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बच्चों की जिंदगी पर मंडराया खतरा: हिंसक हो रहे बच्चे, जानिए आर्थिक घटनाओं से लेकर हत्या की वारदातों तक डरावनी दास्तां

मोबाइल गेमिंग की लत बच्चों पर बुरा असर डाल रही है। ऑनलाइन गेम खेलने की लत, बच्चों की मानसिक स्थिति खराब कर रही है और उन्हें अपराध की तरफ धकेल रही है।
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Vinay Shakya

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Sep 21, 2026

online mobile games effect on children

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

मोबाइल गेमिंग और अपराध का खौफनाक मेल धीरे-धीरे एक चिंताजनक तस्वीर बनता जा रहा है। इसका उदाहरण छत्तीसगढ़ में देखने को मिला है। बच्चों को लुभाने वाले मोबाइल गेम्स अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहे, बल्कि कई बार जीवन और सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं।

गेम में लीन युवकों को मालगाड़ी ने टक्कर मारी

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सकरेलीभाठा फाटक के पास 4 दोस्त मोबाइल गेम खेल रहे थे। उनमें से दो गणेश पंडाल से प्रसाद लेने चले गए, जबकि 14 वर्षीय टिकेश साहू और उसका एक मित्र ट्रैक के पास ही गेम में इतने खोए रहे कि तेज रफ्तार मालगाड़ी की चपेट में आ गए। टिकेश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया। दोनों कक्षा 9 के छात्र थे और ईयरफोन लगाए होने के कारण आसपास का ध्यान नहीं दे पाए। रेलवे ट्रैक पर गेम खेलते समय यह हादसा 15 सितंबर 2026 की रात को हुआ था।

गेम का का हिंसक असर

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में अगस्त 2025 में ऑनलाइन गेम की हिंसक तस्वीर देखने को मिली। गेम खेलते-खेलते आपस का विवाद चाकू तक पहुंच गया। मोबाइल पर ‘Free Fire’ गेम खेलते समय एक 14 वर्षीय लड़के ने दूसरे का मजाक उड़ाया। गेम में हार का मजाक उड़ाए जाने से नाराज होकर 17 वर्षीय साथी को चाकू से घायल कर दिया। इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी नाबालिग को हिरासत में लेकर सुधार गृह भेज दिया।

आर्थिक धोखाधड़ी का नया रूप

हाल में रायपुर में कई परिवारों ने शिकायत की है कि बच्चों द्वारा मोबाइल गेम खेलते समय भेजे गए संदिग्ध लिंक, जिनमें ‘फ्री कॉइन’, ‘रिवॉर्ड’ या ‘अपडेट’ का लालच दिया गया था। इन सभी के कारण लोगों के बैंक खातों से पैसे कट गए। साइबर क्राइम विशेषज्ञ मुकेश चौधरी के अनुसार, बच्चे अनजाने में भुगतान की अनुमति दे देते हैं, जिससे अभिभावकों के खाते से रकम निकल जाती है।

आत्महत्या की दर्दनाक घटनाएं

जशपुर जिले में जून 2024 में 12वीं के छात्र सुमित लकड़ा ने ‘Free Fire’ गेम में पैसे हारने के डर से आत्महत्या कर ली। परिवार के अनुसार, वह रिश्तेदारों से पैसे लेकर गेम खेलता था और हारने पर डांट के डर से उसने यह कदम उठाया। इसी तरह, मई 2024 में जगदलपुर में 14 वर्षीय अभिनव ने मोबाइल गेम खेलने से रोकने पर इंद्रावती नदी में छलांग लगा दी। परिवार ने बताया कि वह फ्री फायर गेम में लिप्त था और मोबाइल छीने जाने पर नाराज होकर यह कदम उठाया।

पुरानी घटनाएं: गेम के लिए दोस्त की हत्या

मार्च 2021 में रायगढ़ जिले में मोबाइल गेमिंग के शौकीन 17 वर्षीय लड़के ने ‘इन-गेम’ आइटम खरीदने के लिए दोस्त से ₹70,000 उधार लिए थे। पैसे चुकाने में असमर्थता के कारण दोस्त ने उसकी हत्या कर दी। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि मोबाइल गेमिंग बच्चों के लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि कई बार जीवन, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

बच्चों को हिंसक बना रहे मोबाइल गेम

समझने की बात यह है कि मोबाइल गेम्स बच्चों को लुभाने वाले साधन बन चुके हैं। चाहे वह रोमांच हो, जीत का अहसास हो या ‘फ्री कॉइन’ और ‘रिवॉर्ड’ का लालच। लेकिन इनकी लत, हिंसक माहौल, आर्थिक धोखाधड़ी और मानसिक दबाव कई बार बच्चों को खतरनाक कदम उठाने पर मजबूर कर देते हैं।

आम नागरिकों एवं अभिभावकों के सुझाव

  • माता-पिता और अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की मोबाइल गतिविधियों पर नजर रखें।
  • गेम्स में संदिग्ध लिंक या भुगतान की अनुमति देने से पहले सावधानी बरतें।
  • दूसरे बच्चों को गेमिंग के नुकसान समझाएं।
  • खेलते समय आसपास की सुरक्षा, मानसिक संतुलन और आर्थिक जोखिमों के बारे में जानकारी दें।
  • स्कूल और स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाएं। खेल की लत, साइबर धोखाधड़ी और हिंसक गेम्स के प्रभावों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
  • स्कूलों में काउंसलिंग और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम शुरू किए जाएं, ताकि बच्चे और अभिभावक दोनों सतर्क रहें।