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Diwali Special: वह भी क्या दिवाली थी… जयपुर में 8 नवंबर 1942 की दिवाली पर दो मण आठ सेर तेल के दिये जलाए

रियासत कालीन राज दरबारों में बड़ी दिवाली के दिन तत्कालीन राजा महाराजा काली पोशाक पहनकर महारानी के साथ महल में दिवाली पूजन करते थे। नगर के दरवाजों पर नंगाड़ों और शहनाइयों की मधुर आवाज सुनाई पड़ती।

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जयपुर

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Santosh Trivedi

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जितेन्द्र सिंह शेखावत

Oct 18, 2025

diwali in jaipur 1942

Photo- Patrika

Diwali Special: वह भी क्या दिवाली थी…। तब सुकून भरे माहौल में महलों, हवेलियों, मंदिर, गढ़ और किलों पर जगमगाती दीपकों की रंगीन रोशनी के इन्द्र धनुषी झरने बहते दिखाई देते थे। आज के आधुनिक परिवेश में दिवाली पहले से ज्यादा धूम धड़ाके से मनती है। लेकिन सार्वजनिक आनंद का जो भाव उस समय था वह आज कहीं खोया सा लगता है।

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