
दिल्ली में 1 अगस्त से लागू होगी दिल्ली लक्ष्मी योजना (Photo: ChatGpt)
राजनीति में महिलाओं को केवल मतदाता या लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय एजेंट के रूप में देखने की दिशा में हालिया घटनाक्रम एक नया अध्याय लिख रहे हैं। दिल्ली में ‘महिला समृद्धि योजना’ से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर ‘विमेन-लेड डेवलपमेंट’ मॉडल तक, यह बदलाव केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब इसका असर जमीन पर भी दिखने लगा है।
दिल्ली सरकार ने ‘महिला समृद्धि योजना’ को अब ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के नाम से पुनः नामित किया है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा है कि लक्ष्मी योजना की पहली किस्त रक्षाबंधन पर खाते में जमा कराई जाएगी।
दिल्ली कैबिनेट ने इस योजना को 8 मार्च 2025 को मंजूरी दी थी, जिसमें 5,110 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पंजीकरण पोर्टल शुरू नहीं हुआ था और कोई राशि लाभार्थियों के खाते में नहीं पहुंची थी। अब पात्रता तय हो चुकी है और योजना के शुभारंभ की तैयारी अंतिम चरण में है।
दिल्ली की यह पहल केवल एक राज्य-स्तरीय योजना नहीं है, बल्कि भारत में महिलाओं को सीधे नकद सहायता देने की राजनीति का एक प्रतीक बन चुकी है। दिल्ली में तीनों प्रमुख दल आप, भाजपा और कांग्रेस ने 2025 विधानसभा चुनावों में महिलाओं को प्रतिमाह नकद सहायता देने का वादा किया था। आप ने 2,100 रुपये, जबकि भाजपा और कांग्रेस ने 2,500 रुपये देने की घोषणा की थी। यह दर्शाता है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एजेंडा अब सभी पार्टियों की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुका है।केंद्र विमेन-लेड डेवलपमेंट को दे रहा तवज्जो
राष्ट्रीय स्तर पर भी महिला-नेतृत्व को विकास का केंद्र मानने की प्रवृत्ति बढ़ी है। गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘विमेन-लेड डेवलपमेंट’ मॉडल को नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण का नया अध्याय बताया है। उन्होंने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’, उज्ज्वला योजना, मुद्रा योजना में महिलाओं को 70 प्रतिशत ऋण, ‘लखपति दीदी’, ‘करोड़पति दीदी’ और स्वयं सहायता समूहों जैसी पहलों का उल्लेख किया है।
इन पहलों का असर केवल आंकड़ों में ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीति में भी दिख रहा है। एक शोध में दिल्ली में 2015 से 2025 तक राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में महिलाओं की भूमिका में आए बदलाव को रेखांकित किया गया है। शुरुआत में सुरक्षा और कल्याण पर जोर था, लेकिन समय के साथ यह एजेंडा आर्थिक भागीदारी और प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण की ओर बढ़ा है। यह बदलाव महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह परिवर्तन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक ओर यह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर यह राजनीतिक दलों के लिए एक रणनीतिक वोट बैंक भी बन गया है। नकद हस्तांतरण की नीति ने राजनीतिक संवाद में महिलाओं को केंद्र में ला दिया है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या यह दीर्घकालिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम है, या केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा?
जमीनी स्तर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जब दिल्ली लक्ष्मी योजना लागू होगी, तो क्या यह महिलाओं की आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार लाएगी? क्या इससे उनकी सामाजिक स्थिति, निर्णय-शक्ति और राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि होगी? और क्या इस तरह की योजनाएं अन्य राज्यों में भी अपनाई जाएंगी?
सरकार का अगला कदम यह होना चाहिए कि लाभार्थियों की पहचान, आवेदन प्रक्रिया और राशि का वितरण पारदर्शी और समयबद्ध हो। साथ ही, इस योजना के असर का आकलन करने के लिए समय-समय पर रिपोर्टिंग और समीक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि यह योजना केवल एक घोषणापत्र का हिस्सा नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन में एक स्थायी बदलाव का आधार बन रही है।
महिला सशक्तिकरण की राजनीति अब केवल वादों तक सीमित नहीं रही। दिल्ली लक्ष्मी योजना और राष्ट्रीय विमेन-लेड डेवलपमेंट मॉडल ने इसे एक नया आयाम दिया है। अब यह देखना शेष है कि यह नया अध्याय महिलाओं की जिंदगी में कितनी गहराई तक बदलाव ला पाता है और क्या यह राजनीति को महिलाओं की वास्तविक भागीदारी की दिशा में मोड़ता है।
Updated on:
30 Jul 2026 12:27 pm
Published on:
30 Jul 2026 12:26 pm
बड़ी खबरें
View AllPatrika+
ट्रेंडिंग
