
(Photo Source- Patrika)
गांव में खेल का मैदान नहीं, माता-पिता मजदूर। माली हालत ऐसी कि देखने वाले सोच में पड़ जाए। इसके बाद भी फटे जूतों में उबड़-खाबड़ मैदान पर बुलंद हौसलों से अभ्यास कर आदिवासी बहुल टेमनी गांव की 3 बेटियों ने नजीर बना दी। पिंकी उइके, हर्षल भलावी व खुशी परते राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल में प्रदेश का मान बढ़ा रही हैं।
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