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आध्यात्मिक पर्यटन में Gen Z की दिलचस्पी: कैसे बदल रही है युवा पीढ़ी की आध्यात्मिक यात्रा की परिभाषा?

जानिए कैसे Gen Z भारत में spiritual tourism की परिभाषा बदल रही है। वाराणसी के घाटों से लेकर भजन क्लबिंग तक, जानिए युवाओं के इस अनोखे ट्रेंड और नई आध्यात्मिक यात्रा के बारे में।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 06, 2026

Gen zvs clubbing 2

Genz या मंदिर? (AI)

क्या आपने कभी सोचा है कि आध्यात्मिकता और यात्रा का एक नया चेहरा कैसा दिख सकता है? एक समय था जब तीर्थयात्रा का नाम सुनते ही आंखों के सामने बुजुर्गों की टोली, हाथ में कमंडल और केवल मोक्ष या पुण्य कमाने की इच्छा घूम जाती थी। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज भारत की युवा पीढ़ी विशेषकर 'जनरेशन Z' (लगभग 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा) धार्मिक स्थलों का रुख केवल पारंपरिक पूजा-अर्चना के लिए नहीं, बल्कि आत्म-खोज, मानसिक शांति, सांस्कृतिक अनुभव और एक नए जीवन-दृष्टिकोण के लिए कर रही है। हाल ही में सामने आए आंकड़े और शोध इस बात की गवाही देते हैं कि भारत में आध्यात्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) अब केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं रहा; यह Gen Z की जीवनशैली और उनकी आत्मिक यात्रा का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

आंकड़ों में दिखता बदलाव: Gen Z का नया रुख

आज की युवा पीढ़ी के लिए तीर्थयात्रा केवल किसी मंदिर में जाकर शीश नवा देने तक सीमित नहीं है। यह यात्रा उनके लिए मानसिक संतुलन, तनाव से मुक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव का एक जरिया है। हालिया ट्रैवल डेटा और रिपोर्ट्स इस बात की गहराई को उजागर करते हैं:

आध्यात्मिक यात्राओं में 53% से अधिक हिस्सेदारी: redBus के आंकड़ों (FY26) के अनुसार, भारत में आध्यात्मिक स्थलों की यात्राओं में 53 प्रतिशत से अधिक बुकिंग्स Gen Z और युवा वयस्कों द्वारा की जा रही हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में एक अभूतपूर्व वृद्धि दिखाता है।

कर्नाटक और तिरुपति मार्ग की लोकप्रियता: कर्नाटक के बेंगलुरु-तिरुपति मार्ग पर यह प्रवृत्ति और भी तीव्र देखी गई है। इस रूट पर 18 से 30 वर्ष के युवाओं ने आध्यात्मिक बस बुकिंग में 56 प्रतिशत हिस्सा लिया, जो राष्ट्रीय औसत से भी कहीं अधिक है।

अनुभव-आधारित मॉडल (Experience-based Tourism): KPMG और PHDCCI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आध्यात्मिक पर्यटन अब पारंपरिक 'दर्शन' से आगे बढ़कर 'अनुभवात्मक पर्यटन' (Experiential Tourism) में बदल चुका है। इसमें योग, वेलनेस, स्थानीय कला-संस्कृति और जीवनशैली से जुड़ी यात्राएं शामिल हैं।

इस बदलाव के मुख्य कारक

Gen Z का रुझान अचानक से आध्यात्मिकता की ओर क्यों बढ़ा? इसके पीछे कई सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी कारण काम कर रहे हैं:

  • डिजिटल युग और सोशल मीडिया का प्रभाव: इन्स्टाग्राम reels, यूट्यूब व्लॉग्स और Pinterest जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने दूर-दराज के मंदिरों, पहाड़ों में बसे आश्रमों और शांतिपूर्ण घाटों के सौंदर्य को युवाओं तक पहुंचाया है। मनमोहक तस्वीरें और यात्रा के अनुभव युवाओं में जिज्ञासा और कुछ नया एक्सप्लोर करने की प्रेरणा जगाते हैं।
  • सांस्कृतिक पुनर्जागरण और गर्व का भाव: अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन (जनवरी 2024) इस दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। इसने आध्यात्मिक पर्यटन को एक आधुनिक, संगठित और गर्वपूर्ण संदर्भ में स्थापित किया। युवा अब अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत से जुड़ने में गर्व महसूस करते हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य और 'डिजिटल डिटॉक्स': आज का युवा लगातार स्क्रीन, प्रतिस्पर्धी माहौल और करियर के तनाव से घिरा हुआ है। उनके लिए आध्यात्मिक स्थल किसी मोबाइल ऐप से अलग हटकर 'रियल वर्ल्ड' में मानसिक शांति (Mental Peace) और 'डिजिटल डिटॉक्स' का एक सशक्त माध्यम बन गए हैं।
  • भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव: दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के एक अध्ययन में पाया गया कि 18–35 वर्ष के युवा वाराणसी या ऋषिकेश जैसे शहरों में सिर्फ पूजा के लिए नहीं जाते। वे चांदनी रात में गंगा घाटों पर टहलना, स्थानीय व्यंजन चखना, लोक संगीत सुनना और स्थानीय कारीगरों से जुड़ना पसंद करते हैं।

