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चुनाव आयोग ने Form-6 से हटाया SIR डिक्लेरेशन: जानिए इस संशोधन का महत्व और मतदाताओं पर असर

चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला किया है। आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा हो चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा हटा दी है। आइए जानते हैं, इसका क्या असर होगा?
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भारत

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Vinay Shakya

•

Sep 30, 2026

EC removed sir declaration from form-6

सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा हो चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म 6 से अतिरिक्त घोषणा हटा दी है। यानी SIR पूरा होने के बाद फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाएगी। हालांकि, जिन राज्यों में SIR जारी है। वहां फॉर्म-6 में यह घोषणा अब भी दिख रही है। यह बदलाव मंगलवार देर रात ECINET पोर्टल पर किया गया। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को इसका ऐलान किया था।

चुनाव आयोग ने यह निर्णय क्यों लिया?

चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए फॉर्म 6 से SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से संबंधित अतिरिक्त घोषणा पत्र को हटा दिया है। यह बदलाव उन राज्यों में किया गया है जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह निर्णय 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया। आयोग ने यह स्पष्ट किया कि SIR से संबंधित घोषणा केवल विशेष रिवीजन अवधि के दौरान लागू होगी।

SIR से संबंधित विवाद

चुनाव आयोग के इस निर्णय के पीछे कई आपत्तियां थीं, जिनमें फॉर्म-6 प्रक्रिया में किए गए संशोधनों को लेकर उठाए गए सवाल शामिल थे। संधू और जोशी ने इस अतिरिक्त घोषणा पत्र की वैधता पर भी सवाल उठाए थे, जिसके कारण आयोग ने इसे हटाने का निर्णय लिया।

फॉर्म-6 में बदलाव का क्या महत्व है?

फॉर्म 6 में किए गए इस बदलाव का सीधा असर नए मतदाताओं पर पड़ेगा। पहले, ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में एक अतिरिक्त घोषणा पत्र शामिल था, जिसमें आवेदकों से पूछा जाता था कि क्या वे या उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछले SIR में शामिल थे। अब, इस अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया गया है, जिससे प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

लागू होगा फॉर्म-6 का मूल प्रारूप

चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि फॉर्म-6 का मूल प्रारूप अब लागू होगा, जबकि उन राज्यों में जहां SIR चल रहा है। वहां एक अलग घोषणा पत्र भरना होगा। यह निर्णय उन राज्यों के लिए है, जहां SIR की प्रक्रिया अभी भी चल रही है, जैसे- कर्नाटका। चुनाव आयोग का यह निर्णय मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में एक कदम है। इससे नए मतदाताओं को पंजीकरण में आसानी होगी और उन्हें अतिरिक्त जानकारी प्रदान करने की आवश्यकता नहीं होगी।