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पर्यटन का नया चेहरा ‘इको फ्रेंडली टूरिज्म’, होमस्टे बन रहे नई पहचान, क्या आप भी करने आ रहे हैं एमपी की सैर?

MP News: मध्य प्रदेश टूरिज्म का नया चेहरा बन रहे 'होम स्टे', बजट फ्रेंडली लग्जरी होटल जैसी सुविधाएं, शहर के शोर-शराबे, भीड़भाड़ से दूर सुकून को तलाश रहे आज के टूरिस्ट के लिए है बेस्ट ऑप्शन… अगर आप भी विंटर वेकेशन का मजा लेने आ रहे है मध्यप्रदेश, तो आपके स्वागत के लिए तैयार हैं ये 'होम स्टे', पीक सीजन में सुकून की तलाश के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी…

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MP Tourism you must Explore the Homestay madhya pradesh just for a memorable tour

MP Tourism you must Explore the Homestay madhya pradesh just for a memorable tour(फोटो: सोशल मीडिया modify by patrika.com)

MP Tourism: राजशाही किले, महल, वाइल्ड लाइफ और खासतौर पर धार्मिक टूरिज्म के लिए जाने पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश को अब एक नई और खास पहचान मिल रही है और वो है यहां शुरू हुए नए इको फ्रेंडली टूरिज्म ट्रेंड 'होमस्टे।' टूरिज्म का एक नया मॉडल, जिसकी शुरुआत ने लग्जरी होटल्स की पूछ-परख कम कर दी है। होमस्टे का ये नया ट्रेंड बता रहा है कि आज यूथ से लेकर फैमिलीज को भी ग्रामीण अंचल, ग्रामीण परिवेश में मिलने वाले एक नयेपन का अहसास रास आ रहा है। फिर बात चाहे एमपी की वाइल्ड लाइफ की हो, किसी ऐतिहासिक स्थल की या फिर प्राकृतिक सौंदर्य के बीच सुकून की तलाश, घर जैसा सुरक्षित माहौल देने वाले किसी भी टूरिस्ट प्लेस के नजदीकी गांवों में बसे ये होमस्टे टूरिस्ट को बेहद अट्रैक्ट कर रहे हैं।

आलम ये है कि टूरिज्म प्लेस पर घूमने के बाद पर्यटक यहां दो-चार दिन एक्स्ट्रा बिता कर जा रहे हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में प्रदेश भर के गांवों मं 241 नए होम स्टे लॉन्च किए हैं। यही कारण है कि 37 जिलों के 100 से ज्यादा गांव एमपी टूरिज्म मैप पर तेजी से उभरे हैं। यहां आने वाले टूरिस्ट की बढ़ती संख्या से सवाल तो लाजमी है आखिर क्यों टूरिस्ट को भा रहा होमस्टे ट्रेंड, क्यों होटल के बजाय यहां रुकना पसंद कर रहे हैं टूरिस्ट.. patrika.com की एमपी टूरिज्म को लेकर खास पेशकश…

गांवों के घर अब टूरिस्ट के नये ठिकाने

ओरछा के शांत घाट हों, अमरकंटक की धुंधली सुबह, पंचमढ़ी की पहाड़ियां या कान्हा, पेंच, बांधवगढ़ के जंगल, हर जगह अब होमस्टे तैयार हैं। कई लोकल परिवारों ने अपने ही घरों में कम वक्त में छोटे-छोटे लेकिन खूबसूरत ठहराव तैयार किए हैं। तो कई लोगों ने ग्रामीण अंचलों में जमीन खरीदकर होम स्टे की नई शुरुआत की है। यहां न रिसेप्शन की औपचारिकता है, न होटल वाली दूरी… मेहमान आएं तो उसे 'अतिथि देवो-भव:' का अहसास दिलाने के लिए खास स्वागत की तैयारी की जाती है। घर जैसा सुरक्षित माहौल, लोकल-पारंपरिक खाना, ग्रामीण परिवेश की कहानियां…ये होमस्टे अब वही जगह बन रहे हैं, जिन्हें आज का टूरिस्ट ढूंढ रहा है। एकदम ऑथेंटिक, असली, सच्ची और दिल को छू लेने वाले प्लेस। गांव के आंगन की खुशबू जैसे उन्हें खींच रही है और शहर की आपाधापी से दूर अपनेपन से भरा प्यारा सा अहसास दे रही है।

