
राजस्थान में निकाय चुनाव और पद का समीकरण समझें (Photo: ChatGpt)
Rajasthan Civic Polls 2026: राजस्थान की निकाय राजनीति में अब वार्ड का चुनाव जीतना ही मेयर, सभापति या पालिकाध्यक्ष बनने की अनिवार्य सीढ़ी नहीं है। 2019 में चुनावी नियमों में हुए बदलाव के बाद कोई व्यक्ति पार्षद का चुनाव लड़े बिना भी निकाय प्रमुख के पद का दावेदार बन सकता है। पार्षद का चुनाव हार चुका व्यक्ति भी निर्धारित पात्रता पूरी करता है तो अगले चरण में मेयर या सभापति की दौड़ में उतर सकता है। इसी व्यवस्था को राजनीतिक और मीडिया की भाषा में हाइब्रिड फॉर्मूला कहा जा रहा है। इसकी बुनियाद यह है कि जनता वार्ड पार्षद चुनती है और निर्वाचित पार्षद निकाय प्रमुख का चुनाव करते हैं, लेकिन दूसरे चरण के उम्मीदवार का पहले पार्षद चुना जाना जरूरी नहीं है।
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