
BANKE BIHARI PC: IANS
वृंदावन में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है और यहां की जन्माष्टमी बहुत ही खास होती है। भक्तजन रातभर बांकेबिहारी मंदिर में राधे-राधे और कृष्ण के मंत्रों का जाप करते हुए उनके जन्मदिन को मनाने का इंतजार करते हैं। कैसी होती है वृंदावन और मथुरा की जन्माष्टमी? क्या है इसका इतिहास और क्या है इसका पूरा कार्यक्रम? चलिए जानते हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन जन्मभूमि मथुरा से लेकर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर तक सभी मंदिरों को इस दिन फूलों और लाइटों से सजाया जाता था। इस दौरान सड़कों पर भक्तों की बहुत भीड़ देखने को मिलती है। भक्त भगवान कृष्ण की झांकियां और उनके जीवन से जुड़े नाट्य का मंचन करते हैं। जगह-जगह कीर्तन और गीता के पाठ का भी आयोजन होता है।
कहा जाता है कि मधुबन में भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ नृत्य किया था, वहां जन्माष्टमी की रात को कृष्ण जरूर आते हैं। वहां भी भक्तों की काफी भीड़ रहती है। हालांकि, शाम के बाद वहां पर श्रद्धालुओं के जाने की मनाही है। मधुबन को भी फूलों और रोशनी से सजाया जाता है।
बांके बिहारी मंदिर की मंगला आरती वृंदावन की जन्माष्टमी का मुख्य आकर्षण है। कहा जाता है कि साल में सिर्फ एक बार जन्माष्टमी को ही ये आरती की जाती है। इस साल 16 अगस्त 2025 को बांके बिहारी के दर्शन के लिए मध्यरात्रि को पट खुलेंगे। इसके बाद सुबह-सुबह 3:30 बजे मंगला आरती शुरू होती है और ये 5 बजे तक चलती है। इसके बाद बांके बिहारी जी को भोग लगाया जाता है।
मथुरा में द्वारकाधीश मंदिर और कृष्ण जन्मभूमि आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन जाते हैं। यहां भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। भक्त दिन भर भगवान कृष्ण के भजन-कीर्तन करते हैं। कृष्ण भक्ति में डूबे लोग खुशी से नाचते-गाते हैं। यहां का नजारा भक्ति और संगीत के अनूठे संगम जैसा होता है।
Published on:
16 Aug 2025 02:52 pm
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