'भजन क्लबिंग' और नए ट्रेंड्स: आध्यात्मिकता का आधुनिक रूप

Gen Z की सबसे खास बात यह है कि वे परंपराओं को खारिज नहीं करते, बल्कि उन्हें अपने अंदाज में नए रूप में ढाल लेते हैं। इसका सबसे अनूठा और चर्चित उदाहरण है ‘भजन क्लबिंग’ (Bhajan Clubbing)।

क्या है भजन क्लबिंग?

यह एक ऐसा अनूठा आयोजन है जहाँ पारंपरिक भजनों, मंत्रों और कव्वालियों को आधुनिक म्यूज़िक बीट्स, डीजे लाइट्स और सामूहिक ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

  • सुरक्षित और सकारात्मक माहौल: इन आयोजनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह से धूम्रपान-मुक्त और शराब-मुक्त (Substance-free) होते हैं। यहां युवा बिना किसी नशा या कृत्रिम उत्तेजना के, केवल संगीत और भक्ति की लय में थिरकते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा: यह ट्रेंड दिखाता है कि Gen Z के लिए भक्ति अब केवल शांत बैठकर माला जपने तक सीमित नहीं है; यह एक रचनात्मक उत्सव, सामूहिक आनंद और सकारात्मक ऊर्जा के आदान-प्रदान का माध्यम बन चुकी है।

विष्य की राह: पर्यटन उद्योग और परिवारों के लिए अवसर

Gen Z का यह बदलाव केवल एक अस्थाई ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह पर्यटन उद्योग और समाज के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है:

  • पर्यटन विभागों और कंपनियों के लिए: यात्रा कंपनियों, होटल इंडस्ट्री और राज्य पर्यटन बोर्ड्स को अब सिर्फ 'दर्शन पैकेज' बेचने के बजाय 'अनुभव पैकेज' (Experience Packages) डिजाइन करने होंगे। युवाओं को योग रिट्रीट, ट्रेकिंग के साथ जुड़े मंदिर, हेरिटेज वॉक और प्रामाणिक स्थानीय व्यंजनों वाले पर्यटन विकल्प अधिक आकर्षित करते हैं।
  • पारिवारिक जुड़ाव का नया जरिया: यह ट्रेंड पीढ़ियों के बीच के फासले (Generation Gap) को कम करने का एक बेहतरीन माध्यम है। माता-पिता और युवा बच्चे अब ऐसी यात्राएं चुन सकते हैं जहाँ बुजुर्गों को भक्ति और पूजा मिले, वहीं युवाओं को इतिहास, कला, शांति और साहसिक अनुभव मिले।

जनरेशन Z के लिए पवित्र स्थलों की यात्रा अब केवल एक धार्मिक दायित्व नहीं है। यह आत्म-शांति, सांस्कृतिक पहचान, मानसिक स्वास्थ्य और इस डिजिटल युग में खुद को दोबारा पाने का एक जरिया बन चुकी है। वे अपनी विरासत को खारिज करने के बजाय उसे एक नए, आधुनिक और रचनात्मक नजरिए से अपना रहे हैं। चाहे वह वाराणसी के शांत घाट हों, तिरुपति की अनुशासित तीर्थयात्रा हो, ऋषिकेश में गंगा किनारे ध्यान लगाना हो, या फिर भजन क्लबिंग में सकारात्मक ऊर्जा के साथ झूमना हो युवाओं का यह नया रुझान साबित करता है कि आध्यात्मिकता कभी पुरानी नहीं होती, वह बस हर पीढ़ी के साथ एक नया और खूबसूरत रूप ले लेती है। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि युवाओं की आत्मा की खोज है।