एक्सिस बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) निवेश से जुड़ी फंडिंग की मांग में कमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट जैसे घटनाक्रमों ने उन कुछ निकट अवधि के कारकों को कमजोर किया है, जो भारतीय ब्याज दरों को बढ़ा रहे थे। हालांकि, लंबी अवधि के संरचनात्मक कारक अब भी मजबूती से बने हुए हैं।