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राजस्थान के 5 पारंपरिक नाश्ते जो स्वाद के साथ बढ़ाते हैं सेहत, जानिए उनके फायदे

क्या आप जानते हैं कि एक साधारण नाश्ता आपकी सेहत को एक नई दिशा दे सकता है? राजस्थान के पारंपरिक नाश्ते का जादू जानकर, आप स्वाद बढ़ाने के साथ ही अपने दिन की शुरुआत भी ऊर्जा से भरपूर कर सकते हैं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 09, 2026

Rajasthani Healthy Breakfast

राजस्थान के नाश्ते से सुधारें सेहत। (फोटोः एआई)

सुबह की शुरुआत स्वाद और सेहत दोनों से भरपूर हो, यह हर परिवार की चाहत होती है। राजस्थान की पारंपरिक रसोई में ऐसे कई नाश्ते हैं जो स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर हैं। चलिए, जानते हैं कुछ नए, लेकिन पारंपरिक राजस्थानी तरीके जो आपके नाश्ते को और भी पौष्टिक बना सकते हैं।

Raab और Ghaat: पोषण से भरपूर पारंपरिक पेय

राजस्थान में Raab एक पोषक पेय है, जिसे बाजरा, ज्वार या मकई के आटे को छाछ (मट्ठा) में पकाकर बनाया जाता है। यह हल्का, आसानी से पचने वाला और ऊर्जा से भरपूर होता है। Ghaat भी इसी तरह का एक दलिया जैसा व्यंजन है, जो अनाजों को उबालकर तैयार होता है और सुबह के लिए एक हल्का लेकिन संतुलित विकल्प है। ये दोनों विकल्प खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए उपयुक्त हैं, क्योंकि ये आसानी से पचते हैं और शरीर को ऊर्जा देते हैं।

बाजरे की खिचड़ी: गर्माहट और ताकत का संगम

बाजरा खिचड़ी, जो बाजरे और मूंग दाल को मिलाकर बनाई जाती है, राजस्थान में सर्दियों में खासकर लोकप्रिय है। यह फाइबर, प्रोटीन और खनिजों से भरपूर होती है और ठंडे मौसम में शरीर को गर्माहट और ताकत दोनों देती है। घर पर इसे गीले दही या घी के साथ परोसने से स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं।

बेसन चीला: प्रोटीन से भरपूर और जल्दी बनने वाला

बेसन चीला, जिसे राजस्थानी बेसन चिल्ला भी कहते हैं, एक प्रोटीन युक्त, हल्का और जल्दी बनने वाला विकल्प है। इसमें बेसन के साथ सब्जियां और मसाले मिलाकर स्वाद और पोषण दोनों बढ़ाए जा सकते हैं। यह व्यस्त सुबहों में एक संतुलित और ऊर्जा देने वाला नाश्ता साबित होता है।

मिलेट आधारित व्यंजन: रागी, ज्वार और बाजरा

राजस्थानी रसोई में रागी, ज्वार और बाजरा जैसे मिलेट्स का उपयोग पारंपरिक रूप से होता आया है। रागी में कैल्शियम और आयरन की मात्रा अधिक होती है, जो हड्डियों और रक्त स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। ज्वार और बाजरा से बने व्यंजन जैसे रोटियां या खिचड़ी, ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कम और फाइबर में अधिक होते हैं, जिससे रक्त शर्करा नियंत्रित रहती है और पेट लंबे समय तक भरा रहता है।

सब्जियों और मूंगफली के साथ पोहा

पोहा, जिसे चिवड़ा या अवल कहा जाता है, एक हल्का और जल्दी पचने वाला विकल्प है। इसमें सब्जियां और मूंगफली मिलाकर इसे प्रोटीन, फाइबर और आयरन से भरपूर बनाया जा सकता है। नींबू का रस मिलाने से इसमें मौजूद आयरन का अवशोषण बेहतर होता है।

तालिका से समझिएः

व्यंजनमुख्य सामग्रीपोषण लाभ
Raab / Ghaatबाजरा/ज्वार/मकई + छाछहल्का, ऊर्जा देने वाला, आसानी से पचने वाला
बाजरा खिचड़ीबाजरा + मूंग दालफाइबर, प्रोटीन, खनिज, गर्माहट
बेसन चीलाबेसन + सब्जियांप्रोटीन, फाइबर, जल्दी बनने वाला
मिलेट रोटियां/रागी व्यंजनरागी/ज्वार/बाजराकैल्शियम, आयरन, फाइबर, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स
पोहा सब्जियां + मूंगफलीपोहा + सब्जियां + मूंगफलीकार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, आयरन

उम्र और जीवनशैली के अनुसार सुझाव

बच्चों और बुजुर्गों के लिए Raab या Ghaat जैसे हल्के और आसानी से पचने वाले विकल्प बेहतर हैं। वर्किंग वयस्कों के लिए बेसन चीला या पोहा जैसे जल्दी बनने वाले और संतुलित विकल्प उपयुक्त हैं। सर्दियों में बाजरा खिचड़ी गर्माहट और ऊर्जा दोनों देती है, जबकि मिलेट आधारित रोटियां पूरे परिवार के लिए दिनभर की ऊर्जा का आधार बन सकती हैं।

आपके लिए अगला कदम

अपने नाश्ते में धीरे-धीरे इन पारंपरिक विकल्पों को शामिल करें। शुरुआत में सप्ताह में दो-तीन बार से शुरू करें और देखें कि कौन सा व्यंजन आपके परिवार को सबसे अधिक पसंद आता है। इससे स्वाद भी बना रहेगा और सेहत भी।

(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले कृपया योग्य चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लें।)