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डिग्री बनाम स्किल्स: क्या पारंपरिक उच्च शिक्षा का मॉडल पुराना हो चुका है?

देश में हर साल लाखों इंजीनियर और अन्य विषयों में ग्रेजुएट कॉलेजों से निकलते हैं। हालांकि, कॉलेजों से उच्च शिक्षा पाकर निकलने वाले युवाओं और रोजगार के बीच बड़ी खाई बन गई है। ऐसी स्थिति में मुख्य सवाल है कि क्या पारंपरिक उच्च शिक्षा का मॉडल अब पुराना हो चुका है?
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 12, 2026

Skills vs higher education

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारत में हर साल लाखों इंजीनियर और अन्य विषयों में ग्रेजुएट कॉलेजों से निकलते हैं। कॉलेजों से निकलने वाले इन युवा डिग्री धारकों में से एक बड़ा हिस्सा नौकरी के लिए असल में तैयार नहीं हो पाता है। यह अंतर अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा नीति और रोजगार बाजार दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या डिग्री आधारित पारंपरिक उच्च शिक्षा का मॉडल स्किल-फर्स्ट अर्थव्यवस्था के दौर में अपनी प्रासंगिकता खो रहा है? आंकड़े और नीतिगत बदलाव दोनों यही संकेत देते हैं कि भारत में शिक्षा का पारंपरिक मॉडल पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हुआ है। हालांकि, उद्योग की बदलती जरूरतों के साथ तालमेल बिठाना अब अनिवार्य हो गया है।

इंडस्ट्री और कॉलेज पाठ्यक्रम के बीच बढ़ती खाई

नवंबर 2025 में जारी इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 के 13वें संस्करण के अनुसार, भारत की समग्र रोजगार क्षमता (एम्प्लॉयबिलिटी) 2025 के 54.81 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 56.35 प्रतिशत हो गई, जो AI, डिजिटल कौशल और बदलती वर्कफोर्स जरूरतों के असर को दर्शाती है। यह रिपोर्ट ETS, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) के साझा अध्ययन पर आधारित है। इसके बावजूद, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2024 के आंकड़े बताते हैं कि स्नातक और परास्नातक युवाओं में बेरोज़गारी दर सबसे ज़्यादा है, जो शिक्षा और उद्योग की मांगों के बीच गहरे असंतुलन का संकेत है।

एक विश्लेषण में एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी बताते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था ने शिक्षा और रोज़गार की पारंपरिक संरचनाओं को तेज़ी से बदल दिया है, जिससे डिग्री हासिल करने और वास्तव में काम के लायक बनने के बीच का फासला और गंभीर हो गया है। कोर्सेरा की ग्लोबल स्किल्स रिपोर्ट में भी भारत समग्र कौशल दक्षता में वैश्विक स्तर पर 89वें पायदान पर है, हालांकि जेनरेटिव AI कोर्सों में नामांकन साल-दर-साल 107 प्रतिशत बढ़ा है, जो युवाओं की नई स्किल्स सीखने की भूख को दिखाता है।

बदलती जरूरतों के अनुसार सरकारी नीतियां

डिग्री बनाम स्किल्स की खाई को पाटने के लिए सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत बड़े बदलाव शुरू किए हैं। 2026 शैक्षणिक सत्र से लागू हो रहे नए ढांचे के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) 4 साल की डिग्री, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट प्रणाली और स्किल आधारित पढ़ाई को बढ़ावा दे रहा है।

नई व्यवस्था के तहत इंटर्नशिप को अनिवार्य किए जाने की योजना है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों के साथ काम करने का वास्तविक अनुभव मिल सके। इसके अलावा पाठ्यक्रम में व्यावसायिक कोर्स भी शामिल किए जा रहे हैं और छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग विषय चुनने की छूट दी जा रही है, ताकि शिक्षा सिर्फ डिग्री तक सीमित न रहकर रोजगार-केंद्रित बने।

इंडस्ट्री की जरूरतें और सरकारी कार्यक्रम

नीतिगत बदलावों के साथ-साथ सरकार ठोस कार्यक्रमों के जरिए भी यह गैप भरने की कोशिश कर रही है। स्किल इंडिया मिशन के तहत फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (PMKVY 4.0), प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (PM-NAPS) और जन शिक्षण संस्थान (JSS) योजना को एक ही केंद्रीय योजना में मिला दिया गया, जिसे 2022-23 से 2025-26 तक की अवधि के लिए मंजूरी मिली है।

जन शिक्षण संस्थान योजना के तहत 2018 से 2024 के बीच 26 लाख से ज्यादा अप्रशिक्षित, नवसाक्षर और स्कूल छोड़ चुके युवाओं, खासकर महिलाओं और SC/ST/OBC वर्गों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके साथ ही स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) प्रशिक्षण, मूल्यांकन, प्रमाणन और रोज़गार को डिजिटल रूप से जोड़ने का काम कर रहा है।

PM इंटर्नशिप योजना का योगदान

इंडस्ट्री से सीधा जुड़ाव बनाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना भी अहम है। इस योजना के तहत कम आय वाले परिवारों के 21 से 24 वर्ष के युवाओं को देश की शीर्ष 500 कंपनियों में 12 महीने की सशुल्क इंटर्नशिप का मौका मिलता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह योजना अब तक देश के 730 जिलों में चल रही है। इसके जरिए टाटा, रिलायंस, महिंद्रा, इंफोसिस, अडानी ग्रुप, मारुति सुज़ुकी, विप्रो, ICICI और सैमसंग जैसी 500 से ज़्यादा कंपनियां इससे जुड़ चुकी हैं। पायलट चरण में अब तक 1.27 लाख इंटर्नशिप अवसर पोस्ट किए जा चुके हैं और सरकार का लक्ष्य पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप का अनुभव देना है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्किल-आधारित शिक्षा मंच ‘स्किलिंगयू’ के संस्थापक प्रवीण कुमार राजभर का कहना है कि अगर शिक्षा रोजगार और बिजनेस से नहीं जुड़ी तो वह अधूरी रह जाती है। बेरोजगार युवा धीरे-धीरे परिवार और समाज पर बोझ बनने लगता है। इसलिए स्किल-बेस्ड शिक्षा अब अतिरिक्त विकल्प नहीं बल्कि समय की जरूरत है। विशेषज्ञ कहते हैं कि स्कूल-कॉलेज डिग्री तो दे देते हैं, लेकिन कमाने और आगे बढ़ने की व्यावहारिक क्षमता अक्सर पीछे छूट जाती है।

उत्तर प्रदेश AI एंड AVGC-XR समिट 2026 में उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे बड़ी चुनौती छात्रों की असुरक्षा की भावना है। डिग्री पूरी करने के बाद भी नौकरी को लेकर बनी चिंता और उन्होंने AI को खतरे की बजाय एक टूल के तौर पर अपनाने की सलाह दी।