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डिग्री हाथ में, नौकरी दूर! क्या कॉलेज युवाओं को रोजगार के लिए तैयार कर पा रहे हैं?

Graduate Employability in India: भारत में डिग्री लेने वाले युवाओं के सामने आ रहा नया सवाल, डिग्री है... लेकिन नौकरी के लिए आप कितने तैयार? India Skills Report 2026 की रिपोर्ट्स क्या कहती है? जानिए डिग्री के साथ कौशल, व्यावहारिक अनुभव और डिजिटल समझ क्यों जरूरी हो चली है?
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 13, 2026

Graduate Employability in India

Graduate Employability in India: अब डिग्री अकेली काफी नहीं, आपका हुनर जानना चाहती हैं कंपनियां, आप उनके लिए कितनी तैयार? (AI Creative)

Graduate Employability in India: बारहवीं के बाद कॉलेज, फिर तीन-चार साल की पढ़ाई और आखिर में हाथ में डिग्री, युवा अक्सर मानकर चलता है कि अब नौकरी का रास्ता खुल जाएगा। लेकिन नौकरी के बाजार में पहुंचते ही आजकल एक नया सवाल सामने आता है। डिग्री है, लेकिन क्या नौकरी के लिए जरूरी कौशल भी है? India Skills Report 2026 में भारत की कुल employability 56.35% आंकी गई है। यानी आकलन में शामिल उम्मीदवारों में आधे से कुछ ज्यादा ने नौकरी के लिए जरूरी स्तर हासिल किया। लेकिन यह आंकड़ा नौकरी मिलने की दर नहीं है; यह युवाओं की नौकरी को लेकर तैयारी का आकलन है। यहीं से भारत की शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद असली सवाल शुरू होता है।

अब सवाल पूछा जा रहा है डिग्री मिल रही है, लेकिन नौकरी की तैयारी कितनी?

भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है। हर साल बड़ी संख्या में युवा स्नातक होकर नौकरी के बाजार में आते हैं। लेकिन कंपनियों की जरूरत और कॉलेजों में हासिल की गई क्षमताओं के बीच अंतर होने पर डिग्री अकेली पर्याप्त नहीं रह जाती। India Skills Report 2026 के मुताबिक ग्लोबल एम्प्लॉयबिलिटी टेस्ट में 60% से अधिक अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को रोजगार योग्य मानते हुए भारत की कुल एम्प्लॉयबिलिटी यानी रोजगार क्षमता 56.35% रही। 2025 में यही आंकड़ा 54.81% था। रिपोर्ट में 7 लाख से अधिक उम्मीदवारों का आकलन किया गया और 28 राज्यों तथा 9 केंद्रशासित प्रदेशों से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया।

लेकिन इस रिपोर्ट का सीधा अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि बाकी युवा बेरोजगार हैं। क्योंकि कोई उम्मीदवार नौकरी कर सकता है, लेकिन हो सकता है कि उसका कौशल इस खास आकलन में तय सीमा तक नहीं पहुंचा हो। इसलिए रोजगार क्षमता को और रोजगार को एक ही बात मानने की भूल न करें। फिर भी आंकड़ा एक बड़ा संकेत तो देता है, कॉलेज की डिग्री और नौकरी के लिए तैयार होने के बीच अभी भी दूरी है।

किस डिग्री के साथ कितनी नौकरी की तैयारी?

India Skills Report 2026 में अलग-अलग शैक्षणिक धाराओं की तस्वीर एक जैसी नहीं है।

  • बीई/बीटेक की एम्प्लॉयबिलिटी 70.15%
  • एमबीए की 72.76%
  • एमसीए की 68.25%
  • कॉमर्स की 62.81%
  • साइंस की 61%
  • आर्ट्स की 55.55% रही
  • आईटीआई के लिए यह 45.95%
  • पॉलिटेक्निक के लिए 32.92% दर्ज की गई।

यहां एक और दिलचस्प बदलाव दिखता है। कॉमर्स ग्रेजुएट्स की रोजगार की क्षमता 2025 के 55% से बढ़कर 62.81% हुई। रिपोर्ट इसे वित्तीय सेवाओं और फिनटेक क्षेत्र में बढ़ती मांग से जोड़ती है। वहीं बीई/बीटेक 70.15% पर मजबूत बने हुए हैं, जबकि एमबीए की एम्प्लॉयबिलिटी 2025 के 78% से घटकर 72.76% हुई।
इसका मतलब यह नहीं कि बीए की डिग्री खराब है या एमबीए का भविष्य खत्म हो गया। असल संकेत यह है कि एक ही डिग्री अब हर छात्र को समान रोजगार अवसर नहीं देती। डिग्री के साथ विशेषज्ञता और काम करने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण होती जा रही है।

कंपनियां युवा में क्या तलाश रही हैं?

