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आग, बाढ़ या चोरी से बचाना है घर, तो जरूर कराएं यह बीमा

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी मेहनत की कमाई एक पल में खो सकती है? ऐसे में घर का बीमा आपकी सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच होता है। जानिए कैसे यह आपात स्थितियों में आपके लिए जीवनरक्षक बन सकता है।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 07, 2026

Home Property Insurance

घर की संपत्ति का बीमा कैस कराएं? (फोटोः एआई)

अपने घर की संपत्ति का बीमा कराना अक्सर पीछे छूट जाता है, लेकिन जब आपात स्थिति आती है, जैसे आग, बाढ़ या चोरी, तो यह आपकी मेहनत की कमाई को बचाने का सबसे असरदार तरीका बन जाता है। चलिए समझते हैं कि यह कब और क्यों जरूरी है और इसे कैसे समझदारी से अपनाया जाए।

क्यों जरूरी है घर की संपत्ति का बीमा

भारत में प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन घरों का बीमा कवरेज 1% से भी कम है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 92–95% नुकसान का बोझ सीधे जनता की जेब पर पड़ता है। बीमा न होने पर, आग, बाढ़ या चोरी जैसी घटनाओं में घर के पुनर्निर्माण या सामान की भरपाई लाखों रुपये तक हो सकती है, जबकि प्रीमियम अपेक्षाकृत कम होता है। इसके अलावा, यदि आप किराए पर रहते हैं, तो आपको केवल अपने सामान का बीमा लेना चाहिए, क्योंकि भवन की संरचना पर आपका कोई वित्तीय अधिकार नहीं होता।

कब कराएं बीमा?

  • घर बनते समय या निर्माणाधीन अवस्था में बीमा कराना समझदारी है। चोरी, आग, बाढ़ या संरचनात्मक क्षति से सुरक्षा मिलती है।
  • घर तैयार हो जाने पर: चाहे स्वतंत्र मकान हो या फ्लैट भवन और उसमें रखे सामान दोनों का बीमा लेना चाहिए। फ्लैट मालिकों को यह भी देखना चाहिए कि आरडब्ल्यूए (रिहायशी संस्था) ने संरचनात्मक बीमा कराया है या नहीं।
  • होम लोन के साथ: कई बैंक जैसे एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बीमा करवाना अनिवार्य करते हैं, ताकि उनकी सुरक्षा बनी रहे।

बीमा चुनते समय ध्यान देने योग्य बातें

बीमा का प्रकार:

  • Standard Fire & Special Perils (SFSP): आग, बाढ़, तूफान, दंगे आदि से सुरक्षा।
  • Comprehensive/Home Shield/Bharat Griha Raksha: भवन और सामान दोनों का कवर, सामान के लिए 20% तक स्वचालित कवरेज (अधिकतम ₹10 लाख)।

बीमा राशि तय करने का तरीका:

  • भवन के लिए—पुनर्निर्माण लागत × क्षेत्रफल (रिइंस्टेटमेंट वैल्यू)।
  • सामान के लिए—वर्तमान खरीद कीमत + लगभग 10% बढ़ोतरी।
  • कीमती वस्तुओं (जैसे आभूषण, कला) के लिए—‘एग्रीड वैल्यू बेसिस’ पर मूल्यांकन प्रमाण पत्र के आधार पर तय राशि।

कवरेज विधि:

  • Market Value (MV): उम्र के अनुसार मूल्यह्रास घटाकर भुगतान।
  • Reinstatement Value (RIV): बिना मूल्यह्रास के पुनर्निर्माण लागत तक भुगतान, लेकिन मरम्मत/पुनर्निर्माण जरूरी।
  • सामान्य छूट (Exclusions): सामान्य पहन-धन, जानबूझकर नुकसान, लंबे समय तक खाली रहने, यांत्रिक खराबी आदि शामिल नहीं होते।

दस्तावेज और अवधि:

  • पहचान और पता प्रमाण (जैसे आधार, पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस)।
  • पॉलिसी अवधि 1 से 5 साल तक हो सकती है; कुछ पॉलिसियां 30 दिनों से लेकर 20 साल तक की अवधि में मिलती हैं।

अक्सर होने वाली गलतियां और उनसे बचने के उपाय

  • Underinsurance (कम बीमा राशि): कम प्रीमियम के चक्कर में कम राशि लेने से क्लेम समय पर वित्तीय नुकसान हो सकता है।
  • मूल्यांकन न करना: समय के साथ कीमतें बढ़ती हैं, जैसे सोने की कीमत...इसलिए समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन जरूरी है।
  • एजेंट पर भरोसा: केवल एजेंट की सलाह पर भरोसा न करें; पॉलिसी की शर्तें खुद पढ़ें और समझें।

बीमा करवाने का आसान तरीका

  1. अपनी जरूरत समझें, भवन, सामान या दोनों का बीमा।
  2. पुनर्निर्माण लागत और सामान की कीमत का आकलन करें।
  3. SFSP या Comprehensive जैसे विकल्पों में से चुनें।
  4. RIV विधि अपनाएं, बेहतर क्लेम के लिए।
  5. भरोसेमंद एजेंट या सीधे कंपनी से संपर्क करें, दस्तावेज तैयार रखें।
  6. पॉलिसी पढ़ें, अवधि और प्रीमियम समझें, फिर खरीदें।

आपके लिए अगला कदम

अपने घर और सामान की वर्तमान लागत का आकलन करें। फिर एक भरोसेमंद बीमा एजेंट या कंपनी से संपर्क कर, सही कवरेज और राशि तय करें। इससे आप अप्रत्याशित आपदाओं में वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

(डिस्क्लेमरः यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी निर्णय से पहले प्रमाणित बीमा सलाहकार से सलाह लेना उचित रहेगा।)