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मुश्किल ‘फिजिक्स’ को बनाया बच्चों का खेल: UP की टीचर शीतल देवल देश के ‘टॉप-5’ फिजिक्स शिक्षकों में चयनित

उत्तर प्रदेश की इकलौती टीचर शीतल देवल को दो प्रतिष्ठित निजी संस्थाओं द्वारा नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया है। शीतल देवल, देश के टॉप-5 फिजिक्स शिक्षकों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 05, 2026

Teacher Sheetal Deval gets National Award

टीचर शीतल देवल (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में मेरठ जिले की महिला शिक्षक शीतल देवल ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मेरठ के कुढ़ला स्थित राजकीय हाईस्कूल में भौतिक विज्ञान पढ़ाने वालीं अध्यापिका शीतल देवल ने पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। शिव नाडर फाउंडेशन और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सैद बिजनेस स्कूल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित "इंडियाज बेस्ट टीचर्स अवॉर्ड्स" के भौतिक विज्ञान वर्ग में देशभर से चुने गए 5 फाइनलिस्ट शिक्षकों में शीतल देवल का नाम शामिल है। वे उत्तर प्रदेश की इकलौती शिक्षिका हैं, जिन्हें इस सम्मान के लिए 4-5 सितंबर को दिल्ली-NCR स्थित शिव नाडर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस में आयोजित समारोह में बुलाया गया।

कठिन विषय को बनाया दिलचस्प

भौतिक विज्ञान, कई बार बच्चों को कठिन और उबाऊ लगता है। प्रकाश से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझना स्टूडेंट्स के लिए चुनौती बन जाता है। शीतल देवल ने इसी चुनौती को अवसर में बदला। उन्होंने प्रकाश की विभिन्न परिघटनाओं को समझाने के लिए खास प्रोटोटाइप मॉडल तैयार किए, जिनके सहारे बच्चे खेल-खेल में न सिर्फ अवधारणाएं समझ लेते हैं बल्कि उन्हें लंबे समय तक याद भी रख पाते हैं। मेरठ की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षिका का मानना है कि विज्ञान को किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोगों व गतिविधियों के जरिए पढ़ाया जाए तो कठिन विषय भी सहज हो जाते हैं। उनके इसी नवाचार को पुरस्कार चयन का आधार बताया गया है।

क्या है यह पुरस्कार?

शिव नाडर फाउंडेशन और ऑक्सफोर्ड के सैद बिजनेस स्कूल की पहल के तहत भौतिकी की शिक्षक शीतल देवल को सम्मानित किया गया है। शीतल देवल को "इंडियाज बेस्ट टीचर्स अवॉर्ड्स" का खिताब दिया गया है। यह खिताब कोई सरकारी पुरस्कार नहीं है। यह पुरस्कार भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिए जाने वाले आधिकारिक "राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार" (National Teachers' Award) से अलग है। ऑक्सफोर्ड सैद बिजनेस स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, राष्ट्रीय पहल के तहत कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को 8 विषयों- भूगोल, बिजनेस स्टडीज एवं उद्यमिता, कंप्यूटर साइंस, अर्थशास्त्र, भौतिक विज्ञान, अंग्रेजी, पर्यावरण विज्ञान और गणित में सम्मानित किया जा रहा है।

प्रत्येक विषय-वर्ग से देशभर की नामांकन-प्रविष्टियों में से शीर्ष 5 शिक्षकों को फाइनल के लिए दिल्ली बुलाया गया। यानी कुल 80 फाइनलिस्ट शिक्षक इस दो-दिवसीय आयोजन का हिस्सा बने। इसका नामांकन इसी वर्ष 1 मई से 31 जुलाई तक स्कूल प्रधानाचार्यों के जरिए लिए गए थे। विजेता शिक्षकों को ऑक्सफोर्ड के सैद बिजनेस स्कूल में एक सप्ताह के पूर्ण-वित्तपोषित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिलेगा।

हजारों में एक शीतल

शीतल देवल का चयन हजारों सरकारी-गैरसरकारी शिक्षकों के आवेदनों में से हुआ है। भौतिक विज्ञान वर्ग के शीर्ष पांच फाइनलिस्ट में शीतल के अलावा तेलंगाना, दिल्ली, महाराष्ट्र और पुडुचेरी से एक-एक शिक्षक शामिल बताए गए हैं। आयोजकों के अनुसार, जूरी पैनल में शिव नाडर फाउंडेशन के शिक्षाविदों के साथ-साथ ऑक्सफोर्ड के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ भी शामिल रहे, जिन्होंने विषय-दक्षता, शिक्षण पद्धति में नवाचार और छात्रों पर पड़ने वाले असर के आधार पर मूल्यांकन किया।

शिक्षकों सम्मानित करने के लिए दिल्ली में दो दिनों कार्यक्रम रखा गया था। पहले दिन सभी 80 फाइनलिस्ट शिक्षकों ने अपने-अपने विषय की जूरी के सामने अपना काम प्रस्तुत किया, जबकि दूसरे दिन यानी 5 सितंबर को पुरस्कार समारोह में विजेताओं की घोषणा हुई। आयोजकों का कहना है कि यह पहल शिक्षकों के पेशे को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और कक्षा में हो रहे नवाचारों को सामने लाने के मकसद से शुरू की गई है, ताकि सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों के शिक्षकों को एक समान मंच मिल सके।