
दिनेश ठक्कर ने 711 करोड़ रुपये की एक रियल एस्टेट डील की। (Photo: ChatGpt)
मुंबई के जुहू में 711 करोड़ रुपये की एक रियल एस्टेट डील ने देश के लग्जरी हाउसिंग बाजार का ध्यान खींच लिया है। खास बात सिर्फ कीमत नहीं है, बल्कि यह भी है कि यह किसी एक लग्जरी फ्लैट की खरीद नहीं है। Angel One के संस्थापक, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश ठक्कर ने Embassy Developments के ‘Embassy Terrazza’ प्रोजेक्ट में एक पूरा रेजिडेंशियल टावर खरीदने के लिए करार किया है। कंपनी के मुताबिक, करीब 711 करोड़ रुपये का यह सौदा देश का सबसे बड़ा सिंगल रेजिडेंशियल यूनिट ट्रांजैक्शन है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर दिनेश ठक्कर कौन हैं? जिस शख्स का नाम आज मुंबई की सबसे महंगी रेजिडेंशियल डील के साथ जुड़ रहा है, उनका सफर किसी पारंपरिक कॉरपोरेट कहानी जैसा नहीं रहा। 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने से लेकर देश की बड़ी डिजिटल ब्रोकिंग कंपनियों में शामिल Angel One को खड़ा करने तक उनका करीब तीन दशक का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दिनेश ठक्कर का जन्म मुंबई के मुलुंड में एक ऐसे परिवार में हुआ जिसका संबंध कपड़ा कारोबार से था। उन्होंने ठाणे के St. John the Baptist High School में पढ़ाई की और मुंबई के Kishinchand Chellaram College में विज्ञान की पढ़ाई शुरू की। हालांकि, उन्होंने 12वीं के बाद औपचारिक शिक्षा आगे जारी नहीं रखी। एक इंटरव्यू में ठक्कर ने इसे अपने जीवन के बड़े जोखिमों में से एक बताया था।
इसके बाद उन्होंने परिवार के कपड़ा कारोबार में काम किया, लेकिन कारोबार की सीमाएं उन्हें ज्यादा समय तक रोक नहीं सकीं। उनकी दिलचस्पी शेयर बाजार में बढ़ने लगी। दोस्तों से पैसे उधार लेकर उन्होंने शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्हें नुकसान भी हुआ और 1992 के सिक्योरिटीज स्कैम के दौरान बाजार में आए संकट का भी सामना करना पड़ा।
इन मुश्किलों के बावजूद ठक्कर ने बाजार से दूरी बनाने के बजाय यह समझने की कोशिश की कि ब्रोकिंग कारोबार किस तरह काम करता है और खुदरा निवेशकों के लिए इसमें क्या कमियां हैं। यही अनुभव आगे चलकर उनके कारोबारी सफर की नींव बना।
Angel One की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक कंपनी ने 1996 में पारंपरिक स्टॉक ब्रोकरेज फर्म के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। दिनेश ठक्कर का कहना रहा है कि ब्रोकिंग उद्योग में पारदर्शिता और नैतिकता की जरूरत ने उन्हें एक ऐसी कंपनी बनाने के लिए प्रेरित किया, जो तकनीक और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं पर जोर दे।
शुरुआती वर्षों में तकनीक का इस्तेमाल आज की तरह आम नहीं था। Angel One से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, ठक्कर ने ट्रेडिंग और क्लाइंट सर्विस में कंप्यूटर, तेज सूचना प्रणालियों और यहां तक कि वॉकी-टॉकी के जरिए तत्काल ट्रेड कन्फर्मेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया। बाद के वर्षों में कंपनी ने तेजी से डिजिटल दिशा पकड़ी।
ठक्कर की कहानी में सफलता के साथ असफलताएं भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने 2001 के आसपास इंटरनेट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में बड़ा निवेश किया था और डॉट-कॉम बुलबुला फूटने के दौरान अपनी पूंजी का करीब 80 फीसदी गंवा दिया था। इस अनुभव को उन्होंने बाद में सीख के तौर पर देखा।
