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मानसून में हर बुखार वायरल नहीं! डेंगू-मलेरिया से लेकर टाइफाइड तक ऐसे पहचानें खतरे के संकेत

क्या आप जानते हैं कि मानसून में बुखार सिर्फ एक साधारण वायरल नहीं, बल्कि जानलेवा बीमारियों का संकेत भी हो सकता है? सही पहचान और समय पर उपाय करना आपकी सेहत को बचा सकता है — जानिए कैसे!
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 08, 2026

monsoon fever

प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

मानसून में अचानक बुखार आना आम बात हो गई है, लेकिन अक्सर इसे हल्के वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई बार यही बुखार डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड या लेप्टोस्पाइरोसिस जैसे गंभीर रोगों का संकेत होता है। समय पर सही पहचान और इलाज न मिलने पर ये जानलेवा भी हो सकते हैं। आइए समझते हैं कि मानसून बुखार को कैसे सही समय पर पहचाना जाए और इससे कैसे बचा जाए।

पहचान में क्यों होती है देरी

मानसून में बुखार के शुरुआती लक्षण - जैसे तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और भूख में कमी - कई बीमारियों में एक जैसे होते हैं, जिससे सही पहचान मुश्किल हो जाती है। उदाहरण के लिए, डेंगू में बाद में त्वचा पर दाने, प्लेटलेट्स की कमी या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखते हैं, जबकि लेप्टोस्पाइरोसिस में आंखों का लाल होना, पीलिया या पेशाब कम होना जैसे संकेत सामने आते हैं।

इसी तरह, वायरल फ्लू में खांसी, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत अधिक होती है। इसलिए शुरुआती दिनों में बिना जांच के सही निदान करना कठिन होता है।

अलग-अलग बुखार में अंतर कैसे करें

डेंगू अक्सर अचानक तेज बुखार के साथ शुरू होता है, और मांसपेशियों व जोड़ों में तेज दर्द, उल्टी या हल्का रक्तस्राव भी हो सकता है। वहीं, सामान्य वायरल बुखार धीरे-धीरे शुरू होता है, जिसमें हल्का बुखार, खांसी, जुकाम और थकान जैसे लक्षण अधिक होते हैं।

टाइफाइड में बुखार उतार-चढ़ाव वाला होता है और साथ में पेट दर्द या दस्त भी हो सकते हैं।

डॉक्टर कैसे तय करते हैं कि बीमारी क्या है

डॉक्टर सबसे पहले लक्षणों के आधार पर अनुमान लगाते हैं, लेकिन सही पहचान के लिए रक्त जांच, प्लेटलेट काउंट, टाइफाइड के लिए ब्लड कल्चर और डेंगू के लिए विशेष जांच जैसे NS1 या IgM एंटीबॉडी टेस्ट की आवश्यकता होती है। कई बार संसाधन सीमित होने पर चिकित्सक ‘सिंड्रोमिक अप्रोच’ अपनाते हैं - लक्षणों के समूह के आधार पर इलाज शुरू कर देते हैं, जैसे कि बुखार के साथ दाने और थक्के हों तो डेंगू की ओर संकेत माना जाता है।

कौन-कौन सी बीमारियां मानसून में आम हैं

नागपुर के एक अध्ययन में पाया गया कि मानसून में अचानक बुखार के 300 मरीजों में से 33% में डेंगू था, 12% में निचले श्वसन मार्ग का संक्रमण, 11.4% में पेट संबंधी संक्रमण, 10.7% में ऊपरी श्वसन संक्रमण और 7.8% में मलेरिया था। इसके अलावा, टाइफाइड, लेप्टोस्पाइरोसिस, स्क्रब टाइफस और वायरल हेपेटाइटिस जैसे रोग भी होते हैं, और कुछ मामलों में कारण पता नहीं चल पाता।

सावधानी और बचाव के उपाय

मानसून में बचाव ही सबसे असरदार तरीका है। मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी, रिपेलेंट का उपयोग करें और घर में पानी जमा न होने दें। साफ-सफाई और स्वच्छ पानी का इस्तेमाल करें ताकि टाइफाइड और लेप्टोस्पाइरोसिस जैसी बीमारियों से बचा जा सके। वायरल संक्रमणों से बचने के लिए मास्क पहनना, हाथ धोना और गीले कपड़ों से बचना जरूरी है।

घर पर क्या करें और कब डॉक्टर से मिलें

बुखार आने पर आराम करें, खूब पानी पिएं और पैरासिटामोल से बुखार कम करें। लेकिन यदि बुखार तीन दिन से अधिक रहता है, या प्लेटलेट्स कम हों, खून आए, सांस लेने में दिक्कत हो, उल्टी लगातार हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खुद से एंटीबायोटिक न लें, क्योंकि इससे बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो सकती है।

मानसून में बुखार को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। शुरुआती लक्षण एक जैसे दिखते हैं, लेकिन सही पहचान और इलाज से जान बच सकती है। इसलिए सावधानी, समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह ही सबसे भरोसेमंद उपाय हैं।