इसलिए टूरिस्ट को भा रहे होम स्टे

1-होटल जैसी लग्जरी सुविधा, लेकिन घर जैसी गर्माहट

    लकड़ी के फर्श, मिट्टी की दीवारें, देसी व्यंजन, रात में लोकगीत, यह वह पैकेज है जो किसी होटल में मिल ही नहीं सकता।
    टूरिस्ट कह रहे हैं कि यहां आकर जो अनुभव मिला उससे 'ट्रैवलिंग नहीं, रिलेटिंग' जैसा फील हो रहा है। यानी जैसे कोई रिश्ता बन गया हो हमारा इस जगह से। एक अपनापन और सुकून देने वाली जगह ग्रामीण अंचल के बीच भी परिवार के सदस्यों की तरह जीने का अहसास मिल रहा है उन्हें यहां।

    2-जेब का बोझ हल्का, अनुभव बडा़ भारी

      जहां होटल का एक कमरा 5 से 7 हजार रुपए में पड़ता है, वहीं होम स्टे 1500-2500 में आराम से मिल रहे हैं। साथ में लोकल टूर, गांव में घूमना और होस्ट की गाइडेंस एक्स्ट्रा बोनस बन जाता है। ये सब उन्हें आकर्षित कर रहे हैं।

      3-लोकल इकॉनमी को सीधा फायदा

        एक किसान के घर में बने होमस्टे में रहने से कमाई सीधे उस किसान के परिवार तक ही जाती है। कई गांवों में महिलाओं ने अपने घर के आंगन को ही होमस्टे में बदल लिया है और वे आज 30-50 हजार रुपए महीना कमा रही हैं। बिना शहर छोड़े, बिना बड़े खर्च के उनकी आय का बड़ा जरिया बन गए हैं ये होम स्टे।

        4-जिम्मेदारी से भरा और स्थायी टूरिज्म

          एमपी टूरिज्म बोर्ड ने होमस्टे को 'Responsible Tourism Mission' से जोड़ा है। यहां प्लास्टिक कम, स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल ज्यादा यानी हर टूरिस्ट की इको फ्रेंडली यात्रा का जरिया बन रहे हैं ये होमस्टे।

          एमपी में कहां-कहां तेजी से उभर रहे हैं होमस्टे?

          नर्मदापुरम, ओरछा, उज्जैन, ओंकारेश्वर, अमरकंटक, मांडू, चंदेरी, टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क, भोपाल और उसके आसपास बसे टूरिज्म प्लेसेस समेत एमपी के कई जिलों के गांवों में होमस्टे तेजी से उभर रहे हैं। इन जगहों के गांवों में बने होमस्टे धार्मिक टूरिस्ट को भी बेहद पसंद आ रहे हैं, शहर के शोर-शराबे से दूर उन्हें यहां आकर आध्यात्मिक और शांत वातावरण मिलता है।

          जंगल सफारी पर जाने से पहले यहां रुक रहे टूरिस्ट

          जंगल सफारी पर जाने वाले टूरिस्ट अब होटल से ज्यादा जंगल के करीब बनकर तैयार हुए इन होमस्टे में ठहरना पसंद कर रहे हैं। यहां दिन की शुरुआत सुबह 4 बजे से हो जाती है। यहां रहकर मेहमानों का स्वागत करने वाले लोग खुद आपको सुबह-सुबह जगाते हैं। जैसे आपके परिवार का कोई अपना सदस्य आपको घर में नींद से जगाता है। सुबह 5 बजते ही आपके रूम के दरवाजे से नॉक-नॉक का साउंड सुनाई देता है, आप उठेंगे, तरोताजा होकर रूम से निकलते हैं, ग्रामीण अंचल में जंगलों के बीच बसे इन होमस्टे में उगते सूरज का सौंदर्य आपका दिन बना देता है।

          मॉर्निंग वॉक से लेकर योग एक्सरसाइज की भी सुविधा

          आसपास के मैदानी इलाके को इस तरह तैयार किया जाता है कि आपको मॉर्निंग वॉक करने, सुबह-सुबह योग या एक्सरसाइज करने के बाद नई ताजगी का अहसास होता है। आपके ब्रेक फास्ट से लेकर लंच तक का शेड्यूल आपको ही तय करना होता है। परिवार जैसे लगने वाले ये सदस्य 'पर्सनलाइज्ड केयर' करते नजर आते हैं। आपको अगले गंतव्य पर जाने के लिए दरवाजे तक छोड़ने आते हैं, आपको विश करके अलविदा कहते हैं। ऐसे अपनेपन की उम्मीद होटल्स से… तो बेमानी होगी।

          ग्रामीण और लोक-संस्कृति वाले गांव

          -बुंदेलखंड के 25 से ज्यादा गांव, महाकौशल के 15 गांव, निमाड़ और चंबल के 20 से ज्यादा गांवों की लोकेशन्स टूरिस्ट का दिल जीत लेती हैं।

          -इन गांवों में लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजन और हस्तकला टूरिस्ट को 'देसी लेकिन डिफरेंट' एक्सपीरियंस मिलता है, जिसे वो हमेशा याद रखते हैं।

