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इथियोपिया में सक्रिय हुआ 60 साल पुराना मारबर्ग वायरस! खून, लार, पेशाब से फैलता है संक्रमण

मारबर्ग वायरस रोग एक गंभीर और घातक वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जो संक्रमित लोगों के शारीरिक तरल पदार्थों और सतहों के सीधे संपर्क से फैलता है।

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कितना खतरनाक है मारबर्ग वायरस। (फोटो- The Washington Post)

पूर्वी अफ्रीकी देश इथियोपिया में तेजी से मारबर्ग वायरस फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को बताया कि दक्षिणी इथियोपिया में नौ लोग इस घातक वायरस के चपेट में आ गए हैं। मारबर्ग भी इबोला जैसा ही एक वायरस है।

इबोला वायरस भी मुख्य रूप से अफ्रीका में पाया जाता है और यह जानवरों से मनुष्यों में फैलता है और फिर मनुष्यों से मनुष्यों में भी फैल सकता है। इबोला के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और रक्तस्राव शामिल हैं।

इथियोपिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मारबर्ग वायरस से संक्रमित लोगो के बारे में जानकारी दी।

वायरस को रोकने में जुटा डब्ल्यूएचओ

डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने अपने एक एक्स पोस्ट में लिखा- डब्ल्यूएचओ इस वायरस को रोकने और संक्रमित लोगों का इलाज करने के लिए इथियोपिया को हर तरह से समर्थन दे रहा है और सीमा पार इसके प्रसार की संभावना को दूर करने के सभी प्रयास कर रहा है।

मारबर्ग वायरस के चपेट में आने के बाद लोग इबोला की तरह खतरनाक वायरल बुखार का सामना करते हैं। यह वायरस संक्रमित लोगों के खून, लार, मूत्र और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।

ऐसे नाम पड़ा मारबर्ग वायरस

मारबर्ग वायरस की पहली पहचान 1967 में जर्मनी के मारबर्ग शहर में हुई थी, जब लेबोरेटरी में काम करने वाले कुछ लोगों में एक अज्ञात वायरस के कारण बीमारी फैल गई थी। तब से इस वायरस का नाम मारबर्ग वायरस रखा गया है। यह वायरस शुरू में मुख्य रूप से जंगली जानवरों के जरिए इंसानों में फैलता है।

बाद में यह एक इंसान से दूसरे इंसानों में फैलना शुरू हो जाता है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्रों के अनुसार, इसमें शुरुआती लक्षण बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना और मांसपेशियों में दर्द होते हैं। कुछ लोगों को इससे संक्रमित होने के बाद सीने में दर्द, मतली, उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं।

दो से सात दिनों में मरीजों का हो जाता है ऐसा हाल

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शुरुआती लक्षण दिखने के दो से सात दिन बाद मरीजों को बिना खुजली वाले दाने हो सकते हैं। सीडीसी के अनुसार, गंभीर मामलों में बड़ी मात्रा में खून निकलना और कई अंगों का काम करना बंद हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इस बीमारी के चपेट में आने के बाद मृत्यु आमतौर पर शुरुआत के आठ से नौ दिनों के बीच होती है। हालांकि, इस बीमारी से मरने वालों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत ही होती है। मारबर्ग वायरस के इलाज के लिए कोई टीका या एंटीवायरल उपचार स्वीकृत नहीं है। मरीजों को सहायक देखभाल दी जाती है।

इन देशों में भी फैल चुका है यह वायरस

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अंगोला, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, घाना, केन्या, इक्वेटोरियल गिनी, रवांडा, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और युगांडा में पहले भी इसके प्रकोप की सूचना मिली है।

प्रयोगशाला परीक्षणों ने पुष्टि की है कि यह वायरस पूर्वी अफ्रीका में पिछले प्रकोपों ​​में बताए गए वायरस के समान ही है। यह वायरस संभवतः सबसे पहले चमगादड़ों से इंसानों में फैला। एक बार प्रकोप पर काबू पा लेने के बाद भी, इसके बार-बार उभरने की संभावना है।

(वाशिंगटन पोस्ट का यह आलेख पत्रिका.कॉम पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है)