5 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

चावल निर्यात में वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रहा भारत, इंटरनेशनल राइस सम्मेलन में देश का जलवा

क्या आपने कभी सोचा है कि भारत का चावल उद्योग वैश्विक मंच पर अपनी पहचान कैसे बना रहा है? जानिए कैसे नवाचार और नीति बदलाव के जरिए भारत चावल के निर्यात में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Vinay Shakya

Aug 05, 2026

india rice export

सांकेतिक इमेज (सोर्स- ChatGpt)

भारत का चावल उद्योग हाल के वर्षों में न केवल उत्पादन में वृद्धि कर रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी ताकत और नवाचार से भी पहचान बना रहा है। हाल ही में आयोजित दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच भारत इंटरनेशनल राइस सम्मेलन (BIRC) और इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (IIRS) इस बदलाव की कहानी को दर्शाते हैं। इन सम्मेलनों ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत सिर्फ चावल का बड़ा उत्पादक नहीं, बल्कि वैश्विक चावल व्यापार का नवाचार और नेतृत्व केंद्र बनने की राह पर है। यह बदलाव आपके लिए नए अवसर, बेहतर उत्पाद और मजबूत वैश्विक कनेक्शन लेकर आ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों की भूमिका

भारत इंटरनेशनल राइस सम्मेलन (BIRC) 2025, जिसे इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने 30 से 31 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित किया था। इस सम्मेलन में देश के चावल निर्यातकों, नीति निर्माताओं, शोध संस्थानों और राज्य सरकारों ने मिलकर वैश्विक व्यापार को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए। सम्मेलन में ₹1.80 लाख करोड़ के नए चावल बाजार खोलने और ₹25,000 करोड़ के निर्यात समझौतों की उम्मीद जताई गई थी। विदेशी मंत्रियों की भागीदारी ने भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा को और मजबूती दी। इस सम्मेलन के बाद जनवरी 2026 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (IIRS) ने चावल उद्योग के नवाचार, GI टैग वाले चावल, फोर्टिफाइड राइस कर्नल (FRK) और MSME को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। यह समिट तकनीकी प्रगति, पोषण और निर्यात-उन्मुख खेती पर केंद्रित था।

भारत की वैश्विक स्थिति और निर्यात क्षमता

भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने 20.19 मिलियन मीट्रिक टन चावल निर्यात किया, जो वैश्विक व्यापार में उसकी प्रमुखता को दर्शाता है। BIRC 2026 की योजना इसे और आगे ले जाने की है- यह सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक चावल व्यापार में नवाचार, स्थिरता और मूल्य वर्धित व्यापार का केंद्र बनाना है। BIRC 2026 में लगभग 30,000 प्रतिभागियों की उम्मीद है, जिसमें 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें एक खाद्य महोत्सव भी होगा, जिसमें 5 लाख उच्च-आय वाले घरों को आमंत्रित किया जाएगा। यह सम्मेलन पिछले संस्करण से लगभग तीन गुना बड़ा होगा।

चावल उद्योग में क्या बदल रहा है?

  • नीति और नवाचार का मेल: BIRC और IIRS दोनों मंचों ने नीति निर्माताओं, शोध संस्थानों और उद्योग को एक साथ लाकर नई तकनीकों, गुणवत्ता मानकों और निर्यात रणनीतियों पर चर्चा की।
  • विविधता और मूल्य वर्धन: GI टैग वाले चावल, FRK, राइस-आधारित स्नैक्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स जैसे उत्पादों को वैश्विक मंच पर पेश किया जा रहा है।
  • MSME और स्टार्टअप को बढ़ावा: IIRS ने MSME निर्यातकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने और तकनीकी पहुंच देने पर जोर दिया।
  • वैश्विक नेटवर्किंग और व्यापार विस्तार: B2B और B2G बैठकें, तकनीकी सत्र, और विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी ने भारत को वैश्विक चावल व्यापार का केंद्र बनाने में मदद की है।

निर्यातकों और उपभोक्ताओं पर प्रभाव

चावल उद्योग की मजबूती का असर सीधे तौर पर किसानों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं पर पड़ता है। किसानों को बेहतर बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और वैश्विक बाजार की जानकारी मिल रही है, जिससे उनकी आमदनी और उत्पादकता बढ़ रही है। MSME निर्यातकों को वैश्विक बाजार से जोड़कर उन्हें नई संभावनाएं मिल रही हैं। उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता, पोषण और विविधता वाले चावल उत्पाद मिल रहे हैं। चाहे वह GI टैग वाला चावल हो या फोर्टिफाइड राइस हो।

आगामी वर्षों में भारत की भूमिका

  • BIRC 2026 और IIRS जैसे मंच भारत को वैश्विक चावल व्यापार में और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। आगामी वर्षों में क्लाइमेट-रेजिलिएंट बीज और सतत खेती पर और जोर बढ़ेगा।
  • मूल्य वर्धित उत्पादों और तकनीकी नवाचारों से निर्यात बढ़ेगा।
  • MSME और स्टार्टअप को वैश्विक बाजार में और अवसर मिलेंगे।
  • भारत की चावल नीति और वैश्विक साझेदारी और गहरी होगी।