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क्या आपकी फिटनेस रूटीन पुरानी और बोरिंग हो चुकी है? अपनाएं दुनिया के नए ट्रेंड्स

दुनिया में तेजी से बदल रहे फिटनेस ट्रेंड्स अब भारत में भी लोकप्रिय हो रहे हैं। जानिए वियरेबल टेक्नोलॉजी, 10 मिनट के वर्कआउट, मानसिक फिटनेस और लॉन्ग-टर्म हेल्थ से जुड़े नए ट्रेंड्स, साथ ही इन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाने के आसान और वैज्ञानिक तरीके।
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 05, 2026

fitness trends in world

प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit - ChatGPT AI

दुनिया में फिटनेस के चलन तेजी से बदल रहे हैं, और भारत में भी इन नए तरीकों को अपनाना अब आवश्यक हो गया है। चाहे वह तकनीकी उपकरण हों, छोटे-छोटे व्यायाम हों या मानसिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना हो - हर उम्र और जीवनशैली के लिए कुछ न कुछ उपलब्ध है।

आइए जानते हैं, कौन से वैश्विक ट्रेंड्स हैं जो भारत में प्रभावी साबित हो सकते हैं, और उन्हें अपनाने का सबसे व्यावहारिक तरीका क्या है।

फिटनेस ट्रेंड्स को समझिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि 2022 में लगभग 31% वयस्क और 81% किशोर (11–17 वर्ष) WHO की शारीरिक गतिविधि की सिफारिशों को पूरा नहीं कर रहे थे। यह अनुपालन 2010 से लगभग 5 प्रतिशत अंक बढ़ा है, और यदि यही रफ्तार रही तो 2030 तक यह अनुपालन 35% तक पहुंच सकता है।

यह दर्शाता है कि दुनिया भर में फिटनेस की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है।

ACSM (अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन) ने 2026 के लिए सबसे बड़े फिटनेस ट्रेंड के रूप में वियरेबल टेक्नोलॉजी (जैसे फिटनेस ट्रैकर, स्मार्टवॉच) को चुना है, जो लगातार पिछले वर्षों से शीर्ष पर है। इसके अलावा, “स्नैक-साइज्ड वर्कआउट्स” यानी छोटे, हल्के लेकिन नियमित व्यायाम और “मेंटल फिटनेस” यानी मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने वाले ट्रेंड भी तेजी से उभर रहे हैं।

भारत में फिटनेस का बढ़ता बाजार

भारत में फिटनेस इंडस्ट्री का आकार 2024 में लगभग ₹16,200 करोड़ (लगभग $1.9 अरब) था, और यह 2030 तक ₹37,700 करोड़ ($4.5 अरब) तक पहुंचने का अनुमान है, जो लगभग 15% की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है। इसके साथ ही, वेलनेस मार्केट भी बढ़ रहा है - 2026 तक भारत का वेलनेस मार्केट $170 अरब से अधिक होने की उम्मीद है, जिसमें फिटनेस ट्रैकर, कैलोरी-काउंटिंग ऐप्स और स्लीप मॉनिटर शामिल हैं।

भारत में अपनाने योग्य फिटनेस ट्रेंड्स

वियरेबल टेक्नोलॉजी: फिटनेस ट्रैकर और स्मार्टवॉच अब आम हो गए हैं। ये कदम, नींद, दिल की धड़कन, कैलोरी बर्न जैसी जानकारी देते हैं और नियमितता बनाए रखने में मदद करते हैं। भारत में इनकी पहुंच बढ़ रही है, खासकर शहरी कामकाजी वयस्कों और युवा वर्ग में।

स्नैक-साइज्ड वर्कआउट्स: लंबे समय तक व्यायाम करने के बजाय छोटे-छोटे व्यायाम जैसे 5–10 मिनट के स्ट्रेच, वॉक या योग को दिन में कई बार करना आसान और टिकाऊ विकल्प है। यह विशेष रूप से कामकाजी लोगों और घर पर रहने वालों के लिए उपयोगी है।

मेंटल फिटनेस और समग्र वेलनेस: अब फिटनेस केवल शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, नींद और भावनात्मक संतुलन पर भी ध्यान बढ़ा है। बायोफीडबैक डिवाइस और माइंडफुलनेस ऐप्स इस दिशा में सहायक हैं। बता दें, भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर मेडिटेशन, योग आदि प्राचीन काल से ही अपनाए जा रहे हैं। अब अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर जोर दिया जाना चाहिए।

दीर्घकालिक स्वास्थ्य (Longevity): अब लोग केवल दिखने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम कर रहे हैं। पिलाटेस, मोबिलिटी वर्क, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसे हल्के लेकिन प्रभावी व्यायाम लोकप्रिय हो रहे हैं।

भारत में इन ट्रेंड्स को अपनाने के व्यावहारिक तरीके

  1. वियरेबल टेक्नोलॉजी का उपयोग: यदि आपके पास स्मार्टवॉच या फिटनेस बैंड है, तो इसे नियमित रूप से पहनें और कदम, नींद तथा हृदय गति पर नजर रखें। इससे आप अपनी गतिविधि का ट्रैक रख सकते हैं और उसमें सुधार कर सकते हैं।
  2. छोटे व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें: जैसे हर घंटे उठकर स्ट्रेच करें, दो मिनट पैदल चलें, या घर पर हल्का योग करें। इससे लंबे व्यायाम की बाधा कम होती है और फिटनेस नियमित बनी रहती है।
  3. मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें: दिन में कुछ समय ध्यान (माइंडफुलनेस), गहरी सांस लेने या शांति अभ्यास के लिए निकालें। यह तनाव कम करता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ाता है।
  4. दीर्घकालिक फिटनेस पर ध्यान दें: जोड़ों की सुरक्षा, संतुलन और ताकत बढ़ाने वाले व्यायाम जैसे पिलाटेस, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को शामिल करें। यह उम्र बढ़ने पर भी सक्रिय रहने में मदद करता है।
  5. फिटनेस को जीवनशैली बनाएं: परिवार के साथ वॉक करें, बच्चों के साथ खेलें, या घर के कामों में हल्की शारीरिक गतिविधि शामिल करें। इससे फिटनेस स्वाभाविक रूप से जीवन का हिस्सा बन जाती है।

डॉक्टर से कब मिलें?

यदि आपको किसी पुरानी बीमारी (जैसे हृदय रोग, मधुमेह, जोड़ों की समस्या) है, तो नए व्यायाम या वियरेबल तकनीक शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। विशेषकर यदि आप उच्च-तीव्रता व्यायाम या वजन उठाने वाले व्यायाम करना चाहते हैं।

दुनिया में फिटनेस अब केवल पसीना बहाने तक सीमित नहीं है। यह तकनीक, मानसिक संतुलन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य का संगम बन चुका है। भारत में भी वियरेबल टेक्नोलॉजी, छोटे व्यायाम, मानसिक फिटनेस और दीर्घकालिक व्यायाम को अपनाकर हम न केवल फिट रह सकते हैं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर बना सकते हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे, लेकिन निश्चित रूप से, हर उम्र और जीवनशैली के लिए संभव है।

(यह लेख चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी नई फिटनेस योजना या तकनीक को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।)