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आलू ने बदली इंसान के विकास की कहानी! एंडीज के लोगों में स्टार्च पचाने वाले जीन की बढ़ीं कॉपियां

Potato: आलू के हजारों साल पुराने आहार से एंडीज के मूल निवासियों में स्टार्च पचाने वाले AMY1 जीन की अधिक कॉपियां विकसित होने के संकेत मिले हैं। UCLA और बफ़ेलो विश्वविद्यालय के शोध से पता चलता है कि यूरोपीय संपर्क से पहले ही प्राकृतिक चयन ने इस आनुवंशिक बदलाव को प्रभावित किया था।
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भारत

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MI Zahir

Aug 10, 2026

Potato Power News

आलू: प्राचीन कंद से आधुनिक सभ्यता तक, मानव विकास की ऊर्जा और आधार। ( विजुअल: AI. )

आलू अब सिर्फ पेट भरने वाली फसल नहीं रहा। हजारों साल पहले एंडीज पर्वतमाला में इसे मुख्य भोजन के रूप में अपनाने के साथ इंसानी शरीर के विकास पर भी इसका असर पड़ा हो सकता है। नये शोध में वैज्ञानिकों को ऐसे मजबूत आनुवंशिक संकेत मिले हैं, जो बताते हैं कि आलू पर लंबे समय तक निर्भर रहने से स्टार्च पचाने की क्षमता से जुड़े जीन पर प्राकृतिक चयन हुआ है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स (UCLA) और बफ़ेलो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिल कर यह अध्ययन किया है। शोध में UCLA की साइकोलॉजी एक्सपर्ट एबिगेल बिघम, को-आथर केल्सी जोर्गेनसेन और बफ़ेलो यूनिवर्सिटी के जीवविज्ञानी ओमर गोककुमेन सहित वैज्ञानिकों ने पेरू के एंडियन मूल निवासियों के डीएनए का विश्लेषण किया। अध्ययन के निष्कर्ष 'नेचर कम्युनिकेशंस' में प्रकाशित हुए हैं।

क्या है AMY1 जीन और क्यों है महत्वपूर्ण?

मानव शरीर में स्टार्च को पचाने की प्रक्रिया मुंह से ही शुरू हो जाती है। इसमें लार में मौजूद एमाइलेज एंजाइम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एंजाइम स्टार्च को छोटे अणुओं में तोड़ने में मदद करता है। इस एंजाइम के उत्पादन से AMY1 जीन जुड़ा हुआ है। किसी व्यक्ति के जीनोम में AMY1 की जितनी अधिक प्रतियां होती हैं, आम तौर पर उसकी लार में एमाइलेज का उत्पादन भी उतना अधिक हो सकता है। माना जाता है कि इससे स्टार्च से भरपूर भोजन को पचाने में मदद मिल सकती है।

यानि कुछ लोगों में इसकी प्रतियां कम और कुछ में ज्यादा थी

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंसानों में AMY1 जीन की कॉपी संख्या पहले से अलग-अलग रही है। यानि कुछ लोगों में इसकी प्रतियां कम और कुछ में ज्यादा थी। एंडीज में आलू को प्रमुख भोजन बनाने के बाद इस मौजूदा आनुवंशिक विविधता पर प्राकृतिक चयन ने काम किया हो सकता है।

आलू बना मुख्य भोजन तो बदली चयन की दिशा

एंडीज पर्वतमाला में आलू की खेती और उसका इस्तेमाल हजारों साल पुराना है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि करीब 6,000 से 10,000 साल पहले एंडियन उच्चभूमि में आलू की खेती स्थापित होने लगी थी। आलू स्टार्च से भरपूर होता है। ऐसे वातावरण में जहां यह फसल भोजन का महत्वपूर्ण आधार बन गई, अधिक AMY1 प्रतियां रखने वाले लोगों को स्टार्च पचाने की क्षमता के कारण कुछ लाभ मिला हो सकता है।

