
Birth Death Registration Civil Amendment Bill: AI Creative
Birth Death Registration Civil Amendment Bill: भारत डिजिटल गवर्नेंस की ओर तेजी से बढ़ रहा है। जन्म प्रमाणपत्र अब स्कूल, पासपोर्ट, आधार, वोटर लिस्ट और सरकारी नौकरियों तक की पहचान का आधार बन चुका है। लेकिन इसी व्यवस्था की एक बड़ी कमजोरी सामने आई है, देश में जन्म का पंजीकरण लगातार बेहतर हुआ है, जबकि मृत्यु पंजीकरण और खासकर मृत्यु के कारण (Cause of Death) का रिकॉर्ड अब भी अधूरा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार को संसद में जन्म-मृत्यु नागरिक संशोधन बिल, 2026 लाना पड़ा, जो देर से होने वाले पंजीकरण को और सख्त बनाता है।
बता दें कि यह केवल प्रमाणपत्र का मामला नहीं है। यह देश के पब्लिक हेल्थ डेटा, महामारी की तैयारी, बजट योजना, बीमा, पेंशन और जनसंख्या नीति से जुड़ा प्रश्न है। अगर सरकार को यह पता ही नहीं होगा कि लोग किस बीमारी से, किस उम्र में और किस जिले में मर रहे हैं, तो स्वास्थ्य नीति कितनी सटीक बनेगी?
भारत में जन्म का रिकॉर्ड तेजी से सुधर रहा है, लेकिन क्या मृत्यु का रिकॉर्ड भी उतना ही मजबूत है? यही सवाल संसद तक पहुंचा। इस पर सरकार का तर्क है कि देर से पंजीकरण में फर्जीवाड़े की आशंका रहती है। इसलिए दो वर्ष से अधिक देर से जन्म या मृत्यु दर्ज कराने के लिए अब न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रस्तावित संशोधन) की अनुमति आवश्यक होगी। इसका उद्देश्य लोगों को समय पर पंजीकरण के लिए प्रेरित करना है।
भारत में हर मृत्यु केवल एक परिवार का नुकसान नहीं होती बल्कि, वह स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक डेटा पॉइंट भी होती है। यदि किसी जिले में अचानक हार्ट अटैक, डेंगू, कैंसर या किडनी रोग से मौतें बढ़ रही हैं तो, सरकार उसी आधार पर डॉक्टर, अस्पताल, दवाइयां और बजट तय करती है।
2023 के संशोधन के बाद देश में जन्म-मृत्यु का राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस बनाया जा रहा है। यह डेटा जरूरत पड़ने पर आधार, पासपोर्ट, राशन कार्ड, मतदाता सूची जैसी सरकारी प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। जन्म प्रमाणपत्र को कई सरकारी सेवाओं के लिए एकल प्रमाण के रूप में भी मान्यता दी गई है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल डिजिटल रिकॉर्ड बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी-
2026 के संशोधन का मुख्य उद्देश्य हैं-
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था रियल टाइम नागरिक पंजीयन प्रणाली (Real-Time Civil Registration System) पर आधारित होगी।
जब जन्म और मृत्यु का डेटा विभिन्न सरकारी डेटाबेस से जुड़ रहा है, तब डेटा सुरक्षा और निजता की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। डिजिटल डेटा का उपयोग सार्वजनिक हित में हो, लेकिन नागरिकों की गोपनीयता सुरक्षित रहे, यह आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि मृत्यु का सही समय पर पंजीकरण नहीं होगा, तो स्वास्थ्य प्रणाली बीमारी के वास्तविक बोझ का आकलन नहीं कर पाएगी। मजबूत नागरिक पंजीयन प्रणाली किसी भी आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
भारत डिजिटल पहचान के दौर में प्रवेश कर चुका है। अब चुनौती केवल हर बच्चे का जन्म दर्ज करने की नहीं, बल्कि हर नागरिक की मृत्यु का भी समय पर और वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करने की है। क्योंकि किसी देश की स्वास्थ्य नीति केवल इस बात से नहीं बनती कि कितने लोग पैदा हुए, बल्कि इससे भी तय होती है कि कितने लोग, कब और किस कारण दुनिया से विदा हुए।
Updated on:
04 Aug 2026 02:42 pm
Published on:
04 Aug 2026 02:42 pm