Mercer | Mettl के ग्रेजुएट स्किल इंडेक्स 2025 में 2,700 से ज्यादा परिसरों और 10 लाख से अधिक छात्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार नौकरी के लिए आवेदन करने वाले भारतीय ग्रेजुएट्स में ओवरऑल एम्प्लॉयबिलिटी 42.6% थी। एआई और मशीन लर्निंग भूमिकाओं के लिए यह 46.1% रही।

रिपोर्ट में एम्प्लॉयर्स के लिए आलोचनात्मक सोच, संवाद कौशल और सीखने की क्षमता को महत्वपूर्ण बताया गया है। यानी कंपनियां केवल यह नहीं देख रहीं कि छात्र ने क्या पढ़ा है, वे यह भी देख रही हैं कि वह समस्या को कैसे समझता है अपनी बात कैसे रखता है और नई चीजें कितनी जल्दी सीख सकता है।

2026 के NIIT India Skills Gap Report में भी एआई, साइबर सुरक्षा, डिजिटल और डेटा कौशल को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण क्षमताओं में रखा गया है। यह अध्ययन 3,500 छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, भर्तीकर्ताओं, शीर्ष प्रबंधकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के सर्वे पर आधारित है।

यानी नौकरी का नया फॉर्मूला केवल डिग्री नहीं है, विषय ज्ञान के साथ आपकी डिजिटल समझ, समस्या सुलझाने की क्षमता, संवाद का तरीका और सीखते रहने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

BA, BCom या BSc वालों के लिए क्या बदला?

यह सबसे बड़ा भ्रम है। आर्ट्स पढ़ने का मतलब नौकरी के अवसर खत्म होना नहीं है। इसी तरह बीकॉम या बीएससी करने का मतलब अपने आप नौकरी मिल जाना भी नहीं है। India Skills Report 2026 में आर्ट्स की एम्प्लॉयबिलिटी 55.55%, साइंस की 61% और कॉमर्स की 62.81% रही। कॉमर्स की तेज बढ़त बताती है कि पारंपरिक डिग्री भी नए आर्थिक क्षेत्रों से जुड़कर ज्यादा उपयोगी हो सकती है। बीए के छात्र लेखन, शोध, संचार, डिजिटल मीडिया, मानव संसाधन, नीति अनुसंधान या बिक्री जैसे क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त कौशल विकसित कर सकते हैं।

बीकॉम छात्र लेखांकन की बुनियाद के साथ वित्तीय विश्लेषण, डिजिटल लेखांकन, डेटा और वित्तीय तकनीक से जुड़ी क्षमताएं जोड़ सकता है। बीएससी छात्र अपने विषय के साथ डेटा विश्लेषण, प्रयोगशाला तकनीक, कंप्यूटिंग या किसी विशेष उद्योग की जरूरत के अनुसार कौशल विकसित कर सकता है। इसलिए सवाल यह नहीं कि कौन-सी डिग्री बेकार है। सवाल यह है कि उस डिग्री को रोजगार से जोड़ने वाला कौशल आपके पास कितना है।

असली समस्या सिर्फ छात्र की नहीं है

  • अगर कोई छात्र चार साल तक परीक्षा पास करने के लिए पढ़ता रहे और उसे वास्तविक परियोजनाओं, उद्योग से जुड़ी समस्याओं, इंटर्नशिप या व्यावहारिक अनुभव का पर्याप्त अवसर न मिले, तो पूरी जिम्मेदारी छात्र पर डालना आसान लेकिन अधूरा निष्कर्ष होगा।
  • ILO की India Employment Report 2024 ने शिक्षा और रोजगार के बीच इसी मिसमेच को गंभीरता से रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षित युवाओं में भी क्वालिफिकेशन और उनके वास्तविक काम के बीच मिसमेच देखा जाता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि तकनीकी शिक्षा रोजगार की संभावना को बेहतर करती है, जबकि कई युवा अपनी योग्यता से नीचे के काम में पहुंच जाते हैं।
  • रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि ज्यादातर शिक्षित युवाओं का एक हिस्सा ऐसी नौकरियों में है जो, उनकी योग्यता से मेल नहीं खातीं। यानी समस्या केवल नौकरी है या नहीं की नहीं, बल्कि मिली नौकरी और हासिल शिक्षा के बीच कितना मेल है इसकी भी है। यही वह जगह है जहां, भारत की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार बाजार के बीच की खाई दिखाई देती है।

