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आपके कपड़े भी फैला रहे हैं माइक्रोप्लास्टिक? एक वॉश में निकल सकते हैं लाखों कण, जानिए ये कितना खतरनाक!

क्या आप जानते हैं कि आपके कपड़े हर बार धोने पर लाखों सूक्ष्म प्लास्टिक कण छोड़ते हैं? सोचिए, अगर आपके फैशन के चुनाव से न सिर्फ आपकी स्टाइल बल्कि हमारे पर्यावरण की सेहत भी प्रभावित हो रही है!
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 08, 2026

Fast fashion water pollution

प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

कपड़ों से होने वाला प्रदूषण हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। समझिए कपड़ा प्रदूषण क्या है, यह कैसे फैलता है, और हम रोकने के लिए क्या कर सकते हैं।

कपड़ा प्रदूषण क्या है?

सिंथेटिक कपड़ों से निकलने वाले सूक्ष्म प्लास्टिक कण माइक्रोफाइबर्स - हर बार धोने या पहनने पर पानी और हवा में मिल जाते हैं। ये समुद्रों में पहुंचने वाले प्राइमरी माइक्रोप्लास्टिक का 16 से 35 प्रतिशत तक हिस्सा होते हैं। एक ही वॉश में 7 लाख से 1.2 करोड़ तक माइक्रोफाइबर्स निकल सकते हैं। ये कण पानी, मछलियों और अंततः हमारे भोजन व शरीर में पहुंच सकते हैं।

कपड़ा उद्योग का योगदान और फैशन की भूमिका

फास्ट फैशन और सिंथेटिक फाइबर जैसे पॉलिएस्टर, नायलॉन, एक्रिलिक, फ्लीस आदि का व्यापक उपयोग इस समस्या को बढ़ाता है। कपड़ा निर्माण की प्रक्रिया जैसे डाइंग, फिनिशिंग, वेट प्रोसेसिंग भी भारी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक छोड़ती है। भारत में औसतन एक व्यक्ति साल में लगभग 5 वस्त्र खरीदता है, जबकि अमेरिका में यह संख्या 53 है - यह दर्शाता है कि खपत का स्तर भी मायने रखता है।

कैसे रोकें—उपाय और समाधान

नीचे दिए गए उपायों से हम व्यक्तिगत और औद्योगिक स्तर पर कपड़ा प्रदूषण को कम कर सकते हैं:

1. प्राकृतिक और टिकाऊ कपड़े चुनें

कपास, लिनन, हेम्प जैसे प्राकृतिक फाइबर सिंथेटिक की तुलना में कम माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं। हालांकि, प्राकृतिक कपड़ों पर रासायनिक फिनिशिंग भी पर्यावरणीय प्रभाव बढ़ा सकती है, इसलिए बिना भारी रासायनिक उपचार वाले विकल्प चुनना बेहतर है।

2. धोने की आदतों में बदलाव

  • ठंडे पानी में धोएं और कम तापमान व कोमल चक्र (जेंटल साइकिल) का उपयोग करें। इससे कपड़ों पर तनाव कम होता है और फाइबर टूटने की संभावना घटती है।
  • कपड़ों को आवश्यकता से अधिक न धोएं - यह पहनने की उम्र बढ़ाता है और माइक्रोफाइबर का उत्सर्जन कम करता है।
  • लिक्विड डिटर्जेंट का उपयोग करें और टम्बल ड्रायर से बचें - ये उपाय भी माइक्रोफाइबर रिलीज को कम करते हैं।

3. वॉशिंग मशीन में फिल्टर या गप्पी बैग का उपयोग

  • Filtrol 160 जैसे बाहरी वॉशिंग मशीन फिल्टर लगभग 80–90% माइक्रोफाइबर्स को रोक सकते हैं।
  • Guppyfriend बैग जैसे कैचमेंट बैग भी प्रभावी हैं - ये माइक्रोफाइबर्स को पानी में जाने से रोकते हैं।

