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Rajasthan Civic Polls : हाइब्रिड फॉर्मूले ने बदली निकाय राजनीति की बिसात, पार्षद चुनाव हारे, फिर भी मेयर की दौड़ में कायम

राजस्थान की निकाय की राजनीति के नियम 2019 में बदले गए थे। नए नियम के अनुसार मेयर, सभापति या पालिकाध्यक्ष बनने के लिए वार्ड का चुनाव जीतना जरूरी नहीं है। इस नियम के चलते राजस्थान में बहस छिड़ चुकी है। आइए इस बारे में विस्तार से समझने के लिए पढ़ते हैं संदीप पुरोहित की विशेष रिपोर्ट।
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भारत

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Swatantra Mishra

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संदीप पुरोहित

Sep 19, 2026

Nagar Nigam Election 2026

राजस्थान में निकाय चुनाव और पद का समीकरण समझें (Photo: ChatGpt)

Rajasthan Civic Polls 2026: राजस्थान की निकाय राजनीति में अब वार्ड का चुनाव जीतना ही मेयर, सभापति या पालिकाध्यक्ष बनने की अनिवार्य सीढ़ी नहीं है। 2019 में चुनावी नियमों में हुए बदलाव के बाद कोई व्यक्ति पार्षद का चुनाव लड़े बिना भी निकाय प्रमुख के पद का दावेदार बन सकता है। पार्षद का चुनाव हार चुका व्यक्ति भी निर्धारित पात्रता पूरी करता है तो अगले चरण में मेयर या सभापति की दौड़ में उतर सकता है। इसी व्यवस्था को राजनीतिक और मीडिया की भाषा में हाइब्रिड फॉर्मूला कहा जा रहा है। इसकी बुनियाद यह है कि जनता वार्ड पार्षद चुनती है और निर्वाचित पार्षद निकाय प्रमुख का चुनाव करते हैं, लेकिन दूसरे चरण के उम्मीदवार का पहले पार्षद चुना जाना जरूरी नहीं है।

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