जीवित रहने या प्रजनन संबंधित लाभ मिल सकता था

वैज्ञानिकों के मॉडल के अनुसार, लगभग 10,000 साल पहले से अधिक AMY1 कॉपी संख्या वाले लोगों को प्रत्येक पीढ़ी में करीब 1.24 प्रतिशत का जीवित रहने या प्रजनन संबंधित लाभ मिल सकता था। समय के साथ छोटी-छोटी पीढ़ीगत बढ़त का असर पूरी आबादी के आनुवंशिक स्वरूप पर पड़ सकता है। यही प्रक्रिया प्राकृतिक चयन कहलाती है।

एक जरूरी बात: आलू ने सीधे तौर पर जीन नहीं बदला

इस शोध का मतलब यह नहीं है कि आलू खाने से किसी व्यक्ति के शरीर में अचानक AMY1 जीन की नई प्रतियां बन गईं। वैज्ञानिकों का तर्क इससे अलग है। आबादी में AMY1 जीन की अलग-अलग कॉपी संख्या पहले से मौजूद थी। आलू-आधारित भोजन के लंबे दौर में अधिक कॉपियां रखने वाले लोगों को संभवतः कुछ विकासवादी फायदा मिला। उनके वंश आगे बढ़ने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक रही और कई पीढ़ियों में अधिक कॉपी संख्या आबादी में ज्यादा सामान्य होती गई। यानि आहार ने प्राकृतिक चयन की दिशा को प्रभावित किया, न कि आलू ने किसी व्यक्ति के डीएनए को सीधे तौर पर बदला।

पेरू के मूल निवासियों में औसतन 10 AMY1 कॉपियां

रिसर्चर्स ने पेरू के एंडियन क्षेत्र में रहने वाले क्वेचुआ भाषी मूल निवासियों से डीएनए के नमूने लिए। इसके बाद इन नमूनों की दुनिया की कई मानव आबादियों के हजारों जीनोमिक नमूनों वाले डेटाबेस से तुलना की गई। नतीजे खासे दिलचस्प रहे। पेरू के अध्ययन किए गए मूल निवासियों में AMY1 जीन की औसत कॉपी संख्या करीब 10 पाई गई। यह अध्ययन में शामिल अन्य 83 आबादियों की तुलना में लगभग दो से चार कॉपियां अधिक थीं। इस अंतर ने शोधकर्ताओं को यह सवाल पूछने का आधार दिया कि क्या एंडियन लोगों के लंबे समय तक स्टार्च-समृद्ध भोजन पर निर्भर रहने ने इस आनुवंशिक पैटर्न को आकार दिया।

माया आबादी से तुलना ने मजबूत किया संकेत

शोधकर्ताओं ने पेरू के एंडियन मूल निवासियों की तुलना मेक्सिको की माया आबादी से भी की। दोनों आबादियां अमेरिका के मूल निवासियों के व्यापक विकासवादी इतिहास को साझा करती हैं, लेकिन उनके पारंपरिक खाद्य वातावरण में महत्वपूर्ण अंतर रहा है। एंडीज में आलू एक प्रमुख फसल बना, जबकि माया सभ्यता के पारंपरिक भोजन में आलू की वैसी केंद्रीय भूमिका नहीं थी।

स्टार्च-समृद्ध आहार AMY1 पर प्राकृतिक चयन को प्रभावित कर सकता है

अध्ययन के अनुसार, पेरू के मूल निवासियों में AMY1 की औसत कॉपी संख्या करीब 10, जबकि माया आबादी में यह करीब 6 थी। यह अंतर उस परिकल्पना के पक्ष में जाता है कि एंडियन वातावरण में स्टार्च-समृद्ध आहार AMY1 पर प्राकृतिक चयन को प्रभावित कर सकता है।

क्या यह यूरोपीय संपर्क के बाद हुआ था? वैज्ञानिकों ने ऐसे जांचा

रिसर्च के अनुसार अमेरिका में यूरोपीय संपर्क के बाद मूल आबादी में भारी जनसंख्या गिरावट आई थी। बीमारी, अकाल, हिंसा और सामाजिक उथल-पुथल के कारण कई आबादियां तेजी से कम हुईं। इसलिए एक संभावना यह भी थी कि यूरोपीय संपर्क के बाद हुई जनसंख्या में कमी और आनुवंशिक विविधता के नुकसान ने AMY1 कॉपी संख्या के मौजूदा पैटर्न को प्रभावित किया हो।

