
ईरान ने तेलुगु फिल्म भगवंत केसरी का क्लिप एक्स पर जारी किया है। (Photo: ChatGpt)
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब कूटनीतिक बयानों से निकलकर सोशल मीडिया और सिनेमा की दुनिया तक पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर दी गई कड़ी चेतावनी के बाद जिम्बाब्वे स्थित ईरानी दूतावास ने एक असामान्य अंदाज में जवाब दिया। दूतावास ने तेलुगु अभिनेता नंदमुरी बालकृष्ण की फिल्म ‘भगवंत केसरी’ का 58 सेकंड का एक्शन क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया और इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि ईरान को कमजोर या असहाय समझना ठीक नहीं होगा।
यह पोस्ट ऐसे समय आई जब अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधन में ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया था। 22 सितंबर को UNGA में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके सामने ईरान को लेकर एक बड़ा फैसला है—या तो ऐसा समझौता हो जिससे ईरान दोबारा निर्माण कर सके, या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को तेजी से खत्म किया जाए। ईरानी दूतावास ने इसके अगले ही दिन फिल्मी दृश्य के जरिए इस बयान पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी।
जिम्बाब्वे में ईरानी दूतावास ने X पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि ट्रंप ईरान को ‘annihilate’ यानी पूरी तरह खत्म करने की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पता है कि ईरान ‘defenceless’ यानी निहत्था नहीं है। इसके बाद दूतावास ने तंज करते हुए लिखा कि अमेरिका वाले हाल में हॉलीवुड की जगह बॉलीवुड फिल्में देख रहे हैं।
वीडियो में नंदमुरी बालकृष्ण का किरदार हथियारों से लैस लोगों के एक समूह का सामना करता दिखाई देता है। सामने मौजूद लोगों के हाथों में राइफल और दंगा-रोधी ढाल जैसे उपकरण हैं। दृश्य में गोलीबारी के बीच बालकृष्ण का किरदार एक बड़े ढक्कन जैसी चीज को ढाल की तरह इस्तेमाल करता है। बाद में वह भारी गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल कर हमलावरों का मुकाबला करता दिखाई देता है। इसी फिल्मी अतिशयोक्ति को ईरानी दूतावास ने अपने संदेश के साथ जोड़ दिया।
ईरानी दूतावास की पोस्ट में ‘Bollywood’ का जिक्र खास तौर पर ध्यान खींच रहा है। वजह यह है कि साझा किया गया वीडियो बॉलीवुड का नहीं, बल्कि तेलुगु सिनेमा का है। ‘भगवंत केसरी’ 2023 में रिलीज हुई तेलुगु भाषा की एक्शन फिल्म है, जिसका निर्देशन अनिल रविपुड़ी ने किया था और इसमें नंदमुरी बालकृष्ण मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में काजल अग्रवाल, श्रीलीला और अर्जुन रामपाल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई दिए थे।
यानी ईरान की सोशल मीडिया पोस्ट में भारतीय सिनेमा का इस्तेमाल तो किया गया, लेकिन उसके लिए ‘बॉलीवुड’ शब्द का इस्तेमाल तथ्यात्मक रूप से सही नहीं था। यही वजह है कि पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तेलुगु सिनेमा और बॉलीवुड को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। कई भारतीय दर्शकों ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि दुनिया के सामने पहुंची यह क्लिप वास्तव में टॉलीवुड यानी तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री की है।
ईरानी दूतावास का यह कदम केवल मनोरंजन के लिए साझा किया गया वीडियो नहीं था। इसका संदर्भ सीधे अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ा था। दूतावास ने फिल्म के उस दृश्य को चुना जिसमें एक अकेला किरदार कई हथियारबंद लोगों के सामने खड़ा दिखाई देता है। इसी दृश्य को ईरान की अपनी स्थिति के प्रतीक के रूप में पेश करने की कोशिश की गई यानी बड़ी सैन्य ताकत के सामने भी देश खुद को असहाय नहीं मानता।
यह तरीका पारंपरिक राजनयिक बयान से बिल्कुल अलग है। जहां सरकारी बयान आमतौर पर औपचारिक और सावधानी भरी भाषा में जारी किए जाते हैं, वहीं सोशल मीडिया पर मीम, फिल्मी दृश्य और लोकप्रिय संस्कृति का इस्तेमाल संदेश को तेजी से लोगों तक पहुंचाने का तरीका बन गया है। ईरानी राजनयिक सोशल मीडिया खातों द्वारा पहले भी अमेरिकी नीतियों या ट्रंप को लेकर लोकप्रिय संस्कृति और हास्य का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
ईरानी दूतावास का वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है। UNGA में ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और दोनों देशों के बीच संभावित समझौते का मुद्दा उठाया। उन्होंने एक ओर समझौते की संभावना का जिक्र किया, लेकिन दूसरी ओर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की बेहद कठोर भाषा भी इस्तेमाल की।
ईरान ने अमेरिकी बयानों को खारिज करते हुए अपनी स्थिति का बचाव किया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना की और ईरान को संघर्ष में पीड़ित पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के सदन से बाहर जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि भारत की लोकप्रिय संस्कृति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संदेश का हिस्सा बन गई। नंदमुरी बालकृष्ण की एक्शन छवि और ‘भगवंत केसरी’ का अतिरंजित लड़ाई वाला दृश्य अब अमेरिका-ईरान तनाव पर बने एक कूटनीतिक सोशल मीडिया संदेश में इस्तेमाल हुआ।
इससे यह भी पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सोशल मीडिया संचार किस तरह बदल रहा है। सरकारें और राजनयिक संस्थाएं अब केवल प्रेस विज्ञप्ति या औपचारिक भाषणों तक सीमित नहीं हैं। वे फिल्मों, मीम्स, लोकप्रिय कलाकारों और वायरल वीडियो के जरिए भी अपनी बात रखने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि इस तरह की पोस्ट को औपचारिक सैन्य या कूटनीतिक नीति का संकेत मानना उचित नहीं होगा। यह मुख्यतः एक सोशल मीडिया प्रतिक्रिया थी, जिसका उद्देश्य ट्रंप के बयान पर ईरान की राजनीतिक और सार्वजनिक संदेश-रणनीति को अलग अंदाज में पेश करना था।
फिलहाल 58 सेकंड की यह क्लिप एक अलग वजह से चर्चा में है। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच गंभीर भू-राजनीतिक तनाव है, दूसरी तरफ उसी तनाव की प्रतिक्रिया के लिए भारत की एक तेलुगु फिल्म का एक्शन दृश्य चुना गया। ट्रंप की ‘तबाही’ वाली भाषा के जवाब में बालकृष्ण का फिल्मी प्रतिरोध—इसने कूटनीति, सिनेमा और सोशल मीडिया को एक ही फ्रेम में ला दिया है।
Updated on:
24 Sept 2026 12:54 pm
Published on:
24 Sept 2026 12:51 pm
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