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AI और डेटा के जादू से बदलेगा खेती का चेहरा, क्या आप स्मार्ट एग्रीकल्चर के लिए तैयार हैं?

क्या आप जानते हैं कि अब खेती भी स्मार्ट हो गई है? तकनीकी के जादू से किसान अब अपने मोबाइल पर मिट्टी, मौसम और बाजार की जानकारी पा सकते हैं। आइए जानें, कैसे ये बदलाव आपके खेतों को भी फायदा पहुंचा सकते हैं?
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 07, 2026

ai role in agriculture sector

सांकेतिक इमेज (सोर्स- gemini)

हरित क्रांति का नया अध्याय अब ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ के रूप में खुल रहा है, जहां तकनीकी, डेटा और डिजिटल सलाह मिलकर खेती को और असरदार, टिकाऊ और लाभदायक बना रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ बड़े खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे-छोटे किसानों तक पहुंच रहा है। जिससे गांवों में खेती की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है।

स्मार्ट खेती का डिजिटल आधार

केंद्र सरकार ने ‘डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन’ को मंजूरी दी है, जिसमें लगभग 2,817 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इस मिशन में ‘एग्री स्टैक’ (जिसमें किसान रजिस्ट्रेशन, गांवों की जमीन का नक्शा, फसल बोने की जानकारी) और ‘कृषि निर्णय समर्थन प्रणाली’ (जियोस्पेशियल डेटा, मौसम, बाढ़/सूखा मॉनिटरिंग, भूजल डेटा, फसल उत्पादन और बीमा मॉडलिंग) शामिल हैं। यह मिशन स्मार्ट खेती की नींव रखता है, जहां किसान मोबाइल पर मिट्टी, मौसम, फसल और बाजार की जानकारी पा सकते हैं।

AI और डेटा से खेती में नई जान

कृषि क्षेत्र को स्मार्ट बनाने के लिए फरवरी 2026 में जयपुर में ‘भारत‑VISTAAR’ नामक एक AI-आधारित बहुभाषी प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया। यह किसानों को उनकी भाषा में मोबाइल या फोन कॉल के जरिए वैज्ञानिक सलाह, मौसम की जानकारी, बाजार की जानकारी और बेहतर खेती के तरीके उपलब्ध कराता है। इस प्लेटफॉर्म से अब तक 1.4 करोड़ से अधिक किसान जुड़ चुके हैं।

इसी तरह, ‘fieldWISE’ नामक एक कृषि इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ने AI, सैटेलाइट इमेजिंग और रिमोट सेंसिंग का इस्तेमाल कर लगभग 1.5 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाया है। इसने कीटों की पहचान, जलवायु जोखिम और फसल स्वास्थ्य की निगरानी में मदद की, और 8 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन को कीटों से बचाया।

पल-पल की मिट्टी की जानकारी

पटना स्थित ICAR‑RCER ने मई 2026 में BIT मेसरा के साथ मिलकर एक IoT आधारित मिट्टी मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया। यह सेंसर आधारित प्रणाली किसानों को मिट्टी की नमी और जलवायु के अनुसार सिंचाई का सुझाव देती है, जिससे पानी की बचत और बेहतर उत्पादन संभव हो सके।

राज्य स्तर पर भी स्मार्ट खेती

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ‘Smart Farming’ ऐप लॉन्च किया है, जो पाणी फाउंडेशन और कोयटा फाउंडेशन द्वारा विकसित है। यह ऐप फसलों के अनुसार सिंचाई, उर्वरक और कीट नियंत्रण की समय पर सलाह देता है, और आवाज आधारित समर्थन भी प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि AI आधारित ‘MahaVISTAAR‑AI’ प्लेटफॉर्म अब तक लगभग 25 लाख किसानों तक पहुंच चुका है।

उपग्रह और अंतरिक्ष से खेती में मदद

ISRO और विज्ञान मंत्रालय ने YES‑TECH (Yield Estimation System based on Technology) के तहत स्मार्ट सैंपलिंग तकनीकी विकसित की है, जो फसल कटिंग प्रयोग के स्थानों को बेहतर बनाकर उत्पादन अनुमान को सटीक बनाता है। इसके अलावा, FASAL, NADAMS, CHAMAN और SUFALAM जैसे अंतरिक्ष आधारित कार्यक्रम फसल निगरानी, सूखा आकलन और बागवानी विकास में मदद कर रहे हैं।

खेती और स्वास्थ्य का मेल

मई 2026 में ICAR और ICMR ने ‘SEHAT’ मिशन लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य कृषि और स्वास्थ्य को जोड़कर पोषण सुरक्षा और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करना है। यह कदम बताता है कि स्मार्ट खेती सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि किसान और परिवार की सेहत तक जुड़ रही है।

वास्तविक असर और गांवों की तस्वीर

ये तकनीकी पहल गांवों में धीरे-धीरे असर दिखा रही हैं। किसान अब मौसम, मिट्टी और बाजार की जानकारी समय पर पा रहे हैं। सिंचाई और उर्वरक का सही समय और मात्रा तय होने से लागत कम हो रही है और उत्पादन बेहतर हो रहा है। AI और डेटा आधारित सलाह से खेती में जोखिम कम हो रहा है, खासकर जलवायु अस्थिरता और कीट प्रकोप के समय इसका बड़ा लाभ मिल रहा है। हालांकि, डिजिटल संरचना, इंटरनेट की पहुंच और डेटा साक्षरता अभी भी सीमित है।

छोटे किसानों के लिए स्मार्ट उपकरण महंगे हो सकते हैं। इसलिए, इन तकनीकों को गांवों तक पहुंचाने में पंचायतों, कृषि विभागों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका अहम है। गांवों में स्मार्ट खेती को सफल बनाने के लिए पंचायत स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण शिविर, किसान क्लब और मोबाइल वैन जैसे माध्यम काम आ सकते हैं। पंचायतों को चाहिए कि वे किसानों को AgriStack, Bharat‑VISTAAR और Smart Farming ऐप्स से जोड़ें। साथ ही, मिट्टी और मौसम डेटा को स्थानीय भाषा में समझकर साझा करें। अगर पंचायतें इन तकनीकों को अपनाएं, तो खेती में लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान की आमदनी सुधरेगी।