
धनतेरस पर सोना खरीदने जा रहे हैं?, PC- IANS
धनतेरस और दिवाली के अवसर पर सोना-चांदी खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा है। इस वर्ष धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। ऐसे में सर्राफा बाजारों में खरीदारी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, सोने के गहने खरीदते समय केवल प्रति ग्राम कीमत देखना पर्याप्त नहीं है। आभूषणों के अंतिम बिल में मेकिंग चार्ज, वेस्टेज शुल्क और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसी अतिरिक्त लागत भी शामिल हो सकती है। कई बार इन शुल्कों की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण ग्राहकों को उम्मीद से अधिक भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में खरीदारी से पहले बिल की पांच महत्वपूर्ण बातों की जांच करना जरूरी है।
सोने की कीमत किसी भी आभूषण के बिल का सबसे बड़ा हिस्सा होती है। खरीदारी से पहले यह सुनिश्चित करें कि ज्वेलर जिस कैरेट के सोने की कीमत बता रहा है, गहना भी उसी शुद्धता का है। आमतौर पर आभूषणों में 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता है। 22 कैरेट सोने में लगभग 91.6 प्रतिशत और 18 कैरेट सोने में 75 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है। दोनों की कीमत अलग-अलग होती है। इसलिए ग्राहक को प्रति ग्राम दर और गहने के शुद्ध वजन की जानकारी लेनी चाहिए। इसके अलावा, अलग-अलग ज्वेलर्स के यहां सोने की कीमतों की तुलना करना भी उपयोगी हो सकता है। खरीदारी के समय लागू दर और बिल में दर्ज दर समान होनी चाहिए।
मेकिंग चार्ज वह राशि है, जो ज्वेलर आभूषण की डिजाइनिंग और निर्माण के बदले लेता है। कुछ ज्वेलर्स इसे सोने की कुल कीमत के प्रतिशत के रूप में निर्धारित करते हैं, जबकि कुछ प्रति ग्राम के आधार पर निश्चित राशि वसूलते हैं। आभूषण की डिजाइन जितनी जटिल होगी, मेकिंग चार्ज उतना अधिक हो सकता है। हालांकि, यह शुल्क अलग-अलग दुकानों पर अलग हो सकता है। इसलिए ग्राहक को खरीदारी से पहले पूछना चाहिए कि मेकिंग चार्ज किस आधार पर लगाया गया है। यह भी जानना जरूरी है कि इसमें किसी तरह की छूट या मोलभाव की गुंजाइश है या नहीं।
सोने के आभूषण तैयार करते समय निर्माण प्रक्रिया में होने वाली संभावित बर्बादी को आधार बनाकर कुछ ज्वेलर्स वेस्टेज चार्ज जोड़ते हैं। कई दुकानों पर यह शुल्क मेकिंग चार्ज में शामिल होता है, जबकि कुछ जगह इसे अलग से वसूला जाता है। ऐसे में ग्राहक को ज्वेलर से स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए कि वेस्टेज चार्ज क्यों लगाया गया है और इसकी गणना कैसे की गई है। यदि मेकिंग चार्ज में निर्माण से जुड़ी लागत पहले ही शामिल है, तो अलग से वेस्टेज शुल्क लगाने का आधार पूछना चाहिए। इससे ग्राहक एक ही प्रकार की लागत के लिए अनावश्यक अतिरिक्त भुगतान करने से बच सकता है।
सोने की शुद्धता की पहचान के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का हॉलमार्क महत्वपूर्ण है। हॉलमार्क वाले सोने के गहनों पर बीआईएस का चिह्न, शुद्धता की जानकारी और छह अंकों का एचयूआईडी नंबर होता है। ग्राहक बीआईएस के आधिकारिक 'बीआईएस केयर' ऐप में 'वेरिफाई एचयूआईडी' सुविधा के माध्यम से गहने की जानकारी जांच सकते हैं।
बीआईएस के अनुसार, सोने के आभूषण की हॉलमार्किंग का निर्धारित शुल्क 45 रुपये प्रति आभूषण है। यह शुल्क वजन के आधार पर नहीं, बल्कि प्रति आभूषण निर्धारित है। यदि ज्वेलर बिल में हॉलमार्किंग शुल्क अलग से जोड़ता है, तो ग्राहक को उसकी स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए।
सोने के आभूषणों की खरीदारी में जीएसटी की सही गणना करना भी जरूरी है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अनुसार, तैयार सोने के आभूषण की कुल बिक्री कीमत पर तीन प्रतिशत जीएसटी लागू होता है। इसमें सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज सहित आभूषण के कुल लेनदेन मूल्य को आधार बनाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज मिलाकर किसी गहने का कुल मूल्य एक लाख रुपये है, तो उस पर तीन हजार रुपये जीएसटी लगेगा। इस प्रकार अंतिम भुगतान 1.03 लाख रुपये होगा। ग्राहक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिल में कर की दर और राशि स्पष्ट रूप से दर्ज हो।
सोने के गहने खरीदने के बाद ग्राहक को पक्का बिल अवश्य लेना चाहिए। इसमें आभूषण का विवरण, वजन, शुद्धता, कीमत और अतिरिक्त शुल्क स्पष्ट होने चाहिए। बीआईएस के अनुसार, हॉलमार्क वाले आभूषणों का प्रामाणिक बिल रखना जरूरी है। इससे भविष्य में शुद्धता संबंधी विवाद या शिकायत होने पर सहायता मिल सकती है। यदि हॉलमार्क वाला आभूषण निर्धारित शुद्धता से कम पाया जाता है, तो नियमों के अनुसार उपभोक्ता मुआवजे का पात्र हो सकता है।
यदि सोना खरीदने का उद्देश्य केवल निवेश है, तो आभूषणों के अलावा सिक्के, बार और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों की तुलना की जा सकती है। आभूषणों में मेकिंग चार्ज के कारण अतिरिक्त लागत आती है, जबकि दूसरे विकल्पों में भी प्रीमियम, शुल्क और अन्य खर्च हो सकते हैं। इसलिए किसी भी विकल्प को चुनने से पहले उसकी कुल लागत, शुद्धता, बिक्री की शर्तों और संभावित जोखिमों को समझना जरूरी है।
Updated on:
2 Nov 2026, 4:08 PM IST
Published on:
2 Nov 2026, 4:08 PM IST
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