          होटल और होमस्टे में ऐसे देखें फर्क

          प्रीमियम लेकिन - औपचारिक किफायती और अपनापन भरा
          स्टैंडर्डाइज्ड मेन्यू - स्थानीय व्यंजन, घर का बना खाना
          कम्युनिटी से दूरी - मेहमान गांव का हिस्सा बन जाते हैं
          शहरनुमा डिजाइन - मिट्टी, लकड़ी, ग्रामीण अंचल की सजावट
          शहर की भीड़ और शोर - शहर की भीड़-भाड़ से दूर रिमोट एरिया

          बता दें कि टूरिस्ट अब 'स्टे के साथ कल्चर का मजा लेते हुए उनसे भावनात्कमक रूप से कनेक्ट हों, ऐसी कॉम्बो तलाश रहे हैं, जो केवल होमस्टे ही दे पा रहे हैं।

          सरकार का बड़ा प्लान, 1000 होमस्टे का लक्ष्य

          एमपी सरकार ग्रामीण पर्यटन को नया उद्योग बनाने के मूड में है। लक्ष्य है कि 2025-26 तक 1000 से ज्यादा होमस्टे तैयार हों, जिनमें से कई को हेलिकॉप्टर और डिजिटल बुकिंग से जोड़े जाने की तैयारी भी है।

          पर्यटन विभाग देता है ट्रेनिंग

          इन होमस्टे के लिए एमपी का पर्यटन विभाग हर होमस्टे मालिक को ट्रेनिंग देता है, कैसे मेहमानों से बात करनी है, कैसे सफाई, सुरक्षा, भोजन और लोक-कल्चर का अनुभव टूरिस्ट का दिल जीत सकते हैं।

          यही वजह है कि एमपी होमस्टे अब राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल की तरह देखे जा रहे हैं।

          सबसे बड़ा असर, गांव लौट रहा है सम्मान

          यह मॉडल सिर्फ पर्यटन नहीं, सामाजिक बदलाव ला रहा है। गांवों में महिलाओं को नौकरी नहीं, आत्मनिर्भरता मिली है। युवा जो शहर की ओर भाग रहे थे, वापस लौटकर होम स्टे संभाल रहे हैं। गांवों में स्थानीय कला-हस्तकला की नई मांग पैदा हुई है।

          जानें कैसे करें बुकिंग

          अगर आप भी मध्यप्रदेश सरकार की इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो MP Tourism Homestay Scheme की वेबसाइट https://mphomestay.mponline.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। वहां आपको जिलेवार लिस्ट मिलेगी जहां, होमस्टे उपलब्ध हैं, उनके रेट, उपलब्ध सुविधाएं, होस्ट की प्रोफाइल और संपर्क नंबर भी दिए गए हैं। आप ऑनलाइन ही बुकिंग कर सकते हैं या चाहें तो कॉल पर होस्ट से बात करके भी सारी जानकारी ले सकते हैं।

          एमपी सरकार ने क्यों शुरू की होम स्टे योजना

          मध्यप्रदेश सरकार का मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा टूरिस्ट मध्यप्रदेश आएं और यहां की संस्कृति को करीब से महसूस करें। साथ ही गांव और छोटे कस्बों के लोगों की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य भी इस योजना के तहत सरकार लेकर चली। अगर आप अगली बार एमपी घूमने जाएं तो इस बार किसी होटल में नहीं, बल्कि किसी होमस्टे में रुकिए, आपका अनुभव खास और यादगार बन जाएगा। एमपी का होमस्टे मॉडल स्पष्ट कर रहा है कि टूरिज्म अब सिर्फ ट्रैवलिंग का नाम नहीं है, बल्कि एक बड़े बदलाव को भी कहते हैं।

          घर जैसी सुविधाएं, खूबसूरत लोकेशन और सुकून कर रहा अट्रैक्ट

          पचमढ़ी के पास स्थित एक गांव में बने 'जंगल आशियाने' के मैनेजर अरविंद कहते हैं कि जंगल में बने ये होमस्टे टूरिस्ट को अट्रैक्ट करने लगे हैं। वे एडवांस बुकिंग करवा रहे हैं। सीजन में अक्टूबर से मार्च तक यह फुल रहता है। हिल स्टेशन पर गर्मियों में घूमने आने वाले लोग यहीं ठहरते हैं। यहां उन्हें घर जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। यहां की खूबसूरत लोकेशन और अन्य जरूरी सुविधाएं उन्हें पसंद आती है। वे यहां कभी-कभी सप्ताह भर तक गुजार कर जाते हैं। रिमोट एरिया लोकेशन्स उन्हें ज्यादा पसंद आ रहे हैं।