
PM Kisan Beneficiary List Status
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी PM-KISAN देश की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाओं में शामिल है। फरवरी 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में पहुंचती है।
योजना शुरू होने के बाद करोड़ों किसानों को इसका लाभ मिला है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक बदलाव खास तौर पर चर्चा में रहा है। लाभार्थियों की संख्या कुछ किस्तों में 10 करोड़ से अधिक से घटकर 9 करोड़ के आसपास पहुंच गई।
इसके बाद सवाल उठता है कि आखिर कितने किसानों के नाम PM-KISAN की सूची से हटे? क्या सरकार ने फर्जी लाभार्थियों को बाहर किया या e-KYC और जमीन के रिकॉर्ड की वजह से असली किसान भी भुगतान से वंचित हुए?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लाभार्थियों की संख्या में कमी को सीधे 'इतने किसानों के नाम काट दिए गए' कहना सही नहीं है। अलग-अलग किस्तों में नए किसान जुड़ते हैं, कुछ किसानों की पात्रता खत्म होती है और कुछ के रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा नहीं होने पर भुगतान रुक जाता है।
PM-KISAN की शुरुआती वर्षों की कई किस्तों में 10 करोड़ से अधिक किसान लाभार्थी रहे। जनवरी 2022 में जारी 10वीं किस्त में भी 10 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों को भुगतान किया गया था।
इसके बाद संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। फरवरी 2025 में 19वीं किस्त के समय भी 10 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला था। लेकिन नवंबर 2025 में 21वीं किस्त में यह संख्या करीब 9.35 करोड़ और मार्च 2026 की 22वीं किस्त में करीब 9.32 करोड़ रही।
फिर जून 2026 में जारी 23वीं किस्त में 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को 18,880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई। यानी लाभार्थियों की संख्या दोबारा बढ़ी।
इसलिए इसे 'एक करोड़ किसानों के नाम काट दिए गए' कहना सही तस्वीर नहीं देता। असल में यह सत्यापन, पात्रता, रिकॉर्ड सुधार और नए लाभार्थियों के जुड़ने की लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
PM-KISAN में e-KYC को अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का पैसा सही और वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचे। e-KYC के जरिए आधार आधारित पहचान की पुष्टि होती है। इससे मृत व्यक्ति के नाम पर जारी भुगतान, गलत पहचान, दोहरे रिकॉर्ड और दूसरे संदिग्ध मामलों की पहचान करने में मदद मिलती है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है। e-KYC लंबित होने का मतलब यह नहीं है कि किसान फर्जी है।
कई वास्तविक किसानों की e-KYC मोबाइल नंबर, आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक या दूसरी तकनीकी वजहों से लंबित रह सकती है। ऐसे मामलों में किसान पात्र होने के बावजूद उसकी किस्त रुक सकती है। यानी e-KYC एक सत्यापन की शर्त है, फर्जी किसान होने का प्रमाण नहीं।
PM-KISAN की पात्रता कृषि योग्य जमीन के स्वामित्व से जुड़ी है। इसलिए सरकार ने लाभार्थियों के रिकॉर्ड को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने और सत्यापित करने पर जोर दिया है।
अगर किसान के नाम जमीन का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का मालिकाना बदल चुका है, तो PM-KISAN का भुगतान प्रभावित हो सकता है।
यहीं से कई तरह की गड़बड़ियां सामने आती हैं। मसलन -
हालांकि जमीन के रिकॉर्ड में नाम नहीं होने का मतलब हर बार फर्जीवाड़ा नहीं होता। भारत के कई राज्यों में भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने में समय लगता है। ऐसे में वास्तविक किसान भी केवल रिकॉर्ड अपडेट न होने की वजह से परेशानी में पड़ सकता है।
PM-KISAN की रकम DBT के जरिए बैंक खाते में भेजी जाती है। इसलिए बैंक खाते और आधार से जुड़ी जानकारी भी सही होना जरूरी है। अगर आधार बैंक खाते से लिंक नहीं है, बैंक खाते की जानकारी गलत है या भुगतान संबंधी कोई तकनीकी समस्या है, तो किसान की किस्त अटक सकती है। इसलिए किस्त न मिलना और लाभार्थी सूची से नाम कटना एक ही बात नहीं है।
