
भारत की पहली महिला टॉप गन (Photo: ChatGpt)
कभी भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान उड़ाना महिलाओं के लिए एक असंभव सपना माना जाता था। लड़ाकू विमान की कॉकपिट तक पहुंच केवल पुरुष पायलटों की दुनिया मानी जाती थी। लेकिन बिहार से निकली एक लड़की ने इस सोच को बदल दिया। यह कहानी है भावना कंठ की, जिन्हें भारत की पहली महिला 'टॉप गन' बनने का गौरव प्राप्त हुआ है।
यह उपलब्धि सिर्फ एक सैन्य सम्मान नहीं, बल्कि उस सोच पर जीत है जो मानती थी कि लड़ाकू विमान उड़ाना महिलाओं के बस की बात नहीं।
भावना कंठ का जन्म 1 दिसंबर 1992 को बिहार के दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड स्थित बाऊर गांव में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बरौनी रिफाइनरी (बेगूसराय) स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में हुई। बचपन से ही उन्हें विज्ञान और मशीनों में दिलचस्पी थी। जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, भावना आसमान में उड़ते विमानों को देखकर कल्पनाओं की उड़ान भरती थीं।
उन्होंने बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, बेंगलुरु से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने कुछ समय टीसीएस में भी काम किया, जहां उनके सामने आरामदायक कॉर्पोरेट करियर का रास्ता खुला था, लेकिन उन्होंने वर्दी पहनने का सपना चुना।
2015 में भारत सरकार ने पहली बार महिलाओं को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। 18 जून 2016 को भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह पहली महिला फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल हुईं। इन तीनों को अक्सर भारतीय वायुसेना की "फर्स्ट फाइटर ट्रायो" कहा जाता है। यह सिर्फ तीन अधिकारियों की नियुक्ति नहीं थी, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास में एक नई शुरुआत थी।
भावना कंठ को "टॉप गन" की उपाधि किसी सामान्य प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि एक बेहद विशिष्ट और कठिन उपलब्धि के लिए मिली है। 6 अगस्त 2026 को यह घोषणा हुई कि स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (TACDE) में आयोजित होने वाला अत्यंत प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स पूरा करने वाली भारतीय वायुसेना की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं।
यह कोर्स भारतीय वायुसेना में अमेरिकी नौसेना के मशहूर "टॉप गन" (Strike Fighter Tactics Instructor) कार्यक्रम के समकक्ष माना जाता है। करीब 20 हफ्तों तक चलने वाले इस कोर्स के लिए वायुसेना के लगभग एक प्रतिशत सबसे कुशल पायलटों का ही चयन किया जाता है। TACDE, जिसकी स्थापना 1971 में हुई थी, हवाई युद्ध रणनीति और नई तकनीकों के विकास के लिए वायुसेना का प्रमुख केंद्र है — यहीं पायलटों को उन्नत एयर कॉम्बैट टैक्टिक्स और मिशन प्लानिंग की ट्रेनिंग दी जाती है।
फाइटर स्ट्रीम में महिलाओं को शामिल किए जाने के ठीक दस साल बाद आई यह उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी के लिहाज से एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
भावना कंठ ने MiG-21 Bison जैसे सुपरसोनिक लड़ाकू विमान पर अपने करियर की शुरुआत की। 2019 में वे मिग-21 बाइसन पर दिन के समय युद्ध मिशन के लिए योग्य घोषित होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। बाद के वर्षों में उन्होंने अत्याधुनिक सुखोई-30 एमकेआई जैसे फ्रंटलाइन मल्टीरोल लड़ाकू विमान का संचालन भी सीखा, और हथियारों के इस्तेमाल तथा ऑपरेशनल दक्षता के उच्च मानक हासिल किए।
