपयोग कर एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दे।
हाजीपुर की रहने वाली और एक पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी की पत्नी रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) से की थी। लेकिन वहां अपनी बड़ी पहचान न बनते देख वे आरजेडी में शामिल हो गईं। अपनी आक्रामक और तार्किक शैली के कारण वे जल्द ही तेजस्वी यादव की सबसे भरोसेमंद महिला सिपहसालार बन गईं। पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारियां दीं।
आरजेडी ने रितु की लोकप्रियता को देखते हुए 2020 के विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट दिया था, जहां वे बेहद मामूली अंतर (1,549 वोट) से बीजेपी की गायत्री देवी से हार गईं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने उन पर बड़ा दांव खेलते हुए शिवहर सीट से उतारा, लेकिन वहां भी उन्हें आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद के हाथों हार का सामना करना पड़ा। लावली आनंद ने रितु जायसवाल को 29,143 वोटों से हराया था।
लगातार दो हार के बाद जब नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने उन्हें परिहार से टिकट देने से इनकार कर दिया, तो रितु ने बगावत का बिगुल फूंक दिया। वे निर्दलीय ही मैदान में उतर गईं। इस चुनाव में उन्हें 65,455 वोट मिले, जिससे उन्होंने दूसरे नंबर पर अपनी जगह बनाई, जबकि आरजेडी की उम्मीदवार स्मिता गुप्ता तीसरे नंबर पर खिसक गईं। आरजेडी ने उन्हें बागी होने के आरोप में पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रितु जायसवाल वैश्य समाज से आती हैं, जो बिहार में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का एक अत्यंत समृद्ध और मजबूत वोट बैंक माना जाता है। बीजेपी बिहार में लगातार दिलीप जायसवाल और संजय जायसवाल जैसे बड़े वैश्य चेहरों को आगे बढ़ा रही है, ऐसे में रितु की एंट्री से उत्तर बिहार और मिथिलांचल में बीजेपी का यह वोट बैंक और ज्यादा मजबूत होगा। इसके अलावा, रितु जायसवाल के बीजेपी में आने से शिवहर और सीतामढ़ी की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचना तय है।
26 मई को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रम में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करने से ठीक पहले रितु जायसवाल के सुर पूरी तरह बदल चुके हैं। अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना की जमकर तारीफ कर रही हैं। रितु ने साफ किया कि वे बिना किसी शर्त के सिर्फ जनता के बीच काम करने के लिए भाजपा का दामन थाम रही हैं। दूसरी तरफ, आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी ने रितु जायसवाल को पूरा सम्मान दिया था, लेकिन जब उन्होंने चुनाव में पार्टी के खिलाफ बगावत की, तो उन्हें तभी निलंबित कर दिया गया था। अब वे किस पार्टी में जाती हैं, इससे आरजेडी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
Published on:
24 May 2026 10:28 am
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