किसी किसान का नाम योजना में मौजूद हो सकता है, लेकिन e-KYC, बैंक या भूमि रिकॉर्ड की समस्या के कारण उस समय भुगतान नहीं हुआ हो।
PM-KISAN में शुरुआत से ही फर्जी और अपात्र लाभार्थियों की पहचान बड़ी चुनौती रही है। राज्यों में हुए ऑडिट के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। मसलन, CAG की बिहार से संबंधित रिपोर्ट में कुछ नमूना मामलों में ऐसे लाभार्थी पाए गए जिनके नाम जमीन नहीं थी, फिर भी उन्हें PM-KISAN का भुगतान किया गया। रिपोर्ट में नाबालिग लाभार्थियों को भुगतान के मामले भी सामने आए।
असम की CAG रिपोर्ट में भी कुछ मामलों में लाभार्थियों के नाम जमीन नहीं होने, एक ही भूमि दस्तावेज पर कई लाभार्थियों को भुगतान और गलत पंजीकरण से जुड़े मामले पाए गए।
लेकिन इन रिपोर्टों को पूरे देश के फर्जी लाभार्थियों की संख्या नहीं माना जा सकता। ये विशिष्ट राज्यों और ऑडिट के नमूनों पर आधारित निष्कर्ष हैं। इसलिए अगर कोई आंकड़ा किसी राज्य की CAG रिपोर्ट से मिला है तो उसे पूरे देश का आंकड़ा बताना गलत होगा।
PM-KISAN में सिर्फ फर्जी लाभार्थियों का ही सत्यापन नहीं होता। योजना में कुछ श्रेणियों को पहले से ही बाहर रखा गया है। इनमें कुछ आयकरदाता, कुछ सरकारी कर्मचारी और कुछ अन्य निषिद्ध श्रेणियां शामिल हैं। इसके अलावा किसान की मृत्यु, जमीन का हस्तांतरण या पात्रता में बदलाव होने पर भी लाभ बंद हो सकता है। यानी किसी किसान का नाम सूची से हटने के पीछे कई कारण हो सकते हैं-
e-KYC पूरा नहीं होना, भूमि रिकॉर्ड सत्यापित न होना, आधार-बैंक लिंकिंग की समस्या, किसान की मृत्यु, जमीन का स्वामित्व बदलना या योजना की किसी अपात्र श्रेणी में आ जाना। इसलिए हर हटाए गए लाभार्थी को फर्जी कहना सही नहीं होगा।
PM-KISAN में एक तरफ अपात्र लाभार्थियों की पहचान की जा रही है, तो दूसरी तरफ नए पात्र किसानों को जोड़ा भी जा रहा है।
सरकार ने 2023-24 में saturation drive चलाकर बड़ी संख्या में नए पात्र किसानों को योजना से जोड़ा था। इसके बाद भी पात्र किसानों को जोड़ने और लंबित आवेदन निपटाने की प्रक्रिया जारी रही। यही वजह है कि अलग-अलग किस्तों में लाभार्थियों की संख्या बदलती रहती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार संख्या घटने पर उतने ही किसान हमेशा के लिए योजना से बाहर हो गए।
अगर किसी किसान को PM-KISAN की किस्त नहीं मिली है तो उसे सबसे पहले अपना e-KYC स्टेटस, भूमि रिकॉर्ड, आधार-बैंक लिंकिंग और लाभार्थी स्टेटस जांचना चाहिए।
PM-KISAN के आधिकारिक पोर्टल पर किसान अपनी स्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी देख सकता है। अगर जमीन का रिकॉर्ड गलत है तो राज्य के संबंधित राजस्व या कृषि विभाग से रिकॉर्ड ठीक कराया जा सकता है। अगर समस्या e-KYC की है तो उसे पूरा करने के बाद रिकॉर्ड दोबारा सत्यापित कराया जा सकता है।
PM-KISAN के आंकड़ों को देखने का सबसे सही तरीका यही है कि लाभार्थियों की संख्या में आई कमी को सीधे नाम काटे जाने की संख्या न माना जाए। हां, सत्यापन के दौरान अपात्र और संदिग्ध लाभार्थियों को हटाया गया है। लेकिन साथ ही कई वास्तविक किसानों की किस्तें भी रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं के कारण रुकी हो सकती हैं और नए पात्र किसान लगातार योजना में जोड़े भी जा रहे हैं।
जून 2026 की 23वीं किस्त में 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को लाभ मिला और योजना शुरू होने के बाद कुल वितरण 4.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
इसलिए PM-KISAN की अगली बड़ी चुनौती केवल फर्जी लाभार्थियों को हटाना नहीं है। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि सत्यापन की प्रक्रिया में कोई पात्र किसान सिर्फ e-KYC, जमीन के पुराने रिकॉर्ड या बैंक से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण सहायता से वंचित न रह जाए।
क्योंकि योजना की सफलता इस बात से नहीं मापी जाएगी कि कितने नाम सूची से हटाए गए, बल्कि इससे कि पात्र किसान तक 6,000 रुपये की मदद बिना किसी रिकॉर्ड या तकनीकी अड़चन के समय पर पहुंची या नहीं।
Updated on:
16 Aug 2026 12:43 pm
Published on:
16 Aug 2026 12:43 pm
