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त्योहारी सीजन में व्यवसायियों को फायदा: नवरात्रि-दीपावली में ₹7 लाख करोड़ से अधिक कारोबार का अनुमान

नवरात्रि से दीपावली तक देशभर में 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का त्योहारी कारोबार होने का अनुमान है। यह अनुमान कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (Confederation of All India Traders) ने लगाया है।
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भारत

•

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Vinay Shakya

•

Oct 14, 2026

Business expected in festive season

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का अनुमान है कि इस वर्ष नवरात्रि से दीपावली तक देशभर में 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का त्योहारी कारोबार होने की उम्मीद है। यह पिछले वर्ष के रिकॉर्ड कारोबार की तुलना में लगभग 15-18 फीसदी अधिक हो सकता है।

CAIT का मानना है कि नवरात्रि और दुर्गा पूजा के बाद, दशहरा, करवा चौथ, धनतेरस,दिवाली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती एवं तुलसी विवाह त्योहार बड़े रूप में देश भर में मनाए जाते हैं। ऐसे में कारोबार अधिक होने का अनुमान है।

प्रवीन खंडेलवाल ने क्या बताया?

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि ये प्रारंभिक अनुमान देशभर के विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारिक संगठनों एवं बाजारों से प्राप्त फीडबैक, उपभोक्ता मांग, त्योहारी खरीदारी के रुझान, ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी बाजारों की सक्रियता, स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग तथा विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली व्यापक आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि पिछले वर्ष दीपावली के अवसर पर देशभर में लगभग 6.05 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड व्यापार हुआ था, जिसमें लगभग 5.40 लाख करोड़ रुपये का वस्तु व्यापार तथा 65,000 करोड़ रुपये का सेवा क्षेत्र शामिल था। इस वर्ष त्योहारी गतिविधियों के और व्यापक होने को देखते हुए कारोबार के ₹7 लाख करोड़ से ऊपर जाने की संभावना है।

त्योहारी कारोबार का अनुमान

कैट के आकलन के अनुसार, नवरात्रि से दीपावली तक अनुमानित त्योहारी कारोबार में प्रमुख क्षेत्रों की हिस्सेदारी में किराना एवं FMCG 12 फीसदी, सोना, चांदी एवं आभूषण, 10 फीसदी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स, 8 फीसदी, कंज्यूमर ड्यूरेबल वस्तुएं 7 फीसदी, रेडीमेड गारमेंट्स 7 फीसदी, गिफ्ट आइटम्स 7 फीसदी, होम डेकोर 5 फीसदी, फर्नीचर एवं फर्निशिंग 5 फीसदी, मिठाई एवं नमकीन 5 फीसदी, टेक्सटाइल एवं फैब्रिक्स 4 फीसदी, पूजा सामग्री 3 फीसदी,फल एवं ड्राई फ्रूट्स 3 फीसदी, बेकरी एवं कन्फेक्शनरी 3 फीसदी, फुटवियर 2 फीसदी, अन्य वस्तुएं एवं संबंधित कारोबार 19 फीसदी हो सकता है।

त्योहारी अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की भूमिका

प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष त्योहारी अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी। नवरात्रि से दीपावली के दौरान परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, होटल, रेस्तरां, पर्यटन, कैटरिंग, टेंट एवं डेकोरेशन, लाइटिंग, इवेंट मैनेजमेंट, कैब एवं स्थानीय परिवहन सहित अनेक सेवाओं में भारी मांग रहने की संभावना है।

पिछले वर्ष सेवा क्षेत्र में लगभग ₹65,000 करोड़ के कारोबार के मुकाबले इस वर्ष सेवा क्षेत्र में 20-25 फीसदी तक वृद्धि का प्रारंभिक अनुमान है। इसके आधार पर त्योहारी अवधि में सेवा क्षेत्र का कारोबार लगभग 80,000 करोड़ से एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी त्योहारों के सीजन में अनेक पर्वों के दौरान देशभर में बड़ी संख्या में धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और व्यावसायिक आयोजन भी होंगे जिनमें मार्केट उत्सव, रामलीला, दुर्गा पूजा पंडाल, गरबा एवं डांडिया, दिवाली मिलन एवं मेले, प्रदर्शनी, स्थानीय बाजार कार्यक्रम, सोसायटी एवं सामुदायिक समारोह, कॉर्पोरेट कार्यक्रम तथा पारिवारिक आयोजन भी बड़ी संख्या में होंगे।

वोकल फॉर लोकल का असर

प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि त्योहारी व्यापार में यह वृद्धि केवल उपभोक्ता मांग का परिणाम नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को देश के बाजारों और उपभोक्ताओं द्वारा मिल रही व्यापक स्वीकार्यता को भी दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि आज भारतीय उपभोक्ता स्थानीय कारीगरों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स, हस्तशिल्प, भारतीय ब्रांडों और देश में निर्मित उत्पादों को तेजी से प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे छोटे व्यापारियों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे बाजार मिलता है तथा त्योहारी मांग का लाभ देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचता है।

खंडेलवाल ने कहा कि नवरात्रि से दीपावली तक होने वाला 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संभावित कारोबार केवल व्यापार का आंकड़ा नहीं है। यह भारत की बढ़ती उपभोक्ता शक्ति, स्थानीय बाजारों की मजबूती और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन के जन-आंदोलन में बदलने का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस त्योहारी सीजन में “स्थानीय से राष्ट्रीय और राष्ट्रीय से वैश्विक” की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता है। भारतीय उत्पादों की खरीद से व्यापारी, कारीगर, एमएसएमई, महिला उद्यमी, स्टार्टअप और स्थानीय सेवा प्रदाता सभी लाभान्वित होंगे।