अधिक AMY1 का प्रसार यूरोपीय लोगों के आने से हजारों साल पहले शुरू हो गया था

रिसर्चर्स ने अत्याधुनिक अल्ट्रा-लॉन्ग डीएनए सीक्वेंसिंग और तुलनात्मक आनुवंशिक डेटासेट का इस्तेमाल कर इस संभावना की जांच की। उनके विश्लेषण से संकेत मिला कि एंडीज में अधिक AMY1 कॉपी संख्या का प्रसार यूरोपीय लोगों के आने से कई हजार साल पहले शुरू हो चुका था। यही समय-संबंध इस अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है। इससे यह संभावना मजबूत होती है कि बाद की जनसंख्या गिरावट के बजाय एंडियन लोगों का पुराना आहार और उससे जुड़ा प्राकृतिक चयन इस आनुवंशिक पैटर्न के निर्माण में महत्वपूर्ण रहा।

आलू से आगे भी खुलती है मानव विकास की कहानी

UCLA की रिसर्चर्स एबिगेल बिघम के अनुसार, एंडीज मानव विकास को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां रहने वाली आबादी को सिर्फ कम ऑक्सीजन वाली ऊंचाई का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि भोजन की उपलब्धता, अत्यधिक ठंड और तेज पराबैंगनी विकिरण जैसी परिस्थितियों के साथ भी तालमेल बैठाना पड़ा।

भोजन पर भी उतना ही महत्वपूर्ण चयनात्मक दबाव हो सकता है

पहले भी एंडियन लोगों में ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन यानि हाइपोक्सिया से जुड़े आनुवंशिक अनुकूलन का अध्ययन किया गया है। नया शोध बताता है कि भोजन पर भी उतना ही महत्वपूर्ण चयनात्मक दबाव हो सकता है।

बफ़ेलो विश्वविद्यालय के ओमर गोककुमेन के अनुसार, इंसानों में AMY1 जीन की पहली डुप्लीकेशन कम से कम 8 लाख साल पहले हुई थी। यानि यह जीन परिवार आलू से कहीं पुराना है। लेकिन एंडीज में आलू-आधारित भोजन के लंबे इतिहास ने इसकी कॉपी संख्या पर प्राकृतिक चयन को प्रभावित किया हो सकता है।

आधुनिक खानपान के लिए भी अहम संकेत

यह अध्ययन सिर्फ आलू की कहानी नहीं है। यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है—क्या हमारा भोजन मानव विकास को आज भी प्रभावित कर रहा है? मनुष्य ने पिछले करीब 10,000 वर्षों में शिकार और संग्रह पर निर्भर जीवन से खेती, पशुपालन और अलग-अलग खाद्य प्रणालियों की ओर बड़ा बदलाव किया। दूध, अनाज और स्टार्च जैसे खाद्य पदार्थों के साथ अलग-अलग मानव आबादियों में आनुवंशिक अनुकूलन के उदाहरण सामने आए हैं। एंडीज का यह अध्ययन इसी तस्वीर में एक और महत्वपूर्ण उदाहरण जोड़ता है।

मानव शरीर बदलते भोजन और पर्यावरण के साथ अनुकूलन करता रहा

शोधकर्ताओं के मुताबिक, मानव शरीर सिर्फ हजारों साल पुराने शिकारी-संग्रहकर्ता जीवन के अनुरूप स्थिर नहीं है। बदलते भोजन और पर्यावरण के साथ मानव आबादियां पीढ़ियों के दौरान अनुकूलन करती रही हैं। आलू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि यह दिखाती है कि किसी एक फसल का हजारों वर्षों तक लगातार सेवन केवल संस्कृति और कृषि को नहीं, बल्कि मानव विकास की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।