
सांकेतिक इमेज (सोर्स- ChatGpt)
शहरों में पैदल चलने का नया ट्रेंड धीरे-धीरे उभर रहा है। सिर्फ फिटनेस या ट्रैफिक कम करने के लिए नहीं, बल्कि शहर की रफ्तार में रुकावटें कम करने, पर्यावरण को बचाने और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने को एक मौलिक अधिकार घोषित किया है। इसके बाद कई शहरों में वॉकिंग ट्रेल, स्काईवॉक और फुटपाथ सुधार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। आइए देखें कि यह ट्रेंड आपके शहर तक कैसे पहुंच रहा है और इसका असर क्या हो सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि सुरक्षित और चिन्हित फुटपाथ पर पैदल चलना संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों का अधिकार प्राथमिकता में होना चाहिए। नगर निगम, पैनल आदि को फुटपाथ बनाना और उनका रखरखाव करना अनिवार्य है। नागरिकों को कानूनी रास्ता भी उपलब्ध कराया गया है। यदि यह सुविधा नहीं मिलती है, तो वे मुआवजे के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।
शहरों में पैदल चलने की स्थिति से संबंधित हाल ही में Neural City द्वारा 'State of Indian Streets 2026' नाम से अध्यन किया गया। इस अध्यन में 12 शहरों में फुटपाथ की गुणवत्ता और निरंतरता का आकलन किया। इसमें लखनऊ सबसे आगे रहा, जहां 28% सड़कों पर कम से कम 100 मीटर तक बिना रुकावट के चलना संभव था। इसकी अगली कड़ी में बेंगलुरु दूसरे स्थान पर (25.9%), फिर हैदराबाद (15.1%) और चेन्नई (13.9%) रहे। बाकी शहरों में यह प्रतिशत और भी कम था। अध्यन के मुताबिक, बेंगलुरु में कुल मिलाकर 54.6% फुटपाथ ही चलने योग्य थे, बाकी अवरुद्ध थे। यहां फुटपाथ पर वेंडर, पार्किंग और अन्य तरीके बाधित किया गया है। अध्यन के अनुसार, गुरुग्राम की स्थिति और भी चिंताजनक है। साल 2020 के एक अध्ययन के अनुसार, गुरुग्राम शहर की लगभग 800 किलोमीटर सड़कें पैदल चलने के लिए जरूरी आधारभूत संरचना से वंचित हैं।
दिल्ली में पुराना किला- प्रगति मैदान- दिल्ली चिड़ियाघर के बीच पैदल चलने योग्य रास्तों की योजना को हाल ही में मंजूरी मिली है। इसमें सुरक्षित क्रॉसिंग, बेहतर सड़कों का सौंदर्यीकरण, ट्रैफिक को धीमा करने वाले उपाय और सार्वजनिक परिवहन से बेहतर जुड़ाव शामिल है। इसके अलावा मुंबई में मलाबार हिल पर एक ऊंचा वॉकिंग ट्रेल (482–485 मीटर लंबा) बनाया गया है, जो एक माइक्रो-फॉरेस्ट के बीच से गुजरता है। यह ट्रेल शहर की हरियाली और प्राकृतिक दृश्य प्रस्तुत करता है। इसमे आम, जामुन, गुलमोहर जैसे पेड़ और पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है। यह ट्रेल इतना लोकप्रिय हुआ कि टिकट एक सप्ताह पहले बुक करना पड़ता है।
शहरों में पैदल चलने के लिए सुरक्षित और आकर्षक रास्ते न सिर्फ ट्रैफिक और प्रदूषण को कम करते हैं, बल्कि लोगों को सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित भी करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसे एक अधिकार के रूप में स्थापित कर दिया है, जिससे नगर निगमों पर जिम्मेदारी बढ़ गई है। वॉकिंग ट्रेल्स, जैसे- मलाबार हिल का उदाहरण, यह दिखाता है कि कैसे सोच-समझकर डिजाइन किया गया ट्रेल शहर में हरियाली और मानसिक ताजगी ला सकता है। दिल्ली शुरू हुई योजना जैसी पहलें यह संकेत देती हैं कि पैदल चलने को अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि शहर की योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
यदि आपके शहर में फुटपाथ या वॉकिंग ट्रेल की स्थिति खराब है तो यह समय है कि आप स्थानीय नगर निगम या विकास प्राधिकरण से संपर्क करें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर आप लिखित शिकायत कर सकते हैं और सुधार की मांग कर सकते हैं।
इसके अलावा, अगर आपके शहर में कोई ट्रेल, स्काईवॉक या पैदल मार्ग योजना चल रही है, तो उसे अपनाने और उसका उपयोग करने से यह पहल मजबूत होगी।
शहरों में पैदल चलने की सुविधा सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक जरूरी बदलाव है। यह ट्रैफिक, स्वास्थ्य और पर्यावरण तीनों के लिए फायदेमंद है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अधिकार का दर्जा दिया है और कई शहरों में योजनाएं भी बन रही हैं। अब यह नागरिकों पर है कि वे इसे अपनाएं, मांग करें और अपने शहर को वॉकिंग-फ्रेंडली बनाएं।
Updated on:
07 Aug 2026 09:11 pm
Published on:
07 Aug 2026 09:11 pm