AI ने सवाल को और बड़ा कर दिया है

कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने इस बदलाव की गति बढ़ा दी है। लेकिन यह कहना कि AI सारी नौकरियां खत्म कर देगा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। ज्यादा सही बात यह है कि AI कई नौकरियों के काम करने के तरीके और जरूरी कौशल बदल रहा है। NIIT के 2026 के अध्ययन में AI के साथ साइबर सुरक्षा, डिजिटल और डेटा कौशल को महत्वपूर्ण भविष्य की क्षमताओं में रखा गया है।

इसका असर खास तौर पर उन युवाओं पर पड़ेगा जो, कॉलेज से निकलते समय केवल पाठ्यक्रम याद करके आते हैं, लेकिन किसी वास्तविक समस्या को हल करने, डेटा समझने, डिजिटल उपकरण इस्तेमाल करने या AI के परिणाम की जांच करने का अनुभव नहीं रखते। भविष्य में छात्र के लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा कि वह AI से उत्तर बनवा सकता है या नहीं, से ज्यादा यह समझे कि AI के दिए उत्तर को जांच सकता है या नहीं और उसका सही इस्तेमाल कर सकता है या नहीं।

कॉलेज में चार साल के बाद छात्र के पास क्या होना चाहिए?

सिर्फ अंक और डिग्री नहीं। एक छात्र के पास कम से कम ये पांच चीजें होनी चाहिए-

  1. विषय की मजबूत समझ

जिस विषय की डिग्री ली है, उसकी बुनियादी अवधारणाएं स्पष्ट हों।

  1. एक रोजगार-योग्य कौशल

जैसे डेटा विश्लेषण, डिजिटल मार्केटिंग, डिजाइन, प्रोग्रामिंग, वित्तीय विश्लेषण, शोध, लेखन या कोई तकनीकी कौशल।

  1. वास्तविक काम का अनुभव

इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट, शोध, फील्डवर्क या ऐसा पोर्टफोलियो जिसे नौकरी देने वाला देख सके।

  1. डिजिटल और AI साक्षरता

अपने क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल उपकरणों और AI की बुनियादी समझ।

  1. संवाद और समस्या-समाधान

क्योंकि नौकरी में केवल जानकारी याद रखना पर्याप्त नहीं है; उस जानकारी का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।India Skills Report 2026 में छात्रों के बीच प्रेक्टिकल एक्सपोजर की मांग भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 92.8% छात्र इंटर्नशिप्स या हैंड्स ऑन एक्सपोजर चाहते हैं, खास तौर पर कर्नाटक, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में यह मांग उल्लेखनीय रही।

यह आंकड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है, अगर छात्र खुद वास्तविक काम का अनुभव मांग रहे हैं, तो क्या कॉलेजों को इसे पढ़ाई का नियमित हिस्सा नहीं बनाना चाहिए?

तो क्या डिग्री की कीमत खत्म हो रही है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसा नहीं है कि डिग्री की महत्ता खत्म हो रही है। हां, लेकिन अकेली डिग्री की कीमत घट रही है। आज एक छात्र के सामने दो रास्ते हैं-

पहला- तीन या चार साल तक पाठ्यक्रम पूरा करना, परीक्षा देना और डिग्री लेकर नौकरी खोजने निकलना।

दूसरा- उसी डिग्री के साथ कॉलेज के दौरान कोई उपयोगी कौशल सीखना, प्रोजेक्ट बनाना, इंटर्नशिप करना, डिजिटल उपकरण समझना और अपने विषय को उद्योग की जरूरत से जोड़ना।

दूसरा रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन रोजगार बाजार में उसकी तैयारी ज्यादा दिखाई दे सकती है और शायद यही भारत की शिक्षा व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा बदलाव है।