
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT
पुरानी दिल्ली की गलियों में छुपा है स्वाद का शहर। जिसकी कहानियां सुनते ही एक रहस्यमयी और स्वाद भरी दुनिया सामने आ जाती है। अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं और स्वाद के सफर पर जाने की सोच रहे हैं तो चलिए एक यात्रा पर निकलते हैं-
पुरानी दिल्ली, खासकर चांदनी चौक और आसपास की गलियां, सदियों से स्वाद और व्यापार का केंद्र रही हैं। यहां के बाजारों में मसालों की खुशबू, मिठाइयों की मिठास और पराठों की खुशबू हर कदम पर मिलती है।
खारी बावली, एशिया का सबसे बड़ा मसाला थोक बाजार, 17वीं सदी से मसालों, सूखे मेवों और चाय के लिए जाना जाता है।
चांदनी चौक में परांठे वाली गली 150 साल से भी पुरानी है- यहां के परांठे घी में तले जाते हैं और पारंपरिक स्टफिंग जैसे आलू, पनीर, दाल से लेकर सूखे मेवे और रबड़ी तक मिलते हैं।
साथ ही, नत्राज दही भल्ला (1940 से) और ओल्ड फेमस जलेबी वाला (1884 से) जैसे प्रतिष्ठित स्टॉल आज भी अपनी विरासत बनाए हुए हैं।
पुरानी दिल्ली के कई बाजारों में शाम या रात के समय एक अलग, रहस्यमयी माहौल जरूर होता है - खासकर जब रोशनी कम हो और गलियां सुनसान लगने लगें। पर खाने की महक के आगे ये सबकुछ दिखता नहीं है।
शाम होते ही चांदनी चौक की गलियां कुछ शांत हो जाती हैं, लेकिन कुछ हिस्सों में जैसे जामा मस्जिद के पास की गलियां, अल जवाहर जैसे कबाब वाले स्टॉल्स के साथ जीवंत रहती हैं।
खरी बावली के आसपास की गलियों में सुबह से दोपहर तक मसालों की खुशबू और हलचल रहती है। यहां का माहौल दिन में जीवंत और रात में शांत हो सकता है।
यहां कुछ सुझाव हैं, जो आपको पुरानी दिल्ली की रहस्यमयी गलियों और स्वादों की खोज में मदद करेंगे:
पुरानी दिल्ली की गलियों में शाम और रात के समय जो माहौल बनता है - वह एक अलग, रहस्यमयी अनुभव जरूर देता है। यह अनुभव स्वाद, इतिहास और रहस्य का संगम है। अगर आप पुरानी दिल्ली की गलियों में चलें, सही समय और साथी के साथ, तो यह यात्रा सिर्फ खाने की नहीं - एक यादगार कहानी बन जाएगी।
Updated on:
28 Jul 2026 06:07 pm
Published on:
28 Jul 2026 06:07 pm
