
जानिए प्रोजेक्ट संगम की पूरी कहानी (Photo: ChatGpt)
AI Delhi Traffic Control : देश की राजधानी दिल्ली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली के उल्लेखनीय परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल ही में लागू की गई एआई-संचालित निगरानी, डेटा विश्लेषण और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन उपायों के चलते राजधानी में ट्रैफिक जाम में लगभग 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। दिल्ली में सड़क पर जाम से मुक्ति पाने के लिए क्या—क्या उपाय किए गए हैं, आइए जानते हैं।
दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक की वास्तविक स्थिति आंकने के लिए Google Maps के लाइव ट्रैफिक डेटा का इस्तेमाल किया। हर 15 मिनट में जाम की लंबाई का विश्लेषण किया गया।
दिल्ली की सड़क पर घट रहा है औसत ट्रैफिक जाम
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े महानगर में महज तीन महीनों में इस स्तर का सुधार दिखाता है कि डेटा-आधारित ट्रैफिक प्रबंधन पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक असरदार साबित हो सकता है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की 'प्रोजेक्ट संगम' पहल का मकसद राजधानी के सबसे अधिक प्रभावित ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स की पहचान कर वहां वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान लागू करना है। यह परियोजना केवल तकनीक तक सीमित नहीं है। इसके तहत रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन (MWA) जैसे स्थानीय संगठनों को भी शामिल कर नागरिक भागीदारी बढ़ाई जा रही है, ताकि इलाके-विशेष समस्याओं का समाधान स्थानीय जरूरतों के हिसाब से हो सके।
कई प्रमुख चौराहों और मार्गों पर ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
इन क्षेत्रों में बेहतर लेन प्रबंधन, अतिक्रमण हटाने, सिग्नल टाइमिंग में बदलाव और लगातार निगरानी से सकारात्मक नतीजे मिले हैं।
हालांकि ज़्यादातर स्थानों पर सुधार हुआ है, लेकिन चार हॉटस्पॉट्स पर ट्रैफिक दबाव बढ़ने की भी सूचना मिली है, जिसकी बड़ी वजह वहां चल रहा निर्माण कार्य बताई जा रही है-
इसके अलावा, समीक्षा में यह भी सामने आया कि द्वारका मोड़, सराय काले खां, मुकरबा चौक और द्वारका के धौला कुआं जाने वाले गोल चक्कर (डाबरी गोल चक्कर) जैसे पुराने बॉटलनेक अब भी बने हुए हैं, जिन्हें तत्काल इंफ्रास्ट्रक्चर और परिचालन संबंधी हस्तक्षेप की जरूरत है। अधिकारियों का कहना है कि इन इलाकों में निर्माण कार्य, बढ़ता यातायात, पार्किंग की समस्या और सड़क क्षमता पर बढ़ता दबाव मुख्य कारण हो सकते हैं। इन जगहों पर आगे अध्ययन और इंजीनियरिंग समाधान पर काम किया जा रहा है।
आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन में एआई सिर्फ कैमरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर वास्तविक समय (रियल-टाइम) में फैसले लेने में मदद करता है।
गूगल का अपना 'प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट' (Project Green Light) भी इसी दिशा में एक वैश्विक उदाहरण है, जिसमें गूगल मैप्स के डेटा से सिग्नल टाइमिंग को अनुकूलित कर गाड़ियों के रुकने-चलने की संख्या और उत्सर्जन कम करने की कोशिश की जाती है। यह पहल दुनिया के करीब एक दर्जन शहरों में पहल में लाया गया। इन शहरों में भारत का बेंगलुरु भी शामिल है। इसके अलावा सिंगापुर, लंदन, सियोल और दुबई जैसे शहर पहले से ही एआई आधारित स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में भी दिल्ली के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि ट्रैफिक सुधार सिर्फ पुलिस के प्रयासों से संभव नहीं है, इसलिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इनमें शामिल हैं-
इन एजेंसियों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण, नियमित समीक्षा बैठकें और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि ट्रैफिक प्रवाह बेहतर बनाया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैफिक जाम में कमी सिर्फ यात्रा आसान नहीं बनाती, बल्कि इसके कई व्यापक फायदे भी हैं।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कुछ समय पहले हुई बैठक में एआई आधारित निगरानी और डिजिटल प्रवर्तन प्रणाली को 24 घंटे, सातों दिन प्रभावी ढंग से चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक जाम सिर्फ समय और ईंधन की बर्बादी नहीं करता, बल्कि राजधानी में प्रदूषण बढ़ाने का भी बड़ा कारण है। उन्होंने दिल्ली की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए निर्बाध आवागमन को जरूरी बताते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को पूर्ण प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया।
उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और मजबूत करने का निर्देश दिया और यह भी कहा कि वे स्वयं कई ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स का निरीक्षण कर सुधार कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
दिल्ली में एआई आधारित ट्रैफिक प्रबंधन की शुरुआती सफलता यह संकेत देती है कि आने वाले समय में तकनीक शहरी परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, तेज और कुशल बना सकती है। हालांकि द्वारका मोड़, सराय काले खां, मुकरबा चौक और भावभूति मार्ग जैसे कुछ संवेदनशील इलाकों में चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, लेकिन डेटा आधारित निर्णय, स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, डिजिटल प्रवर्तन और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से राजधानी को जाम-मुक्त बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगर इस मॉडल को लगातार बेहतर किया गया और अन्य महानगरों में भी लागू किया गया, तो भारत के शहरी यातायात प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
Updated on:
27 Jul 2026 01:11 pm
Published on:
27 Jul 2026 01:11 pm
