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Parenting Tips: गुस्से में भी बच्चों से न कहें ये 3 बातें, कम हो सकता है उनका आत्मविश्वास और भरोसा

क्या आप जानते हैं कि गुस्से में कही गई आपकी एक छोटी सी बात आपके बच्चे के आत्मविश्वास को चुराने का काम कर सकती है? आइए, जानें वो तीन वाक्य जो कभी नहीं कहने चाहिए और क्या कहना बेहतर रहेगा!
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Adarsh Thakur

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Updated: 2 Nov 2026, 5:34 PM IST

Parent Child Bonding Tips

सांकेतिक इमेजः Gemini

बच्चों की परवरिश में प्यार और अनुशासन दोनों जरूरी हैं। लेकिन कई बार बच्चे की गलती, जिद या खराब व्यवहार देखकर माता-पिता अपना आपा खो देते हैं। गुस्से में वे ऐसी बातें कह जाते हैं, जिनका बच्चे के मन पर गहरा असर पड़ सकता है। माता-पिता कुछ देर बाद अपनी बात भूल सकते हैं, लेकिन बच्चा उन शब्दों को लंबे समय तक याद रख सकता है।

बच्चों को गलती का अहसास कराना जरूरी है, लेकिन इसके लिए उनके व्यक्तित्व, अस्तित्व या भावनाओं को ठेस पहुंचाना सही तरीका नहीं है। आइए जानते हैं ऐसी 3 बातें, जिन्हें माता-पिता को गुस्से में भी बच्चों से कहने से बचना चाहिए।

1. तुमसे जिंदगी में कुछ नहीं हो सकता

बच्चे से पढ़ाई, खेल या किसी दूसरे काम में गलती होने पर कई माता-पिता कह देते हैं कि तुमसे कुछ नहीं होगा। इस तरह की बात बच्चे को यह महसूस करा सकती है कि वह किसी काम के लायक नहीं है। धीरे-धीरे उसके मन में खुद को लेकर नकारात्मक सोच बन सकती है।

ऐसे शब्द बच्चे का आत्मविश्वास कम कर सकते हैं। वह नई चीजें सीखने या किसी मुश्किल काम को दोबारा करने से भी डर सकता है।

इसके बजाय क्या कहें: बच्चे को उसकी गलती समझाएं। उससे कहें कि इस बार काम सही नहीं हुआ, लेकिन अभ्यास और मेहनत से वह अगली बार बेहतर कर सकता है। इससे बच्चे को अपनी गलती सुधारने और फिर कोशिश करने का मौका मिलेगा।

2. काश तुम मेरे बच्चे न होते

गुस्से में बच्चे से ऐसा कहना बेहद तकलीफदेह हो सकता है। माता-पिता बच्चे के लिए सुरक्षा और भावनात्मक सहारे का बड़ा आधार होते हैं। जब वही उससे उसके जन्म या अस्तित्व को लेकर नकारात्मक बात कहते हैं, तो बच्चे को लग सकता है कि वह अपने परिवार पर बोझ है या माता-पिता उसे नहीं चाहते।

इससे बच्चे के मन में असुरक्षा और अकेलेपन की भावना पैदा हो सकती है। वह माता-पिता से अपनी परेशानी साझा करने में भी हिचकिचा सकता है।

इसके बजाय क्या कहें: अगर बच्चे ने कोई गलती की है, तो उसके व्यवहार पर बात करें। उसे बताएं कि उसका यह काम गलत था, लेकिन आप उससे प्यार करते हैं और चाहते हैं कि वह अपनी गलती सुधारे। बच्चे को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि गलती करने के बावजूद परिवार में उसकी जगह सुरक्षित है।

3. मुझे तुम पर बिल्कुल भरोसा नहीं है

बच्चे से बार-बार यह कहना कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता, उसके आत्मविश्वास और माता-पिता के साथ रिश्ते को प्रभावित कर सकता है। बच्चा सोच सकता है कि वह चाहे जितनी कोशिश कर ले, माता-पिता उस पर विश्वास नहीं करेंगे।

ऐसी स्थिति में वह अपनी गलतियां छिपाने लग सकता है। अपनी परेशानी या मन की बात बताने से भी बच सकता है। इससे माता-पिता और बच्चे के बीच बातचीत कम हो सकती है।

इसके बजाय क्या कहें: बच्चे के व्यवहार और भरोसे को अलग-अलग समझें। अगर उसने कोई वादा पूरा नहीं किया या गलत बात कही है, तो उसे बताएं कि इस व्यवहार से आपका भरोसा प्रभावित हुआ है। साथ ही, यह भी समझाएं कि जिम्मेदारी से काम करके वह दोबारा विश्वास हासिल कर सकता है।

बच्चे को डांटने से पहले माता-पिता अपनाएं ये 5 तरीके

1. गुस्सा आने पर कुछ देर रुकें: बच्चे की गलती देखकर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ देर शांत हो जाएं। जरूरत हो तो बातचीत थोड़ी देर के लिए रोक दें।

2. गलती पर बात करें, बच्चे पर नहीं: तुम हमेशा गलत करते हो या तुममें कोई सुधार नहीं हो सकता जैसे वाक्यों से बचें। इसके बजाय बताएं कि बच्चे का कौन सा व्यवहार गलत था।

3. बच्चे की बात भी सुनें: कई बार बच्चे के व्यवहार के पीछे कोई परेशानी, डर या भावनात्मक कारण हो सकता है। उसे अपनी बात कहने का पूरा मौका दें।

4. तुलना करने से बचें: बच्चे की तुलना भाई-बहन, दोस्त या किसी दूसरे बच्चे से न करें। हर बच्चे की सीखने और समझने की गति अलग होती है।

5. गलती होने पर माफी मांगें: अगर गुस्से में आप बच्चे को गलत बात कह गए हैं, तो उससे माफी मांगने में संकोच न करें। इससे बच्चा भी अपनी गलती स्वीकार करना सीखता है।

अनुशासन और अपमान में समझें अंतर

बच्चों को अनुशासन सिखाने का मतलब उन्हें डराना या उनकी भावनाओं को नजरअंदाज करना नहीं है। माता-पिता को गलत व्यवहार पर स्पष्ट सीमाएं तय करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उचित परिणाम भी समझाने चाहिए। लेकिन बच्चे को अपमानित करना, उसके व्यक्तित्व पर हमला करना या उसके अस्तित्व को लेकर नकारात्मक बातें कहना सही तरीका नहीं है।

बच्चों को यह समझ आना चाहिए कि उनका कोई व्यवहार गलत हो सकता है, लेकिन इससे वे खुद बुरे या नाकाबिल नहीं हो जाते। प्यार, स्पष्ट बातचीत और सकारात्मक अनुशासन से बच्चे को अपनी गलती सुधारने का बेहतर अवसर मिलता है।