
सांकेतिक इमेज (सोर्स- ChatGpt)
भारत में अब मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) वैक्सीन 14 साल की लड़कियों को मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है। यह कदम लड़कियों की सेहत की सुरक्षा में एक बड़ा बदलाव है। इस अभियान से क्या बदलाव आएगा? किशोरियों को इस वैक्सीन से कौन‑कौन से फायदे होंगे और यह कितना जरूरी है? आइए समझते हैं।
फरवरी 2026 में भारत सरकार ने HPV वैक्सीन का राष्ट्रीय अभियान शुरू किया, जिसमें 14 साल की लड़कियों को एक खुराक मुफ्त दी जा रही है। यह अभियान सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और नियमित टीकाकरण सत्रों के माध्यम से चलाया जा रहा है। यह कदम गर्भाशय ग्रीवा (Uterine Cervix) कैंसर की रोकथाम की दिशा में एक मजबूत पहल है। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। इस पहल से इसके मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, HPV वैक्सीन बेहद सुरक्षित है। अब तक 270 मिलियन से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। इस वैक्सीन के गंभीर दुष्प्रभाव बेहद कम पाए गए हैं, जैसे कि अनाफिलेक्सिस (लगभग 1.7 प्रति मिलियन खुराक) और इंजेक्शन के बाद अस्थायी चक्कर आना। भारत में एक बहु‑केंद्रित अध्ययन (IARC‑Lancet Oncology 2023) के मुताबिक, 9 से 14 वर्ष की लड़कियों को दी गई क्वाड्रिवेलेंट (Quadrivalent) वैक्सीन (HPV- 6, 11, 16, 18) दो खुराकों में उतनी ही प्रभावी और सुरक्षित थी, जितनी कि 15 से 26 वर्ष की महिलाओं को तीन खुराकों में दी गई वैक्सीन।
एकल खुराक की प्रभावकारिता पर भारत में एक कोहोर्ट अध्ययन में पाया गया कि एक खुराक से HPV‑16 और 18 संक्रमण से 95.4% तक सुरक्षा मिलती है, जो दो या तीन खुराकों के समान है। WHO ने भी 2022 में 9–14 वर्ष की लड़कियों के लिए एक या दो खुराकों की सिफारिश की है।
WHO के अनुसार, HPV‑16 और 18 प्रकार के वायरस लगभग 70% गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। वैश्विक स्तर पर HPV वैक्सीन से न केवल टीकाकृत व्यक्तियों में, बल्कि अप्रभावित लोगों में भी संक्रमण दर में गिरावट देखी गई है। यह 'हर्ड इम्युनिटी' का संकेत है। भारत में 2009 में आंध्र प्रदेश और गुजरात में प्रारंभिक परीक्षणों के दौरान कुछ मौतें हुईं, लेकिन बाद में उन्हें वैक्सीन से असंबंधित पाया गया। इसके बाद पंजाब और सिक्किम में 2016 से सफल और सुरक्षित टीकाकरण कार्यक्रम चले।
HPV वैक्सीन मुख्य रूप से गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को रोकने में मदद करती है। 14 साल की उम्र में एक खुराक लेने से भविष्य में इस कैंसर का जोखिम काफी कम हो सकता है। यह वैक्सीन सुरक्षित है और गंभीर दुष्प्रभाव बहुत दुर्लभ हैं। फिर भी, किसी भी वैक्सीन की तरह, टीकाकरण से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर यदि कोई पुरानी बीमारी या एलर्जी हो। टीकाकरण के बाद नियमित स्क्रीनिंग (जैसे पाप स्मीयर या HPV टेस्ट) जारी रखना भी जरूरी है, क्योंकि वैक्सीन सभी प्रकार के HPV से सुरक्षा नहीं देती है।
यदि आपकी बेटी 14 साल की है, तो नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर एक खुराक HPV वैक्सीन मुफ्त में लगवा सकते हैं। टीकाकरण से पहले डॉक्टर से सलाह लें और टीकाकरण के बाद किसी भी असामान्य प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव के लिए यह एक सरल और असरदार कदम है। इस पहल से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर सुरक्षा मिलती है, बल्कि पूरे समाज में कैंसर के बोझ को कम करने में मदद मिलती है।
यह कदम लड़कियों के स्वास्थ्य में एक बड़ा बदलाव लाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह पहल स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने में भी सहायक है। सरकार और स्वास्थ्य संगठनों के बीच सहयोग से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अधिक से अधिक लड़कियों को यह वैक्सीन मिले। इस प्रकार, HPV वैक्सीन का यह राष्ट्रीय अभियान न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा में बल्कि सामाजिक जागरूकता में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
Updated on:
10 Aug 2026 07:35 pm
Published on:
10 Aug 2026 07:35 pm