इसी सोच का एक उदाहरण Angel One में शुरू किया गया उनका ‘फेल्योर क्लब’ भी बताया जाता है, जहां कर्मचारियों को असफल प्रोजेक्ट्स पर खुलकर चर्चा करने और यह समझने का मौका मिलता था कि गलती कहां हुई और उससे क्या सीखा जा सकता है।
Angel One के लिए बड़ा बदलाव डिजिटल दौर में आया। कंपनी के मुताबिक उसका डिजिटल सफर 2019 में शुरू हुआ, जब उसने एंड-टू-एंड डिजिटल निवेश समाधान उपलब्ध कराना शुरू किया। इसके बाद कंपनी ने देश के छोटे शहरों और टियर-2 तथा टियर-3 बाजारों में भी तेजी से विस्तार किया।
कंपनी ने खुद को पारंपरिक ब्रोकरेज से डिजिटल-फर्स्ट वित्तीय सेवा मंच में बदलने पर जोर दिया। 2020 में Angel One शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई और बाद के वर्षों में उसका डिजिटल ग्राहक आधार तेजी से बढ़ा।
आज दिनेश ठक्कर Angel One के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उन्हें संस्थापक, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में दर्ज किया गया है।
अब उनकी कहानी का सबसे चर्चित अध्याय मुंबई के जुहू से जुड़ गया है। Embassy Terrazza में जिस संपत्ति के लिए ठक्कर ने करार किया है, वह कोई सामान्य अपार्टमेंट नहीं बल्कि पूरा G+7 रेजिडेंशियल टावर है। इसका RERA कार्पेट एरिया करीब 63,000 वर्ग फुट है। यह प्रोजेक्ट जुहू तारा रोड पर दो एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में विकसित हो रहे पांच टावरों का हिस्सा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ठक्कर जिस टावर को अपना घर बनाने जा रहे हैं, उसमें समुद्र की ओर खुलने वाले दृश्य, ज्यादा निजी स्पेस और बड़े आकार की सुविधाएं होंगी। इसे उन्होंने ‘Angelus’ नाम दिया है। पूरी परियोजना में करीब 50 रेजिडेंस प्रस्तावित हैं और इसका अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि ठक्कर ने अपने करियर के शुरुआती दौर में घर खरीदने के बजाय कारोबार में पूंजी लगाने को प्राथमिकता दी थी। Economic Times के अनुसार, वह करीब 38–40 साल की उम्र तक किराए के घर में रहे। अब उसी कारोबारी सफर के कई दशक बाद वह एक पूरे रिहायशी टावर के मालिक बनने जा रहे हैं।
जुहू का यह सौदा इसलिए भी खास है क्योंकि यह सिर्फ 711 करोड़ रुपये की कीमत वाली संपत्ति नहीं, बल्कि भारतीय लग्जरी रियल एस्टेट में बदलती संपत्ति-खरीद की तस्वीर भी दिखाता है। एक तरफ मुंबई जैसे शहर में जमीन और बड़े घरों की उपलब्धता सीमित है, दूसरी तरफ देश में अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ खरीदारों के बीच बेहद महंगे और निजी आवासों की मांग बनी हुई है।
दिनेश ठक्कर की कहानी इसलिए अलग नजर आती है कि 711 करोड़ रुपये का यह टावर उनके सफर की शुरुआत नहीं, बल्कि करीब तीन दशक लंबे कारोबारी अध्याय का नया पड़ाव है। एक ऐसा सफर, जिसकी शुरुआत शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से हुई, जिसमें बड़े नुकसान भी आए और जिसने अंततः एक पारंपरिक ब्रोकरेज को डिजिटल वित्तीय मंच में बदलने की दिशा पकड़ी।
Updated on:
23 Sept 2026 05:07 pm
Published on:
23 Sept 2026 05:07 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
