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जब रेडियो से चिपककर पूरे देश ने सुना था स्कोर, क्या आप जानना चाहेंगे भारत की ‘पहली टेस्ट जीत’ की कहानी?

India first test match win 1952: सोचिए, जब क्रिकेट के मैदान पर एक पारी की जीत ने एक पूरे देश को आत्मविश्वास से भर दिया हो! 1952 में भारत की पहली टेस्ट जीत ने न केवल खेल की दुनिया को हिलाया, बल्कि गर्व की एक नई कहानी भी लिख डाली थी।
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 24, 2026

India first test match win 1952

India first test match win 1952: जब क्रिकेट स्कोर सुनने एक रेडियो और लाउड स्पीकर के साथ उमड़ा था आम भारतीय का हुजूम। (AI Creative)

India first test match win 1952: भारत के क्रिकेट इतिहास में 10 फरवरी 1952 का दिन एक मील का पत्थर था। उस दिन भारत ने चेन्नई (तब मद्रास) के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में इंग्लैंड को एक पारी और आठ रन से हराकर अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की। कप्तान विजय हजारे के नेतृत्व में यह जीत भारत के 25वें टेस्ट मैच में आई थी, और इस सफलता ने देश के क्रिकेट आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

इस ऐतिहासिक जीत में वीणू मांकड़ ने इंग्लैंड की पहली पारी में आठ विकेट और दूसरी पारी में चार विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया। साथ ही पंकज रॉय ने 111 और पॉली उमरीगर ने 130 रनों की पारी खेली, जिससे भारत को निर्णायक बढ़त मिली।

जब देश ने पहली बार खुद पर भरोसा किया

यह जीत केवल खेल की जीत नहीं थी। आजादी के बाद भारत अपनी पहचान बनाने की राह पर था और यह जीत उस आत्मविश्वास का प्रतीक थी कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर खड़ा हो सकता है।

याद रहे, भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच 25 जून 1932 को लॉर्ड्स में खेला था, लेकिन जीत के लिए देश को पूरे 20 साल और 25 टेस्ट मैचों का इंतजार करना पड़ा।

उस दौर में न आज जैसी सुविधाएं थीं, न ही प्रोफेशनल कोचिंग सेटअप। फिर भी हजारे और मांकड़ जैसे खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों में वो कर दिखाया, जिसका सपना पूरा देश देख रहा था।

जब रेडियो से कान लगाकर स्कोर सुनते थे लोग

वो एक दौर था जब न टीवी था, न इंटरनेट। लोग रेडियो से कान लगाए, गलियों और चौराहों पर इकट्ठा होकर स्कोर सुनते थे। जैसे ही मैच का नतीजा आया, देशभर में जश्न का माहौल बन गया। यह जीत सिर्फ स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की नहीं, बल्कि रेडियो से जुड़े हर आम भारतीय की जीत थी।

जानिए उस जीत को आज भी कितना महत्व?

आज, 24 अगस्त 2026 के दिन जब हम इस पल को याद करते हैं, तब यह जीत हमें यह याद दिलाती है कि किस तरह एक खेल की जीत राष्ट्रीय आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है।

उस जीत ने भविष्य के खिलाड़ियों को प्रेरित किया और भारत को एक क्रिकेट महाशक्ति बनने की राह पर अग्रसर किया। दिलचस्प बात यह है कि जहां भारत को अपनी पहली टेस्ट जीत के लिए 25 मैचों तक इंतजार करना पड़ा था, वहीं आज टीम इंडिया दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में गिनी जाती है। यह फासला बताता है कि वह पहली जीत कितनी अहम नींव थी।

यह जीत यह भी दर्शाती है कि खेल किस तरह राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। आज जब हम भारत को विश्व क्रिकेट में शीर्ष पर देखते हैं, तो कह सकते हैं कि वह जीत इसी शीर्षत्व की नींव थी।

10 फरवरी 1952 की यह जीत केवल एक क्रिकेट मैच की जीत नहीं थी, बल्कि एक नए भारत की आत्मा की जीत थी। यह सफलता राष्ट्रीय आत्मविश्वास, पहचान और खेल के माध्यम से सामाजिक एकता का प्रतीक बनी। भविष्य में भी यह घटना हमें याद दिलाती रहेगी कि खेल किस प्रकार एक राष्ट्र की दिशा बदल सकता है।

यह कहानी बताती है कि किस तरह एक खेल की जीत ने भारतीय समाज में बदलाव की राह खोल दी थी। जीत की यह प्रेरणादायक कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उस दिन थी। कम या सीमित संसाधन मायने नहीं रखते, जरूरत बड़े हौसले और मजबूत इरादों की है, जिनसे इतिहास रचा जा सकता है।