27 जुलाई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

क्या आपका पेट सच में साफ होता है? खुद से ये 10 सवाल पूछिए और जानिए कैसी है आपकी Gut Health

Healthy Gut Signs: क्या आपका पेट सच में हेल्दी है? गैस, एसिडिटी, कब्ज या पेट फूलने जैसे संकेत आपकी आंतों के साथ ही आपकी सेहत के बारे में बहुत कुछ कहते हैं, वैज्ञानिक शोध और एक्सपर्ट्स की सलाह से जानिए Gut Health से जुड़े 10 अहम संकेत और इसे बेहतर बनाने के आसान तरीके भी।
6 min read
Google source verification

भारत

image

Sanjana Kumar

Jul 27, 2026

Healthy Gut 10 Signs

Healthy Gut 10 Signs: इन 10 सवालों से जानिए आपकी गट हेल्थ कैसी है? कब पड़ती है डॉक्टर की जरूरत? (AI Creative)

Healthy Gut Signs: 'आज पेट ठीक से साफ नहीं हुआ…' क्या आपने कभी सुबह उठकर खुद से यह बात कही है? या फिर टॉयलेट से निकलने के बाद भी लगा लगता है पेट अच्छे से साफ नहीं हुआ? अगर हां, तो ऐसा सोचने वाले आप अकेले नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में Gut Health को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया, हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टर भी इस पर पहले से कहीं ज्यादा बात कर रहे हैं। लगातार बढ़ते वैज्ञानिक शोधों, बेहतर डीएनए सिक्वेंसिंग तकनीकों के कारण Gut Health अब सिर्फ पाचन का नहीं बल्कि, पूरी सेहत की चर्चा का हिस्सा बन गया है।

लेकिन आज हम यहां आपको गट हेल्थ का कोई नुस्खा बताने नहीं, बल्कि अपने ही शरीर को समझने की आदत बनाने आए हैं, patrika.com पर वैज्ञानिकों के इन 10 सवालों से जानें आपकी Gut Health कैसी है, कैसे हो सकती है दुरुस्त?

2007 में पहली बार सामने आई गट हेल्थ की वैज्ञानिक पड़ताल

2007 में फादर ऑफ गट माइक्रोबायोम रिसर्च वैज्ञानिक डॉ. जैफरी आई गोर्डन और ह्युमन माइक्रोबायोम प्रोजेक्ट ने पहली बार दुनिया का ध्यान इस ओर खींचा कि आंतों के बैक्टीरिया मोटापा और मेटाबॉलिज्म से जुड़े हो सकते हैं। इसी रिसर्च में सामने आया कि कैसे इंसान के साथ ही उसके शरीर में रहने वाले ये सूक्ष्म जीव एक इकोसिस्टम की तरह काम करते हैं। इस नई वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक आंतें सिर्फ खाना नहीं पचातीं, बल्कि आपके शरीर की संपूर्ण सेहत से गहराई से जुड़ी हैं। ऐसी कई रिसर्च पिछले कुछ सालों में हुई हैं, जिन्होंने गट हेल्थ की चर्चा को बढ़ावा दिया और सोशल मीडिया, पॉड कास्ट से निकलकर यह आम लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा हो गई।

लेकिन पहले एक अहम सवाल…

- क्या रोज टॉयलेट चले जाना ही इस बात का सबूत है कि आपका पेट पूरी तरह साफ है?

इस पर वैज्ञानिक कहते हैं, नहीं ऐसा जरूरी नहीं है। दरअसल, आपकी आंतें हर दिन आपको कई छोटे-छोटे संकेत देती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि हम उन्हें गैस, कब्ज या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। तो आइए, कोई नुस्खा नहीं… समझिए अपने शरीर की भाषा

पहला सवाल…

Q. क्या टॉयलेट से निकलने के बाद भी लगता है कि 'अभी थोड़ा और बाकी है/पेट अच्छे से साफ नहीं होता?

-कई रिसर्च बताती हैं कि अगर ऐसा कभी-कभार होता है, तो चिंता की बात नहीं। लेकिन अगर यह रोज की कहानी है, तो इसे सामान्य मानकर टालना भी ठीक नहीं। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट बताते हैं कि बार-बार अधूरा मल त्याग महसूस होना कब्ज, पेल्विक फ्लोर की समस्या या आंतों की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। इसलिए सिर्फ रोज टॉयलेट जाना ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि कैसा महसूस हो रहा है, यह जानना भी उतना ही जरूरी है।

दूसरा सवाल…: क्या सुबह चाय पीने के बाद ही पेट साफ होता है?

- ये ज्यादतर भारतीय घरों की कहानी है। जहां बहुत से लोग कहते सुने जा सकते हैं, जब तक चाय नहीं पीता, पेट साफ नहीं होता। सच यह है कि गर्म पेय और कैफीन कुछ लोगों में आंतों की गति बढ़ा सकते हैं। लेकिन अगर आपका शरीर रोज इसी पर निर्भर हो गया है, तो अब समय है कि आप अपनी दिनचर्या और खानपान का ध्यान रखना शुरू कर दें। वैज्ञानिक इस पर सलाह देते हैं कि फाइबर, पानी और नियमित शारीरिक गतिविधियां आंतों को नेचुरली एक्टिव रखने में ज्यादा मददगार होती है।

तीसरा सवाल… : क्या आपका पेट अक्सर फूला रहता है?

मान लीजिए अगर खाना कम खाया, फिर भी पेट भारी या फूला हुआ लगता है, तो इसके पीछे सिर्फ गैस ही जिम्मेदार नहीं होती। दरअसल यहीं से शुरू होत जाती है Gut Microbiome की कहानी। वैज्ञानिकों के मुताबिक आपकी आंतों में करीब 38 ट्रिलियन सूक्ष्मजीव रहते हैं। सुनने में यह भले ही अजीब लगता है, लेकिन यही सूक्ष्मजीव खाना पचाने, कुछ विटामिन बनाने, प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत रखने और हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। लेकिन जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो पेट फूलना, गैस, कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

पांचवां सवाल…: क्या मल देखकर भी सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है?

