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बारिश में बच्चों को दूध पिलाते समय न करें ये गलतियां, बढ़ सकती हैं पेट और संक्रमण की समस्याएं

मानसून में बच्चों को दूध देना सुरक्षित है, लेकिन इसके साथ कुछ जरूरी सावधानियां बरतना आवश्यक है। बिना उबाला दूध देना, लंबे समय तक बाहर रखा दूध पिलाना, गंदी बोतलों का उपयोग और खराब दूध का सेवन जैसी गलतियां संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। जानिए, बच्चों को दूध देते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 09, 2026

Monsoon Milk Safety

बच्चों को दूध देते वक्त रखें इन बातों का ध्यान। (फोटोः एआई)

बारिश का मौसम बच्चों के लिए जितना सुहावना होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। इस दौरान नमी, बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ते हैं, जिससे बच्चों में पेट संबंधी संक्रमण, उल्टी, दस्त और पाचन की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में माता-पिता अक्सर यह मान लेते हैं कि दूध पूरी तरह सुरक्षित और पौष्टिक है, लेकिन यदि इसे सही तरीके से न दिया जाए तो यही दूध परेशानी की वजह भी बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार दूध, बच्चों के लिए कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12 और अन्य जरूरी पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत है। हालांकि मानसून में दूध के भंडारण, उबालने और परोसने में की गई छोटी-छोटी गलतियां स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। यही कारण है कि बारिश के मौसम में बच्चों को दूध देते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

1. बिना उबाला या अधूरा उबला दूध देना

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे या ठीक से न उबाले गए दूध में हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। मानसून में यह जोखिम और बढ़ जाता है। इसलिए बच्चों को दूध देने से पहले उसे अच्छी तरह उबालना जरूरी है। यदि पैकेट वाला दूध भी है तो उसे निर्देशानुसार गर्म करना बेहतर माना जाता है।

2. लंबे समय तक बाहर रखा दूध पिलाना

बारिश के मौसम में तापमान और नमी बैक्टीरिया की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं। कई बार दूध को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ दिया जाता है और बाद में बच्चों को पिला दिया जाता है। यह आदत संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दूध को लंबे समय तक खुला न छोड़ें और जरूरत पड़ने पर रेफ्रिजरेटर में सुरक्षित रखें।

3. बार-बार गर्म किया हुआ दूध देना

कुछ घरों में एक ही दूध को कई बार गर्म करने की आदत होती है। इससे दूध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उसमें बैक्टीरिया बढ़ने का जोखिम भी बढ़ सकता है। बच्चों को हमेशा ताजा और सही तापमान पर तैयार किया गया दूध देना बेहतर माना जाता है।

4. गंदे बर्तन या बोतल का उपयोग

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि दूध से जुड़ी बोतलें, निप्पल और बर्तन पूरी तरह साफ होने चाहिए। यदि सफाई का ध्यान न रखा जाए तो बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। छोटे बच्चों में यह संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए हर उपयोग के बाद बोतल और बर्तनों को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है।

5. दूध के साथ गलत चीजें मिलाना

कई बार बच्चों को स्वाद बढ़ाने के लिए दूध में अत्यधिक चीनी, कृत्रिम फ्लेवर या बाजार में मिलने वाले मीठे मिश्रण मिला दिए जाते हैं। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, इससे दूध का पोषण संतुलन प्रभावित हो सकता है। बच्चों को यथासंभव प्राकृतिक और संतुलित रूप में दूध देना बेहतर होता है।

6. खराब या एक्सपायर उत्पाद का उपयोग

दूध या उससे बने उत्पादों की एक्सपायरी डेट जांचना बेहद जरूरी है। मानसून में खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो सकते हैं। यदि दूध की गंध, रंग या स्वाद में बदलाव महसूस हो, तो उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

7. बच्चे की शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज करना

हर बच्चा अलग होता है। कुछ बच्चों को लैक्टोज असहिष्णुता (Lactose Intolerance), एलर्जी या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यदि दूध पीने के बाद बार-बार पेट दर्द, गैस, दस्त या उल्टी की शिकायत हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ बच्चे के लिए वैकल्पिक आहार की सलाह दे सकते हैं।

मानसून में दूध पिलाने का सही तरीका

विशेषज्ञों के अनुसार दूध हमेशा ताजा, स्वच्छ और सुरक्षित तरीके से तैयार किया जाना चाहिए। बच्चों को गुनगुना दूध देना अधिक आरामदायक माना जाता है। साथ ही दूध के साथ संतुलित आहार, फल और अन्य पोषक तत्व भी शामिल किए जाने चाहिए, ताकि बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

क्या दूध बंद कर देना चाहिए?

इस सवाल का जवाब है नहीं। अधिकांश बच्चों के लिए दूध जरूरी पोषण का स्रोत है। मानसून में समस्या दूध नहीं, बल्कि उसके उपयोग और रखरखाव में की गई गलतियां होती हैं। यदि स्वच्छता, सही भंडारण और उचित तैयारी का ध्यान रखा जाए तो दूध बच्चों के लिए सुरक्षित और लाभकारी बना रहता है।