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विश्व हृदय दिवस विशेष: हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है संकेत, 80% लोग नहीं पहचान पाते ये संकेत

हार्ट अटैक हमेशा अचानक तेज सीने के दर्द या बेहोशी के साथ ही नहीं आता। कई रोगियों में उनका शरीर पहले ही हार्ट अटैक के संकेत देने लगता है, लेकिन इसे लगभग 80% लोग पहचान नहीं पाते हैं। आइए जानते हैं, हार्ट अटैक से पहले हमारा शरीर कौन-कौन से संकेत देता है?
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भारत

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Vinay Shakya

•

Sep 28, 2026

World Heart Day Special

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। विश्व हृदय दिवस से पहले हृदय रोग विशेषज्ञों ने चेताया है कि हार्ट अटैक हमेशा अचानक तेज दर्द या बेहोशी के साथ नहीं आता है। कई मरीजों में शरीर पहले ही संकेत देने लगता है, लेकिन उन्हें गैस, अपच, थकान या सामान्य कमजोरी समझकर टाल दिया जाता है। यही अनदेखी इलाज में देरी और हृदय की मांसपेशियों को ज्यादा नुकसान की वजह बन सकती है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन का 2026 का अभियान भी "डोंट मिस अ बीट" की भावना को आगे बढ़ाते हुए लक्षणों को पहचानने पर जोर देता है।

भारत सहित पूरी दुनिया में मौत का आंकड़ा

WHO के मुताबिक, 2022 में दुनिया भर में करीब 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोगों से हुई, जो कुल मौतों का लगभग 32% है। इनमें 85% मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से हुईं। भारत में स्थिति और गंभीर है। फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हृदय रोग से मृत्यु दर प्रति एक लाख आबादी पर 272 है, जबकि वैश्विक औसत 235 है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारतीयों में हृदय रोग करीब एक दशक पहले शुरू हो जाता है और लगभग आधी हार्ट अटैक मौतें इलाज में देरी के कारण घर पर ही हो जाती हैं।

कम उम्र में भी खतरा: क्या कोविड जिम्मेदार?

अस्पतालों की ओपीडी में अब 20 से 50 वर्ष के मरीज भी लगातार पहुंच रहे हैं। इनमें कई को पहले हृदय रोग का कोई इतिहास नहीं होता। चिकित्सकों के अनुसार धूम्रपान-तंबाकू के अलावा हाई बीपी, डायबिटीज, बढ़ा कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, तनाव, अस्वास्थ्यकर खानपान और शारीरिक निष्क्रियता जोखिम बढ़ाते हैं।

कोविड के बाद इस बदलाव की चर्चा आम है, लेकिन आधिकारिक अध्ययन कुछ और बताते हैं। ICMR के अध्ययन में 18 से 45 वर्ष के वयस्कों में कोविड टीके और अचानक मौत के बीच कोई संबंध नहीं मिला। जोखिम कारकों में परिवार में अचानक मौत का इतिहास, कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होना, हाल में अत्यधिक शराब और बहुत कठिन शारीरिक मेहनत सामने आए।

AIIMS के जारी अध्ययन के शुरुआती विश्लेषण में इस आयु वर्ग में अचानक मौत का प्रमुख कारण अब भी हार्ट अटैक है। इसी विश्लेषण में कारणों के स्वरूप में पहले की तुलना में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। वहीं, कुछ हृदय रोग विशेषज्ञ मानते हैं कि युवाओं में हार्ट अटैक बीते 20-25 वर्षों से लगातार बढ़ रहे हैं।

सीने के दर्द के बिना भी संकेत

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, सीने में दबाव या भारीपन के साथ हाथ, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट में दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली और चक्कर हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। महिलाओं में सांस फूलना, मतली-उल्टी और पीठ या जबड़े का दर्द अपेक्षाकृत ज्यादा देखा जाता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार कई लोगों में चेतावनी के लक्षण घंटों, दिनों या हफ्तों पहले दिखने लगते हैं, जबकि महिलाओं, डायबिटीज के मरीजों और बुजुर्गों में लक्षण हल्के या अस्पष्ट हो सकते हैं। इसलिए नया, अचानक शुरू हुआ या मेहनत के दौरान बढ़ने वाला लक्षण केवल गैस की दवा लेकर टालना खतरनाक हो सकता है।

एक-एक मिनट कीमती

शुरुआती समय, जिसे आम तौर पर गोल्डन ऑवर कहा जाता है। इलाज के लिए सबसे अहम है। जितनी जल्दी इलाज मिलता है, हृदय की मांसपेशियों को उतना कम नुकसान होता है। ICMR के एक जिला-स्तरीय अध्ययन में हृदय रोग और स्ट्रोक से असमय मरने वालों में केवल 10.8% ही लक्षण शुरू होने के पहले घंटे में उचित स्वास्थ्य केंद्र पहुंच सके। भारत के अस्पताल-आधारित अध्ययनों में 36 से 42% हार्ट अटैक मरीज छह घंटे से ज्यादा देर से पहुंचे।

सीने में लगातार दर्द या दबाव, सांस की दिक्कत, ठंडा पसीना या बेहोशी जैसे लक्षणों पर तुरंत एंबुलेंस (112 या राज्य की 108 सेवा) बुलाना बेहतर है। AHA के अनुसार, एंबुलेंस से इलाज मरीज के अस्पताल पहुंचने से करीब एक घंटा पहले शुरू हो सकता है। मेयो क्लिनिक की सलाह है कि एंबुलेंस न मिले तो किसी और से गाड़ी चलवाकर अस्पताल जाएं और खुद तभी ड्राइव करें जब कोई विकल्प न हो।

सामान्य ECG से निश्चिंत न हों

अस्पताल में आमतौर पर ईसीजी और रक्त जांच होती है। ट्रोपोनिन का स्तर हार्ट अटैक शुरू होने के करीब दो-तीन घंटे बाद बढ़ता दिखता है। इसलिए पहली रिपोर्ट सामान्य होने पर भी अगले 12 घंटे में दोबारा जांच की जा सकती है। डॉक्टर लक्षणों, ईसीजी और ट्रोपोनिन को मिलाकर स्थिति आंकते हैं। एक बार ईसीजी सामान्य आने से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।

हार्ट अटैक से बचाव के व्यवहारिक उपाय

WHO के अनुसार ज्यादातर हृदय रोग तंबाकू, अस्वास्थ्यकर आहार (ज्यादा नमक, चीनी, वसा), मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, शराब और वायु प्रदूषण जैसे कारकों पर काम करके रोके जा सकते हैं। परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास हो तो नियमित जांच जरूरी है। धूम्रपान-तंबाकू पूरी तरह छोड़ें, बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें, रोज शारीरिक गतिविधि करें और नींद व तनाव का ध्यान रखें।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव जागरुकता के उद्देश्यों के लिए हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर विशेषज्ञों की राय अवश्य लें।)