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Diwali Special: वह भी क्या दिवाली थी…। तब सुकून भरे माहौल में महलों, हवेलियों, मंदिर, गढ़ और किलों पर जगमगाती दीपकों की रंगीन रोशनी के इन्द्र धनुषी झरने बहते दिखाई देते थे। आज के आधुनिक परिवेश में दिवाली पहले से ज्यादा धूम धड़ाके से मनती है। लेकिन सार्वजनिक आनंद का जो भाव उस समय था वह आज कहीं खोया सा लगता है।
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