रिसर्च और वैज्ञानिकों के साथ ही एमडी मेडिसिन डॉ. विनोद कोठारी ने भी इस सवाल का जवाब हां में दिया। वे कहते हैं कि दुनिया भर में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट Bristol Stool Chart का इस्तेमाल करते हैं। अगर मल केले जैसा मुलायम और आसानी से निकल जाए, तो इसे सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर वह बहुत सख्त है, गोलियों जैसा है या पानी जैसा है, तो यह आपकी आंतों की स्थिति के बारे में बड़ा संकेत दे सकता है। यानी यहां आपको हमेशा अलर्ट रहने की जरूरत है। अगर आप अगली बार टॉयलेट फ्लश करने से पहले स्टूल पर आपकी एक नजर डालना भी आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

छठा सवाल…: क्या आपका पेट आपके दिमाग से भी बात करता है?

सुनने में यह सवाल भले ही फिल्मी लगता है, लेकिन यह विज्ञान है। Gut-Brain Axis पर दुनिया के सबसे बड़े विशेषज्ञों में एक और UCLA के गुडमैन-लस्किन माइक्रोबायोम सेंटर के संस्थापक निदेशक एमरान ए. मेयर इसे Gut-Brain Axis कहते हैं। उनके मुताबिक हमारी आंतों में करोड़ों तंत्रिका कोशिकाओं का एक नेटवर्क होता है, जिसे कई एक्सपर्ट दूसरा दिमाग भी कहते हैं। यही वजह है कि तनाव होने पर किसी का पेट खराब हो जाता है, तो किसी को कब्ज हो जाती है।

यही नहीं कई शोध भी बताते हैं कि आंतों के सूक्ष्मजीव मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले रसायनों के निर्माण में भी भूमिका निभाते हैं। हालांकि वैज्ञानिक अभी इस क्षेत्र में लगातार शोध कर रहे हैं और हर मानसिक बीमारी का कारण सिर्फ Gut Health को नहीं मानते।

सातवां सवाल…: क्या बार-बार एंटीबायोटिक लेना आंतों को नुकसान पहुंचा सकता है?

रिसर्च में साफ तौर पर लिखा है कि जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक जान बचाती हैं। लेकिन डॉक्टर बिना जरूरत इन्हें लेने से मना करते हैं। इसका कारण है कि एंटीबायोटिक सिर्फ नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया ही नहीं, बल्कि कई लाभकारी बैक्टीरिया को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन्हें हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

आठवां सवाल… क्या सिर्फ दही खाने से Gut Health ठीक हो जाएगी?

अगर गट हेल्थ दही से ठीक होती तो यह वाकई आसान होता। लेकिन इस पर भी रिसर्च में बताया गया है कि दही में लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं, लेकिन अच्छी Gut Health सिर्फ एक चीज से नहीं बनती। अमेरिकी वैज्ञानिक और प्रोफेसर टिम स्पैक्टर के मुताबिक आपकी थाली में जितनी वैराइटी होंगी, आंतों के सूक्ष्मजीव भी उतने ही ज्यादा विविधता लिए होंगे। साबुत अनाज, दालें, मौसमी फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त पानी और नियमित व्यायाम, ये सभी मिलकर आपकी आंतों को हेल्दी बनाए रखते हैं।

नौवां सवाल…: क्या कब्ज सिर्फ फाइबर की कमी से होती है?

दरअसल फाइबर गट हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन इसे पूरी तरह से सही नहीं कहा जा सकता। कम पानी पीना, तनाव, नींद की कमी, घंटों बैठे रहना, कुछ दवाएं, थायरॉयड ये ऐसी आदतें, समस्याएं हैं जिनके कारण कब्ज होना आम है। ऐसे में इलाज शुरू करने से पहले आपको इसका कारण समझना जरूरी है।

दसवां सवाल...

कितने सवालों के जवाबों में 'हां' कहा आपने?

अगर इनमें ज्यादातर सवालों के जवाब 'हां' हैं, तो आपकी आंतें शायद सही दिशा में काम कर रही हैं। अगर 'नहीं' का नंबर ज्यादा है, तो अभी से अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना शुरू कर दीजिए।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों से रहें दूर

आज सोशल मीडिया पर हर दूसरे दिन कोई नया 'Gut Detox', 'Gut Cleanse' या '3 दिन में आंतें साफ' करने के दावे वायरल होते रहते हैं। लेकिन अब तक की वैज्ञानिक रिसर्च कुछ और कहती हैं। रिसर्च बताती हैं कि आंतों को किसी जादुई ड्रिंक की नहीं बल्कि, आपकी अच्छी आदतों की ज्यादा जरूरत है। इसलिए पर्याप्त फाइबर, संतुलित भोजन, अच्छी नींद, नियमित व्यायाम, कम तनाव और बिना जरूरत के दवाओं के सेवन से बचना जरूरी है। डॉक्टर्स और वैज्ञानिक कहते हैं कि यही वह नुस्खा है, जिस पर दुनिया भर के विशेषज्ञ सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।

इसलिए अगली बार जब आप कहें कि, 'आज पेट साफ नहीं हुआ', तो सिर्फ कब्ज के बारे में मत सोचिए। हो सकता है, आपकी आंतें आपको अपनी सेहत सुधारने का पहला संकेत दे रही हों। एक्टिव हो जाइए और उस पर काम करना शुरू कर दीजिए।