MiG-21 को भारतीय वायुसेना का सबसे चुनौतीपूर्ण विमान माना जाता है। तेज गति, सीमित प्रतिक्रिया समय और कठिन लैंडिंग के कारण इसे कभी-कभी "फ्लाइंग कॉफिन" जैसे विवादित उपनामों से भी जोड़ा गया। हालांकि वायुसेना का कहना है कि उचित प्रशिक्षण और रखरखाव के साथ यह एक प्रभावी लड़ाकू विमान रहा है। ऐसे विमान को उड़ाकर ऑपरेशनल योग्यता हासिल करना किसी भी पायलट के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। भावना ने यह उपलब्धि उस समय हासिल की जब दुनिया अब भी महिला फाइटर पायलटों को लेकर संदेह से भरी हुई थी।
2021 के गणतंत्र दिवस परेड में भावना कंठ लड़ाकू विमान दस्ते का हिस्सा बनने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनीं और इतिहास रच दिया।
राजपथ के ऊपर लड़ाकू विमानों की गर्जना के बीच करोड़ों भारतीयों ने पहली बार एक महिला फाइटर पायलट को इस भूमिका में देखा। यह सिर्फ सैन्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की बदलती तस्वीर का प्रतीक था।
एक फाइटर पायलट की ट्रेनिंग दुनिया की सबसे कठिन सैन्य ट्रेनिंग में गिनी जाती है।
इन पहलुओं पर भावना ने खुद को साबित किया। उन्होंने कई बार कहा है कि उन्हें कभी "महिला पायलट" की तरह नहीं, बल्कि "पायलट" की तरह देखा जाए। यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि भी है।
हर बड़े सपने के पीछे परिवार का विश्वास भी होता है। भावना के माता-पिता ने कभी यह नहीं कहा कि यह लड़कियों का क्षेत्र नहीं है। उन्होंने अपनी बेटी को वही अवसर दिए, जो किसी बेटे को मिलते। यही भरोसा उन्हें हजारों फीट ऊपर भी आत्मविश्वास देता रहा।
भावना कंठ की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। इसने देश की लाखों लड़कियों को यह संदेश दिया कि सेना, विज्ञान, अंतरिक्ष या लड़ाकू विमान - कोई भी क्षेत्र महिलाओं के लिए बंद नहीं है।
आज भारतीय वायुसेना में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। महिलाएं फाइटर पायलट, हेलीकॉप्टर पायलट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कमांडर और कई रणनीतिक भूमिकाओं में सेवाएं दे रही हैं।
जब कोई लड़ाकू विमान उड़ान भरता है, तो उसके पीछे केवल तकनीक नहीं होती। उसके पीछे माता-पिता का विश्वास, वर्षों की मेहनत, अनगिनत असफलताएं, कठोर प्रशिक्षण और देश के लिए हर समय तैयार रहने का संकल्प होता है।
कल्पना कीजिए, एक मां अपनी बेटी को हर दिन ऐसे विमान में उड़ते हुए देखती है, जहां एक छोटी-सी गलती भी जानलेवा हो सकती है। फिर भी वह मुस्कुराकर उसे विदा करती है, क्योंकि उसे पता है कि उसकी बेटी सिर्फ उसका सपना नहीं, बल्कि देश का सम्मान भी अपने साथ लेकर उड़ रही है। यही भावना कंठ की कहानी को विशेष बनाता है।
भावना कंठ की उपलब्धियों के बाद भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका को लेकर सोच में बड़ा बदलाव आया है। आज महिलाओं को स्थायी कमीशन, युद्धपोतों पर नियुक्ति, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में प्रवेश और कई नई भूमिकाओं में अवसर मिल रहे हैं। इन बदलावों के पीछे भावना जैसी अधिकारियों की सफलता भी एक मजबूत आधार बनी है।
भारतीय इतिहास में कई लोग रिकॉर्ड बनाते हैं, लेकिन कुछ लोग व्यवस्था बदल देते हैं। भावना कंठ उन चुनिंदा लोगों में हैं जिन्होंने सिर्फ एक उपलब्धि हासिल नहीं की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता खोल दिया। उनकी कहानी बताती है कि सपनों की कोई लैंगिक सीमा नहीं होती। अगर हौसला मजबूत हो, परिवार का विश्वास साथ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो बिहार के एक छोटे से गांव की एक लड़की भी आसमान की सबसे कठिन उड़ानों में अपना नाम लिख सकती है।
अब जब कोई छोटी बच्ची आसमान में उड़ते लड़ाकू विमान को देखकर कहती है, "एक दिन मैं भी इसे उड़ाऊंगी", तो उस सपने में कहीं न कहीं स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ की उड़ान जरूर शामिल होती है।
Updated on:
07 Aug 2026 02:51 pm
Published on:
07 Aug 2026 02:51 pm