4. कपड़ा डिजाइन और निर्माण में सुधार

  • फाइबर और यार्न की संरचना को बेहतर बनाकर - जैसे फाइनर यार्न, कॉम्पैक्ट स्ट्रक्चर - माइक्रोफाइबर रिलीज कम किया जा सकता है।
  • वेट प्रोसेसिंग में प्री-ट्रीटमेंट और कोटिंग से माइक्रोफाइबर रिलीज 84–96% तक घटाया जा सकता है।
  • बायोडिग्रेडेबल टेम्पररी कोटिंग्स भी एक उभरता हुआ समाधान हैं, जो धोने के दौरान फाइबर को सुरक्षा प्रदान करती हैं।

5. सर्कुलर फैशन और रीसाइक्लिंग

  • भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय की "Mapping of Textile Waste Value Chain in India" रिपोर्ट (2026) बताती है कि देश में सालाना लगभग 70.73 लाख टन टेक्सटाइल वेस्ट उत्पन्न होता है जिसमें से 42% प्री-कंज्यूमर (निर्माण से जुड़ा) और 58% पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट है। इसमें से 95% से अधिक प्री-कंज्यूमर वेस्ट रिकवर हो जाता है, और कुल मिलाकर 70% से ज़्यादा टेक्सटाइल वेस्ट रीसाइक्लिंग, अपसाइक्लिंग या पुनःउपयोग में वापस आ जाता है।

भारत सरकार की PM MITRA (Mega Integrated Textile Region and Apparel) योजना को अक्सर "सर्कुलर फैशन पहल" के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन असल में इसका मुख्य उद्देश्य अलग है। यह योजना 2021-22 के बजट में घोषित की गई थी और इसके तहत देश के सात राज्यों में बड़े इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क बनाए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य है निवेश आकर्षित करना, लॉजिस्टिक्स लागत घटाना, रोजगार बढ़ाना, और भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना (यानी "Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign" का 5F विज़न)। हर पार्क में सामान्य एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम जैसी टिकाऊ सुविधाएं ज़रूर शामिल हैं, लेकिन यह मूलतः औद्योगिक अवसंरचना और निवेश योजना है, न कि सीधे तौर पर रीसाइक्लिंग या सर्कुलर इकॉनमी को केंद्र में रखने वाली योजना। सही मायनों में सर्कुलर टेक्सटाइल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में योगदान ऊपर बताई गई "Mapping of Textile Waste Value Chain" रिपोर्ट और इससे जुड़ी नीतिगत सिफारिशों से अधिक जुड़ा है।

6. जागरूकता और नीति निर्माण

  • OECD जैसे संस्थान सुझाव देते हैं कि डिजाइन, उपयोग और अंतिम चरण (एंड-ऑफ-लाइफ) में माइक्रोप्लास्टिक उत्सर्जन को रोकने के लिए नीति और तकनीकी उपाय आवश्यक हैं।
  • फिलहाल वैश्विक स्तर पर माइक्रोफाइबर पर कोई व्यापक नियम नहीं हैं, इसलिए ब्रांड और सरकारों को मिलकर काम करना होगा। हालांकि फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और कैलिफोर्निया जैसे कुछ स्थानों पर वॉशिंग मशीनों में माइक्रोफाइबर फिल्टर अनिवार्य करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

घरेलू स्तर पर अपनाए जाने वाले उपायों को आजमाएं :

उपायलाभ
ठंडे पानी में धोना और कोमल चक्रकपड़ों पर तनाव कम, माइक्रोफाइबर रिलीज घटता है
कम धोना और तरल डिटर्जेंटकपड़ों की उम्र बढ़ती है, पर्यावरण पर असर कम होता है
Guppy बैग या फिल्टरमाइक्रोफाइबर पानी में नहीं जाते
प्राकृतिक कपड़े चुननासिंथेटिक की तुलना में कम प्रदूषण
टिकाऊ कपड़े और रीसाइक्लिंगवेस्ट कम होता है, सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है

कपड़ा प्रदूषण विशेषकर माइक्रोप्लास्टिक हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा है। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सही कपड़े चुनना, धोने की आदतें बदलना, और सामूहिक स्तर पर सर्कुलर फैशन व नीति सुधारों को अपनाना इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। अब समय है कि हम सब मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएं - अपने घर से शुरुआत करें और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए आगे बढ़ें।