
Glasgow CWG 2026 India Medal Winners
क्या आप जानते हैं कि भारत की बेटियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में खेल के मैदान पर नया इतिहास रच दिया है? ग्लासगो में चल रहे इन खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए हैं। मुक्केबाजी, जूडो, भारोत्तोलन और पैरा खेलों में बेटियों ने अपनी प्रतिभा का ऐसा दम दिखाया है कि पूरा देश उन पर गर्व कर रहा है। आइए जानते हैं इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों और संघर्ष की कहानियों के बारे में।
भारतीय महिला मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले ही अपनी बेहतरीन फॉर्म का संकेत दे दिया था। जून 2026 में चेक गणराज्य के उस्ती नाद लाबेम में आयोजित ग्रैंड प्रिक्स टूर्नामेंट में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था।
इस प्रतियोगिता में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा) और प्रिया घंघास (60 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि पर्वीन हूडा (65 किग्रा) ने रजत पदक हासिल किया।
ग्लासगो में भी भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा जारी रहा। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को सेमीफाइनल में सीधे प्रवेश मिलने से उनका कम से कम कांस्य पदक पहले ही सुनिश्चित हो गया था। वहीं, 1 अगस्त 2026 को प्रीति पवार ने महिलाओं की 54 किग्रा स्पर्धा में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे का स्वर्ण पदक रहा। त्रिपुरा की इस युवा खिलाड़ी ने महिलाओं की 48 किग्रा स्पर्धा में कनाडा की हाइडी क्वाक को गोल्डन स्कोर में हराकर भारत को जूडो में ऐतिहासिक स्वर्ण दिलाया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पहला जूडो स्वर्ण पदक है।
अस्मिता डे की कहानी मेहनत और समर्पण का शानदार उदाहरण है। उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत 800 मीटर दौड़ से की थी। हालांकि, वर्ष 2015 में त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में प्रवेश के बाद प्रशिक्षकों की सलाह पर उन्होंने जूडो को अपनाया।
बेलोनिया के कोच बीना देबनाथ और बाद में माणिक लाल देब ने उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने उनका पूरा साथ दिया।
अस्मिता ने 2022 में एशियन कैडेट एवं जूनियर जूडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2023 में कुवैत एशियन ओपन में रजत पदक और जूनियर एशियन कप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2025 में कासाब्लांका अफ्रीकन ओपन में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की।
भारतीय भारोत्तोलन की स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया। उन्होंने महिलाओं की 48 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि उनकी निरंतरता, अनुभव और विश्वस्तरीय प्रदर्शन का प्रमाण है।
भारतीय महिला पैरा एथलीट शार्मिला ढांकर ने पैराशॉट पुट F57 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के खाते में एक और स्वर्ण जोड़ा। उनकी सफलता ने यह साबित किया कि भारतीय महिला खिलाड़ी हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
भारतीय महिला भारोत्तोलन टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया। ग्यानेश्वरी यादव ने 53 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता, जबकि बिंद्यारानी देवी ने 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। इन खिलाड़ियों ने भारत की पदक तालिका को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 अभी जारी हैं और भारतीय महिला खिलाड़ियों के सामने पदकों की संख्या बढ़ाने के कई अवसर बाकी हैं। मुक्केबाजी, भारोत्तोलन और अन्य स्पर्धाओं में भारत को और सफलताओं की उम्मीद है।
ग्लासगो में भारतीय बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा, मेहनत और अवसर मिलने पर वे किसी भी मंच पर इतिहास रच सकती हैं। आर्थिक कठिनाइयों, सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद इन खिलाड़ियों ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। अब चुनौती इस सफलता को और आगे बढ़ाने की है, ताकि भारतीय महिला खिलाड़ी भविष्य में भी विश्व मंच पर देश का गौरव बढ़ाती रहें।
| 🏅 पदक | 👩 खिलाड़ी |
|---|---|
| 🥇 गोल्ड | प्रीति पवार (मुक्केबाजी) |
| 🥉 पदक पक्का | लवलीना बोरगोहेन (मुक्केबाजी) |
| 🥇 गोल्ड | अस्मिता डे (जूडो) |
| 🥇 गोल्ड | मीराबाई चानू (भारोत्तोलन) |
| 🥇 गोल्ड | शार्मिला ढांकर (पैरा शॉट पुट) |
| 🥈 सिल्वर | ग्यानेश्वरी यादव (भारोत्तोलन) |
| 🥉 ब्रॉन्ज | बिंद्यारानी देवी (भारोत्तोलन) |
Updated on:
03 Aug 2026 12:35 pm
Published on:
03 Aug 2026 12:35 pm
